यूपी के आजमगढ़ में हो रहा ये 'अशुभ पुनर्विवाह', वायरल हुआ कार्ड, जानें पूरा मामला
lal bihari mritak: इन दिनों शादियों का सीजन चल रहा है और हर तरफ बारात और शादियों की धूम है। इन शादियों के शुभ मौके पर एक कार्ड सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसको देखकर हर कोई अचंभित है। शादी जिसमें हर चीज शुभ हो इसका खास ख्याल रखा जाता है वहीं ये कार्ड जो वायरल हो रहा है वो 'अशुभ पुनर्विवाह' का है। ये 'अशुभ पुनर्विवाह' उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में नए साल में जनवरी माह में होने वाला है, जिसकी तैयारी जोरो पर हो रही है। आइए जानते हैं आखिर कौन कर रहा ये 'अशुभ पुनर्विवाह'?

ये 'अशुभ पुनर्विवाह' 9 जनवरी 2024 को यूपी के आजमगढ़ जिले के भगतपुरा अमिलो थाना मुकारकपुर में होने वाला है। इस अशुभ पुनर्विवाह के कार्ड में एक दुल्हन और कंकाल की फोटो छपी है। इतना ही नहीं दूल्हे के नाम के ऊपर लिखा है वर्षों तक मुर्दा रहा 30 वर्ष का दूल्हा लालबिहारी मृतक दागी और दुल्हन के नाम के ऊपर वर्षों तक विधवा रही 67 साल की दुल्हन श्रीमती कर्मी देवी लिखा है।

दरअसल, ये अशुभ पुनर्विवाह आजमगढ़ के लाल बिहारी मृतक जिन्होंने स्वयं को जिंदा साबित करने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी, उनका है। सरकारी रिकॉर्ड में मुर्दा करार दिए जाने के बाद लाल बिहारी अब अपनी 67 साल की पत्नी कर्मी देवी से दोबारा पुनर्विवाह रचाने जा रहे हैं।
30 साल पहले सरकारी रिकार्ड में लाल बिहारी को मृतक घोषित कर दिया गया था लंबी लड़ाई लड़ने के बाद उन्हें 1994 में जिंदा करार दिया गया था। 1955 में जन्में लाल बिहारी अपने कार्ड में अपनी उम्र 30 वर्ष इसलिए लिखाई है क्योंकि सरकारी रिकार्ड के हिसाब से उनकी उम्र 30 वर्ष है।
वन इंडिया से बात करते हुए लाल बिहारी ने बताया कि अपनी पत्नी से पुनर्विवाह इसलिए करना चाहते हैं ताकि लोगों का ध्यान जिंदा मृतकों की हालत पर जाए, जो सरकारी अभिलेखों में जिंदा रहते हुए मृत दर्ज कर दिए जाते हैं।
बता दें लाल बिहारी ने ऐसे मृतक जिंदा लोगों की लड़ाई लड़ने के लिए अपना एक मृतक संघ भी बनाया है जो लंबे समय तक काफी चर्चा में भी रहा।
लाल बिहारी मृतक ने बताया कि हमारे पुनर्विवाह में हमारे नाती, पोते और सभी सगे संबंधी शामिल होंगे। उन्होंने बताया मैं अपनी पत्नी से विधिवत पुनर्विवाह करूंगा, क्योंकि सरकारी अभिलेखों में मैं तो मृतक रहा और मेरी पत्नी 30 साल से भी अधिक समय तक विधवा रही।
लाल बिहारी पर बन चुकी है ये बॉलीवुड फिल्म
लाल बिहारी की सच्ची घटना पर फिल्म भी बन चुकी है, 'कागज' नाम की फिल्म जिसमें एक्टर पंकज त्रिपाठी मुख्य भूमिका में थे। जो स्वयं को जीवित साबित करने के लिए कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाते हैं। ये फिल्म यूपी के आजमगढ़ के इन्हीं लाल बिहारी मृतक पर अधारित है। जिन्होंने 8 नवंबर 2023 को मृतक संघ भी बनाया था।
लाल बिहारी मृतक प्रोफाइल
लाल बिहारी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अमिलो के रहने वाले हैं। ये किसान और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिन्हें सरकारी रिकार्ड में 1975 और 1994 के बीच आधिकारिक तौर पर मृत घोषित कर दिया गया था। लाल बिहारी ने यह साबित करने के लिए कि वो मरे नहीं जिंदा हैं इसके लिए उन्होंने 19 साल तक नौकरशाही से लड़ाई लड़ी। लाल बिहारी को जी नोबेल शांति पुरस्कार 2003 अवार्ड भी मिल चुका है।












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