उत्तर प्रदेश चुनाव खास: एक विधानसभा सीट पर आज भी है राजशाही का दौर

बाह विधानसभा सीट पर रानी पक्षालिका सिंह चुनाव लड़ रही हैं। उनके लिए पूरा राजघराना वोट मांगने में जुटा हुआ है।

आगरा। बाह विधानसभा सीट पर आज भी राजशाही का दौर देखने को मिल रहा है। 1957 में राजा भदावर रिपुदमन सिंह की राजनीति का वो दौर आज भी बाह की जनता को याद है जब राजा भदावर रिपुदमन सिंह बिना चुनाव प्रचार किए ही चुनाव जीत जाते थे। राजा भदावर को जनता ने चार बार अपना विधायक चुना। रिपुदमन सिंह के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को उनके बेटे अरिदमन सिंह ने आगे बढ़ाया और छह बार बाह विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। भदावर राजघराने की राजनीतिक विरासत को अब अरिदमन सिंह की पत्नी रानी पक्षालिका सिंह संभाल रही हैं।

रानी पक्षालिका पर भाजपा ने लगाया दांव

रानी पक्षालिका पर भाजपा ने लगाया दांव

आगरा की बाह विधानसभा में सभी प्रत्याशियों के बीच रोचक मुकाबला देखने को मिल रहा है । सपा से दलबदल कर भाजपा में आए भदावर राज परिवार के पूर्व मंत्री राजा अरिदमन और रानी पक्षालिका सिंह को भाजपा ने भी हाथोंहाथ लिया । भाजपा नेतृत्व ने बाह विधानसभा से रानी पक्षालिका सिंह पर दांव लगाकर मुकाबले को और रोचक बना दिया है। बाह विधानसभा सीट पर अधिकतर भदावर परिवार की राजनीति ही हावी रही है।

सपा से चुनाव लड़ चुके हैं राजा-रानी

सपा से चुनाव लड़ चुके हैं राजा-रानी

2007 विस चुनाव में बसपा के मधुसूदन शर्मा ने भाजपा के टिकट पर लड़ रहे राजा अरिदमन को हराकर बाह सीट पर नीला झण्डा लहराया था । 2012 में राजा ने पाला बदलकर सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का फैसला किया और बसपा के मधुसूदन शर्मा को बड़े अंतर से हराया। 2012 में रानी पक्षालिका सिंह ने भी सपा की टिकट पर आगरा की खेरागढ़ सीट से भाग्य आजमाया लेकिन उन्हें बसपा के भगवान सिंह कुशवाहा के हाथों हार का सामना करना पड़ा। सपा नेतृत्व ने रानी पक्षालिका सिंह पर एक बार फिर बड़ा दांव खेला और उन्हें 2014 में आगरा की फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट से टिकट थमा दिया लेकिन भाग्य ने इस बार भी रानी पक्षालिका सिंह का साथ नहीं दिया और लोकसभा चुनाव में भी भाजपा के बाबू लाल ने रानी को हराकर फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट पर केसरिया झण्डा लहराया ।

वोट मांगने के लिए पैदल नहीं चलते

वोट मांगने के लिए पैदल नहीं चलते

एक समय था जब भदावर परिवार के सदस्य घर से प्रचार के लिए निकले बिना भी चुनाव जीत जाते थे। भदावर परिवार का रसूख आज भी बाह विधानसभा सीट पर देखने को मिलता है। समय बदला तो भदावर राज परिवार ने भी अपनी राजनीति में बदलाव किया । भदावर परिवार के सदस्य चाहें वो राजा अरिदमन सिंह या फिर रानी पक्षालिका सिंह प्रचार के लिए तो निकलते हैं लेकिन पैदल चलकर गली-मोहल्ले पहुंचकर जनता से वोट मांगने का चलन आज भी भदावर परिवार की राजनीति का हिस्सा नहीं है ।

पूरा राजघराना वोट मांगने में जुटा

पूरा राजघराना वोट मांगने में जुटा

रानी पक्षालिका सिंह क्षेत्र के विकास को अपनी प्राथमिकता बताती हैं। सासंद चौधरी बाबू लाल के विरोध के सवाल पर अपना गोलमोल जवाब देकर खुद की राजनीति में निपुणता जाहिर कर गई। भदावर परिवार की राजनीतिक विरासत संभाल रहीं रानी पक्षालिका सिंह का कहना है कि ये उनके लिए बड़ी और अहम जिम्मेदारी है। हालांकि पूरा भदावर राज परिवार रानी पक्षालिका सिंह को जिताने के लिए गाँव में घूम रहे हैं । राजा अरिदमन सिंह हो या राजकुमार त्रिपुदमन सिंह, पूरा परिवार रानी के लिए वोट मांगने में जुटा है।

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