Lok Sabha Chunav 2024: नगीना से ही प्रचार क्यों शुरू कर रहे हैं बसपा के आकाश आनंद?

Lok Sabha Election UP: बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे और उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी आकाश आनंद लोकसभा चुनाव प्रचार की शुरुआत नगीना लोकसभा सीट से कर कर रहे हैं। पिछली बार इस रिजर्व (SC) सीट से बीएसपी के गिरीश चंद्र जीते थे, लेकिन तब सपा-बसपा और रालोद का गठबंधन था। इस बार आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) के नेता चंद्रशेखर आजाद भी यहां से प्रत्याशी हैं।

नगीना में पहले चरण में ही 19 अप्रैल को चुनाव है और 34 वर्षीय बीएसपी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद यहां 6 अप्रैल को रैली के माध्यम से बीएसपी के चुनावी अभियान का बिगुल बजाएंगे। उनकी बुआ और पार्टी चीफ मायावती 13 अप्रैल को हरिद्वार से प्रचार शुरू करेंगी और अगले दिन से ही पश्चिमी यूपी के मुस्लिम-जाट बहुल क्षेत्रों में वोट मांगेंगी।

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नगीना में करीब 20% दलित वोट अनुमानित
नगीना लोकसभा सीट पर दलितों की आबादी 20% है और मुसलमान 40% हैं। बसपा उम्मीदवार ने पिछली बार भाजपा प्रत्याशी को 1.66 लाख मतों से हराया था। लेकिन, अब चुनावी समीकरण बदल चुके हैं। फिर भी दलित-मुस्लिम मतों के निर्णायक भूमिका में होने की वजह से बीएसपी को इस सीट से ज्यादा उम्मीदें हैं।

चंद्रशेखर की उम्मीदवारी से बढ़ी है बीएसपी की चुनौती
मायावती ने अबकी बार यहां से नए उम्मीदवार सुरेंद्र पाल सिंह को उतारा है। लेकिन, भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर के मैदान में होने से उसकी चुनौती बढ़ गई है। 36 वर्षीय चंद्रशेखर को लगता है कि खासकर युवा मुसलमान और युवा दलित वोटरों में उनकी लोकप्रियता की वजह से वह टक्कर देने की स्थिति में हैं। यही नहीं वे लंबे समय से नगीना इलाके में राजनीतिक रूप से सक्रिय भी रहे हैं।

आजाद को लग रहा था कि अखिलेश यादव के माध्यम से वह यहां से इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार बन सकते हैं। लेकिन, समाजवादी पार्टी ने उन्हें यह सीट देने से मना कर दिया तो वह अकेले ही भाग्य आजमाने उतर गए हैं।

दलित युवाओं में आकाश या चंद्रशेखर में से ज्यादा लोकप्रिय कौन?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक बसपा प्रत्याशी सुरेंद्र पाल सिंह का कहना है, 'युवाओं में चंद्रशेखर की तुलना में आकाश ज्यादा लोकप्रिय हैं। आकाश के कैंपेन से नगीना में और ज्यादा युवा बीएसपी से जुड़ेंगे।'

नगीना से ही प्रचार क्यों शुरू कर रहे आकाश?
लेकिन बीएसपी के एक अन्य नेता का कहना अलग है। उनके मुताबिक, 'दलितों में मायावती के बाद चंद्रशेखर यूपी में दूसरे सबसे ज्यादा लोकप्रिय नेता हैं; और उनके साथ एडवांटेज ये है कि वह एक युवा नेता हैं। लेकिन, आकाश को प्रचार के लिए उतारने से बीएसपी को उन दलित युवाओं को आकर्षित करने में मदद मिलेगी जो या तो बीजेपी या चंद्रशेखर की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।'

बसपा से एक-एक कर निकल चुके हैं दिग्गज
बसपा के साथ आज दिक्कत ये है कि सिर्फ मायावती ही उसका एकमात्र बड़ा चेहरा रह गई हैं। कई दलित, मुस्लिम और ओबीसी नेता जो स्थापना के समय से इसके साथ जुड़े थे, वह पार्टी से निकल चुके हैं। लिहाजा, मायावती धीरे-धीरे भतीजे आकाश आनंद को आगे बढ़ाने में लगी हैं, लेकिन चुनावों में अभी उन्हें अपनी लोकप्रियता साबित करना बाकी है।

आकाश के साथ बाद में प्रचार अभियान में जुड़ेंगी मायावती
यूपी में बसपा के चुनाव प्रचार का आगाज आकाश आनंद करेंगे। लेकिन, 14 अप्रैल से खुद मायावती भी मोर्चा संभाल लेंगी। वह देवबंद में रैली करेंगी और फिर मुजफ्फरनगर में भी पार्टी का प्रचार करेंगी। अगले दो दिनों तक उनका मुरादाबाद और बिजनौर में भी चुनावी कार्यक्रम है।

बीएसपी सूत्रों का कहना है कि उनके भतीजे यूपी और अन्य राज्यों को मिलाकर कम से कम 25 रैलियां करेंगे, जिनमें कई रैली में वह मायावती के साथ भी मौजूद रहेंगे। वह खुर्जा, बरेली, बुलंदशहर, आगरा, मथुरा, हाथरस, अलीगढ़ और सहारनपुर में भी पार्टी के लिए प्रचार करते नजर आएंगे।

2019 के लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन करके बीएसपी काफी फायदे में रही थी। वह 80 में से 38 सीटों पर चुनाव लड़ी और 10 सीटें जीत गई। जबकि, समाजवादी पार्टी 37 सीटों पर लड़ने के बाद भी 2014 की तरह 5 सीटों से आगे नहीं बढ़ सकी। लेकिन, 2022 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी अकेले लड़ी और 403 सीटों में से एक में भी खाता नहीं खोल सकी।

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