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Jhansi: इंसानियत की मिसाल याकूब मंसूरी, 7 बच्चों को जलने से बचाया, अफसोस खुद की जुड़वां बेटियां नहीं बचा सका

Jhansi Hospital Fire brave Story: झांसी के अस्पताल में 15 नवंबर को हुए भयानक अग्निकांड में कई परिवारों ने अपने नवजात बच्चों को खो दिया। रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के NICU में रात को आग लगी और देखते ही देखते वो वार्ड बच्चों की 'कब्रगाह' बन गया। हर तरफ चीख पुकार और बेबसी थी, परिजन अपने बच्चों के लिए मारे-मारे फिर रहे थे। इस बीच एक ऐसा 'देवदूत' आया, जिसने किसी भी चीज की बैगर परवाह किए कई परिवारों की खुशियों को बचा लिया।

यहां जिस देवदूत का जिक्र हो रहा है उसका नाम याकूब मंसूरी है, जिसने अपनी दो नवजात बेटियों को अग्निकांड में खोने के बाद और लोगों के घर के 'चिराग' को रोशन किया। शुक्रवार को जब नवजात शिशु आईसीयू में आग लगी, तो याकूब मंसूरी ने 7 नवजातों को बचाने के लिए आग की लपटों का सामना किया। लेकिन अफसोस वो अपनी जुड़वां बेटियों को नहीं बचा सका।

Jhansi hospital fire

दो बच्चों के युवा पिता याकूब मंसूरी झांसी के अस्पताल के ठीक बाहर थे, जब नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में लगी आग ने उनकी बेटियों को भी अपनी चपेट में ले लिया। जैसे ही आग की लपटें फैलीं, वह वार्ड में पहुंचे और हिम्मत करके सात शिशुओं को बचाया। दुख की बात है कि उनकी बहादुरी भरी कोशिशें उनकी अपनी जुड़वां बेटियों को बचाने के लिए काफी नहीं थीं।

अस्पताल के बाहर था याकूब, फिर दौड़ा-दौड़ा पहुंचा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आग लगने के समय याकूब अस्पताल के बाहर था। वह तुरंत मदद के लिए अंदर भागा, क्योंकि आग NICU में फैल गई थी, जहां उसकी बेटियां भर्ती थीं। हालांकि तमाम कोशिशों के बाद वो अपनी बेटियों को बचाने में असमर्थ रहा।

इंडिया टुडे से बात करते हुए याकूब ने बताया, "यह एक भीषण आग थी, जिसे कोई भी नहीं बुझा सकता था। घने धुएं और तीव्र लपटों के कारण स्थिति बहुत भयावह थी, जिससे बचाव कार्य बेहद मुश्किल हो गया। वह खिड़की तोड़कर वार्ड में घुसने में कामयाब रहा।"

'जहां मेरी बेटियां भर्ती थीं, वहां...'

याकूब ने कहा, "मैं उस वार्ड में नहीं जा सका, जहां मेरी बेटियां भर्ती थीं, क्योंकि आग बहुत भयंकर थी। अन्य लोगों ने भी कोशिश की, लेकिन वे भी असफल रहे। फिर हमने अन्य वार्डों से शिशुओं को बचाना शुरू किया। मैंने सात बच्चों को बाहर निकाला।"

पीड़ितों के लिए न्याय की मांग

दुखी पिता अब अपनी बेटियों और 9 अन्य पीड़ितों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं, जो शुक्रवार रात को आग में मारे गए थे। याकूब ने कहा, "हम बस अपने बच्चों के लिए न्याय चाहते हैं। बस इतना ही।"

बता दें कि शुक्रवार रात को दस शिशुओं की मौत हो गई, जबकि रविवार को एक और शिशु ने दम तोड़ दिया। शुरुआती जांच से पता चलता है कि शॉर्ट सर्किट के कारण दुर्घटनावश आग लग गई, जो मौजूद ऑक्सीजन सिलेंडरों के कारण और भयावह हो गई।

अग्निकांड की जांच जारी

इधर,उत्तर प्रदेश सरकार ने घटना की गहन जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की है। उनका लक्ष्य यह पता लगाना है कि क्या लापरवाही की इसमें कोई भूमिका थी और उन्होंने सात दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। प्रारंभिक जांच से पता चला कि आईसीयू में अग्निशामक यंत्र चार साल पहले समाप्त हो चुके थे, जिससे अस्पताल में सुरक्षा उपायों को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।

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