Kuldeep Singh Sengar जेल में ही रहेगा? हाई कोर्ट से Unnao पीड़िता के पिता की मौत मामले में जमानत याचिका खारिज
Unnao Kuldeep Singh Sengar Case: उन्नाव के बहुचर्चित रेप मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। अदालत ने 19 जनवरी 2026 को पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत (कस्टोडियल डेथ) के मामले में उनकी सजा निलंबन और जमानत की याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। इस फैसले से सेंगर की जेल से रिहाई की संभावनाएं फिलहाल खत्म हो गई हैं। वे अप्रैल 2018 से जेल में बंद हैं और इस मामले में 10 साल की सजा काट रहे हैं।
मुख्य रेप मामले में भी उनकी अपील लंबित है, जहां सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जमानत पर स्टे लगा रखा है। यह फैसला न केवल पीड़िता के परिवार के लिए राहत है, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग और महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर न्याय व्यवस्था की सख्ती का संकेत भी देता है।

फैसले का सार और इसका असर
दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने जस्टिस रविंदर दुदेजा की अगुआई में इस याचिका पर सुनवाई की। नवंबर 2025 में फैसला रिजर्व किया गया था और 19 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 2:30 बजे इसे सुनाया गया। कोर्ट ने साफ कहा कि मामला बेहद गंभीर है, जिसमें प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा कानून का दुरुपयोग हुआ है। पीड़िता पक्ष के तर्कों को ध्यान में रखते हुए, जहां परिवार की सुरक्षा पर खतरे की आशंका जताई गई थी, अदालत ने सजा निलंबन के लिए पर्याप्त आधार न होने का हवाला दिया।
नतीजतन, सेंगर को इस मामले में राहत नहीं मिली और वे जेल में ही रहेंगे। मुख्य रेप मामले में दिसंबर 2025 में हाई कोर्ट से मिली सशर्त जमानत पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे पहले से ही लागू है, इसलिए कुल मिलाकर उनकी रिहाई मुश्किल लग रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला एक मजबूत संदेश देता है कि कोई भी कितना प्रभावशाली हो, कानून के सामने जवाबदेह होगा। पीड़िता के परिवार ने इसे न्याय की जीत बताया है, जबकि सेंगर पक्ष इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।
What Is Unnao Case: उन्नाव रेप और जुड़े अपराधों का ढेर
यह पूरा प्रकरण उन्नाव के माखी थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जो 2017 में शुरू हुआ था। मुख्य मामला एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार का था, जिसमें कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी ठहराया गया। 2019 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। लेकिन इससे जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण मामला पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत का है। अप्रैल 2018 में पीड़िता के पिता को हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि सेंगर के भाई और सहयोगियों ने उन्हें रास्ते में पीटा, उसके बाद पुलिस ने हिरासत में लिया।
हिरासत के दौरान पिटाई और चिकित्सकीय लापरवाही से उनकी मौत हो गई। पीड़िता के परिवार ने इसे साजिश करार दिया, जिसमें सेंगर का प्रभाव शामिल था। मामले की गंभीरता देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने सेंगर सहित कई आरोपियों के खिलाफ साजिश, साक्ष्य से छेड़छाड़ और सरकारी पद के दुरुपयोग की धाराएं जोड़ीं। लंबी जांच के बाद 13 जुलाई 2018 को चार्जशीट दाखिल हुई और 4 मार्च 2020 को ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई। इस सजा में आईपीसी की धारा 304 (गैर-इरादतन हत्या) समेत अन्य गंभीर धाराएं शामिल थीं।
Kuldeep Singh Sengar Case Timeline: कैसे पहुंचा मामला यहां तक?
कहानी 2017 से शुरू होती है, जब उन्नाव की नाबालिग लड़की ने सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाया। मामला सुर्खियों में आया और सेंगर की गिरफ्तारी हुई। अप्रैल 2018 में पीड़िता के पिता पर हमला हुआ, जिसके बाद उनकी हिरासत में मौत हो गई। माखी थाने में 3 अप्रैल 2018 को अपराध संख्या 89/18 दर्ज हुई, जिसमें धारा 323, 504, 506 और आर्म्स एक्ट शामिल थे। सीबीआई ने 9 अप्रैल को जांच अपने हाथ में ली और साजिश की परतें खोलीं। इसमें सेंगर के अलावा उनके भाई जयदीप, रिश्तेदार और पुलिस अधिकारी जैसे अशोक सिंह भदौरिया, कामता प्रसाद सिंह शामिल पाए गए।
जांच में धारा 120बी (साजिश), 193 (झूठे साक्ष्य) और 201 (साक्ष्य नष्ट करना) जोड़ी गईं। ट्रायल कोर्ट ने 13 मार्च 2020 को सजा सुनाई। सेंगर ने अपील की और दिसंबर 2025 में मुख्य रेप मामले में हाई कोर्ट से सशर्त जमानत मिली, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 29 दिसंबर 2025 को स्टे लगा दिया। कस्टोडियल डेथ मामले में 6 नवंबर 2025 को अंतिम सुनवाई हुई और 19 जनवरी 2026 को याचिका खारिज हुई। इस दौरान पीड़िता ने अतिरिक्त सबूत पेश किए, जिसमें सेंगर पर जांच प्रभावित करने के आरोप थे।
Delhi High Court On Kuldeep Singh Sengar Case: क्यों खारिज हुई याचिका
हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए केस की गंभीरता पर जोर दिया। अदालत ने माना कि सेंगर ने अपनी स्थिति का फायदा उठाकर पीड़िता के परिवार को प्रताड़ित किया। पीड़िता पक्ष ने तर्क दिया कि रिहाई से परिवार की जान को खतरा है, और कोर्ट ने इसे स्वीकार किया। कोर्ट ने कहा कि सजा निलंबन के लिए मजबूत आधार चाहिए, जो यहां नहीं हैं। यह फैसला महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर उठे सवालों का जवाब भी है। उन्नाव मामला देशभर में सत्ता के दुरुपयोग का प्रतीक बन चुका है, और यह आदेश उसमें एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
पीड़िता और परिवार का पक्ष: खतरे की आशंका और न्याय की लड़ाई
पीड़िता ने बार-बार कहा है कि सेंगर की रिहाई से उनका परिवार असुरक्षित हो जाएगा। जनवरी 2026 में उन्होंने हाई कोर्ट में नई अर्जी दाखिल की, जिसमें सेंगर पर फर्जी दस्तावेजों और जांच प्रभावित करने के आरोप लगाए। सेंगर की बेटियों पर भी सोशल मीडिया के जरिए पीड़िता की पहचान उजागर करने के आरोप हैं। सीबीआई ने भी विरोध किया, कहते हुए कि रिहाई से गवाहों पर दबाव बढ़ेगा। पीड़िता के परिवार को यह फैसला राहत देने वाला लग रहा है, लेकिन वे कहते हैं कि पूरा न्याय तब मिलेगा जब अपीलों का अंतिम फैसला आएगा।
Kuldeep Singh Sengar कुलदीप सिंह सेंगर का बैकग्राउंड: राजनीतिक सफर से जेल तक
कुलदीप सिंह सेंगर उन्नाव के बांगरमऊ से पूर्व बीजेपी विधायक थे। वे चार बार विधायक चुने गए, लेकिन 2018 में पार्टी से निष्कासित कर दिए गए। मुख्य रेप मामले में उम्रकैद और कस्टोडियल डेथ में 10 साल की सजा के साथ वे 2018 से जेल में हैं। उनके परिवार पर भी कई आरोप लगे हैं, लेकिन वे इनकार करते रहे हैं। सेंगर की अपीलें हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।
अब आगे क्या: सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और व्यापक संदेश
सेंगर इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। मुख्य रेप मामले में स्टे हटने पर ही रिहाई संभव है, जहां सुनवाई जारी है। पीड़िता पक्ष मजबूत स्थिति में है, और सीबीआई-कोर्ट की सतर्कता से न्याय की उम्मीद बंधी है। यह केस 2017 से समाज में गुस्से और न्याय की मांग का प्रतीक है। फैसला महिलाओं के खिलाफ अपराधों में सख्ती का संकेत देता है, लेकिन अंतिम न्याय अपीलों पर निर्भर करता है।












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