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Independence Day 2024: जब फतेहपुर के जोधा सिंह अटैया ने अंग्रेजों के नाक में कर दिया था दम,साजिश के हुए शिकार

Special Ground Report Fatehpur Uttar Pradesh: जोधा सिंह अटैया का नाम उन शूरवीर देशभक्तों में शामिल है जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाई। उन्होंने अंग्रेजों के नाक में इस कदर दम कर रखा था कि वे उनकी जान के प्यासे बन बैठे थे। अंततः अंग्रजों ने भारत मां के वीर सपूत को धोखे से गिरफ्तार कर लिया और उन्हें उनके 51 साथियों के साथ इमली के पेड़ पर फांसी दे दी। वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने फतेहपुर जिले के खजुआ कस्बे के बिंदकी रेंज में स्थित इस बावन इमली स्थल का गौरवशाली इतिहास जाना। पेश है एक रिपोर्ट -

जोधा सिंह अटैया
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के खजुआ ब्लॉक के रसूलपुर गांव में इस देशभक्त का जन्म होता है। बचपन से ही इनमें देश को आजाद कराने का जज्बा था। उम्र बढ़ने के साथ इरादे और मजबूत होते गए।

jodha singh ataiya

नेतृत्व करने की क्षमता
जोधा सिंह का प्रभावशाली व्यक्तित्व था। लंबा ऊंचा कद, सिर पर पगड़ी और कमर में लटकती तलवार देख ही दुश्मन के होश उड़ जाते है। इसके साथ ही आमजन के प्रति उनका रवैया बिल्कुल सरल और सहज था। उनमें नेतृत्व करने की अद्भुत क्षमता है।

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    जब फतेहपुर के जोधा सिंह अटैया ने अंग्रेजों के नाक में कर दिया था दम,साजिश के हुए शिकार

    देश के लिए समर्पित था जीवन

    जोधा अंग्रेजों की गुलामी किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करना चाहते थे। वह इन्हे देश से जल्द से जल्द भगा देना चाहते थे। इसी को उन्होंने अपना जीवन बना लिया और देश के लिए समर्पित हो गए।

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    स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े

    अपने देशभक्ति के जज्बे के साथ जोधा 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। अंग्रेजों को देश से भागने का संकल्प लिया और अंग्रेजों के खिलाफ मुहिम छेड़ दी।

    क्षेत्र के लोगों को किया संगठित
    जोधा ने इस क्षेत्र के लोगों में आजादी का जज्बा जगाया और उन्हें स्वतंत्रता संग्राम के लिए प्रेरित किया। इनके साथ भारी संख्या में लोग आते गए।

    अंग्रेजों के नाक में ऐसे किया दम
    जोधा सिंह ने कई ऐसे काम किए जिसने अंग्रेज़ो की नीद उड़ा दी। उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर कई बार अंग्रेजों पर धावा बोला और उन्हें मार डाला। कई बार पुलिस चौकी पर भी हमला बोला और अंग्रेजों को धूल चटाई। अपने 51 साथियों के साथ मिलकर उन्होंने जहानाबाद तहसील को घेर लिया और कई पुलिसकर्मियों को मार गिराया। इसके साथ ही उन्होंने तहसीलदार को अपने चंगुल में ले लिया और सभी किसानों की लगन माफ कराई।
    पहली बार गोरिल्ला युद्ध की शुरुआत की जोधा सिंह ने गोरिल्ला युद्ध की शुरुआत की थी और अंग्रेजों के नाक में दम कर दिया।

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