जानिए कौन हैं प्रोफेसर ALok Kumar Rai जिन्होंने तोड़ा lucknow University के 54 सालों का रिकॉर्ड
प्रोफेसर राय ने 30 दिसंबर, 2019 को एलयू वीसी के रूप में ज्वाइन किया था। उनका तीन साल का कार्यकाल शुक्रवार को समाप्त हो गया था और पिछले कुछ दिनों से यूनिवर्सिटी वीसी की नियुक्ति के लिए सभी की निगाहें राजभवन पर टिकी थीं।

Lucknow University Update : लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार राय (Lucknow University VC ALok Kumar Rai) को फिर से विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया। प्रोफेसर राय आजादी के बाद दूसरा कार्यकाल पाने वाले दूसरे कुलपति बन गए हैं। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को देर शाम उनको दूसरी बार कुलपति बनाए जाने का आदेश जारी किया। हालांकि इस दौड़ में 15 लोग शामिल थे लेकिन उनके काम की बदौलत ही राज्यपाल ने दूसरी बार उन्हें लखनऊ विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया है।
आलोक राय ने विश्वविद्यालय को दिलाई नई पहचान
विश्वविद्यालय प्रशासन की माने तो 54 साल बाद यह मौका आया है जब कोई वीसी लगातार छह साल तक काम करेगा। इसके अलावा, प्रोफेसर राय ने राष्ट्रीय मूल्यांकन प्रत्यायन परिषद (NAAC) में A++ ग्रेड प्राप्त करने वाले पहले राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति बनकर भी इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया है।
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उन्हें विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष में नेतृत्व करने और 100 साल के समारोह आयोजित करने के लिए भी याद किया जाएगा। इस फैसले से एलयू कैंपस में उन शिक्षकों और छात्रों के लिए खुशी की लहर आ गई, जो प्रोफेसर राय के दूसरे कार्यकाल की उम्मीद कर रहे थे।
2019 में पहली बार बने थे विश्वविद्यालय के कुलपति
प्रोफेसर राय ने 30 दिसंबर, 2019 को एलयू वीसी के रूप में ज्वाइन किया था। उनका तीन साल का कार्यकाल शुक्रवार को समाप्त हो गया था और पिछले कुछ दिनों से यूनिवर्सिटी वीसी की नियुक्ति के लिए सभी की निगाहें राजभवन पर टिकी हुई थीं।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, जो राज्य के विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति भी हैं, ने सर्च कमेटी द्वारा अनुशंसित नामों में से कुलपति के नाम पर अंतिम सहमति दी। कुलपति पद के लिए आवेदन करने वाले करीब 15 शिक्षाविदों की सर्च कमेटी ने जांच की थी। इसके बाद प्रोफेसर राय सहित तीन शिक्षाविदों और गोरखपुर और गुजरात के एक-एक व्यक्ति का साक्षात्कार लिया गया।
राजभवन का विश्वास जीतने में सफल रहे आलोक राय
राजभवन के सूत्रों ने बताया कि चयन प्रक्रिया में देरी हुई क्योंकि छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति, प्रोफेसर विनय पाठक, जो कथित रूप से भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे थे, कमेटी के तीन सदस्यों में से एक थे।
हाल ही में राजभवन ने प्रोफेसर पाठक को सर्च कमेटी से हटाकर उनकी जगह शिक्षाविद् आनंद के त्यागी को लाया था। एलयू की कार्यकारी परिषद ने दूसरे सदस्य के रूप में गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रमा शंकर दुबे का नाम भेजा था, जबकि तीसरा सदस्य उच्च न्यायालय से न्यायाधीश है। राजभवन ने इस साल 11 अक्टूबर को इस पद के लिए विज्ञापन दिया था।












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