Independence Day 2024: जानिए क्या महत्व है 'बावन इमली' पेड़ का? स्वतंत्रता सेनानियों से है यह गहरा नाता
Special Ground Report Bawan Imli tree Fatehpur Uttar Pradesh: देश को आजाद कराने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के बहुत सारे प्रतीक चिन्ह आज भी कई जगह मौजूद हैं, जो उनकी गाथा गा रहे हैं। इसी में एक है 'बावन इमली' पेड़ जो स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का गवाह रहा है। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के बिंदकी तहसील के खजुआ कस्बे में स्थित यह शहीद स्थल ऐतिहासिक रूप से काफी समृद्ध है। वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने इस शहीद स्थल का इतिहास और महत्त्व दोनों जाना। आइए जानते हैं इस स्थल का देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से क्या खास नाता है -
फतेहपुर के बिंदकी रेंज में है था शहीद स्थल
बावन इमली का पेड़ शहीद स्थल फतेहपुर से 35 किमी की दूरी पर स्थित खजुआ कस्बे में वन रेंज बिंदकी में स्थित है। घने जंगल से आच्छादित है।

स्वतंत्रता संग्राम का साक्षी ' बावन इमली ' दरअसल, यह इमली का पेड़ देश के स्वतंत्रता संग्राम का साक्षी रहा है। देशभक्तों के बलिदान का प्रतीक रहा है। बात, 1857 की है जब पूरे देश में अंग्रजों की बर्बरता हो रही थी। देशभक्तों को मारा जा रहा था। यही हाल यूपी के फतेहपुर जिले का भी था। यहां अंग्रेजों ने लोगों का जीना हराम कर रखा था। इससे परेशान कुछ लोगों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ कमर कस ली और यह संकल्प लिया कि अंग्रेजों को देश से हर हाल में भागना है चाहे इसके लिए प्राणों का बलिदान ही क्यों न देना पड़े।

क्यों पड़ा इसका नाम ' बावन इमली '
बावन इमली का अपना अलग ही इतिहास और महत्व है। यूं ही नहीं इसका नाम बावन इमली पड़ा। इसके पीछे एक लंबी कहानी है। फतेहपुर के खजुआ ब्लॉक में स्थित यह पेड़ स्वतंत्रता सेनानियो के बलिदान की गाथा आज भी गा रहा है। बात 1857 की है, जब इसी ब्लॉक के रसूलपुर गांव के रहने वाले जोधा सिंह अटैया ने अंग्रेजी सेना की नीद उड़ा रखी थी। क्षेत्र के लोगों को एकत्रित कर उनमें देश भक्ति की भावना भी जगा रहे थे। उनके नेतृत में अंग्रेजों के खिलाफ कई बड़े कारनामों को अंजाम दिया गया। परेशान परेशान अंग्रेजों ने उन्हें जान से मारने की योजना बनाई। 28 अप्रैल,1858 को जोधा सिंह अटैया अपने 51 साथियों के साथ लौट रहे थे। मुखबिर ने इसकी सूचना अंग्रजों को दे दी। अंग्रेजों ने चारो तरफ से घेरकर धोखे से इन 52 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद अंग्रेजों ने यहां स्थित इमली के पेड़ पर इन सभी देश भक्तों को फांसी की सजा दे दी। तभी से इसे बावन इमली शहीद स्थल के नाम से जाना जाता है।
बना है स्मारक
इस बावन इमली पेड़ को पूरी तरह शहीद स्थल के रूप में विकसित किया गया है। पेड़ के चारों तरफ गोलाई में दीवार बनी है। वृक्ष के पास नीचे स्मारक भी बना हुआ है जिस पर फूल मालाओं से शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी गई है।
शहीदों की याद में है लंबा स्तंभ
इसी जगह कई मीटर ऊंचा स्तभ बना है जिस पर इन वीरों को गाथा लिखी है।
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सभी शहीदों का है नाम
इस इमली के पेड़ के विपरीत दिशा में तीन स्तंभ भी बने हैं जिस पर सभी 52 शहीदों के नाम व पते अंकित हैं।

जोधा सिंह अटैया की है भव्य मूर्ति
इस स्थल पर देश भक्त जोधा सिंह अटैया की भव्य मूर्ति लगी है। इसके साथ ही उनके बारे में विस्तृत जानकारी भी दी गई है।

गनर हवलदार रमेश चंद की भी लगी है प्रतिमा
इसके साथ ही स्वतंत्रता सेनानियों का साथ निभाने वाले हवलदार रमेश चंद की भी प्रतिमा यहां लगी हुई है।












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