बंगाल में ममता बनर्जी के 'चमत्कार' का यूपी में अखिलेश को कितना मिलेगा फायदा ?

लखनऊ, 9 फरवरी: उत्तर प्रदेश में सियासी पारा पूरे चरम पर है। गुरुवार को पश्चिमी यूपी में पहले चरण का मतदान होना है। सभी दल अपने अपने पक्ष में माहौल होने का दावा कर रहे हैं। एक तरफ जहां बीजेपी के स्टार प्रचारक नरेंद्र मोदी से लेकर अमित शाह तक पश्चिमी यूपी को मथ रहे हैं वहीं दूसरी ओर बीजेपी के मुकाबले के लिए खुद को साबित करने में जुटे अखिलेश यादव भी जीतने के लिए हर जतन कर रहे हैं। अखिलेश के समर्थन में लखनऊ पहुंची पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी और मोदी पर जिस तरह से जोरदार हमला बोला वो आने वाले चरणों में और तेज होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि बंगाल में बीजेपी को हराने का चमत्कार दिखा चुकीं ममता यूपी में अखिलेश को कितना फायदा पहुंचा पाएंगी यह देखना काफी दिलचस्प होगा।

बंगाल में खेला होबे की तर्ज पर यूपी में खदेड़ा होबे का नारा

बंगाल में खेला होबे की तर्ज पर यूपी में खदेड़ा होबे का नारा

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो जिस तरीके से ममता ने पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा को मात दी थी, अब अखिलेश ममता के साथ मिलकर यूपी में भी ममता के उसी मॉडल पर भाजपा को हराने की तैयारी कर रहें है। ममता ने जिस तरह बंगाल में खेला होबे का नारा दिया था, अखिलेश ने भी राजभर के साथ मिलकर 'यूपी में खदेड़ा होगा' का नारा दिया है। इस नारे का कितना असर पड़ेगा यह तो समय ही बताएगा।

बंगाल चुनाव में अखिलेश ने दिया था ममता को समर्थन

बंगाल चुनाव में अखिलेश ने दिया था ममता को समर्थन

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को अपना समर्थन दिया था। यूपी में ममता का कोई जनाधार नहीं है, लेकिन जिस तरीके से भाजपा के तमाम बड़े चेहरे यूपी में लगातार रैली कर माहौल बना रहे हैं उसको देखते हुए अखिलेश भी विपक्ष के बड़े चेहरों के साथ मिलकर जवाब देना चाहते हैं। पश्चिम बंगाल में ममता ने खेला होबे का नारा देकर पूरा चुनावी माहौल बदल दिया था। यूपी में अखिलेश ने 27 अक्टूबर को ओमप्रकाश राजभर के साथ मंच पर खड़े होकर 'यूपी में खदेड़ा होगा' का नारा दे चुके हैं।

बंगाल में ममता ने बीजेपी को हराने का चमत्मकार कर दिखाया

बंगाल में ममता ने बीजेपी को हराने का चमत्मकार कर दिखाया

पश्चिम बंगाल में ममता एक चट्टान की तरह डटी रहीं। पूरा चुनाव भाजपा बनाम टीएमसी हो गया थी। ठीक उसी तरह यूपी में अखिलेश ने भी चुनाव को भाजपा बनाम सपा कर दिया है। बंगाल में ममता ने बंगाली अस्मिता का सवाल उठाया। 'बंगाल की बेटी बनाम बाहरी' का नारा दिया था उसी तरह सपा यूपी में पीएम मोदी- अमित शाह को बाहरी बताती रही है। अपने चुनाव प्रचार के दौरान अखिलेश भी बाहरी मुद्दे को हमेशा उठाते देखे जाते हैं।

ममता के नक्शे कदम पर चलने की कोशिश में अखिलेश

ममता के नक्शे कदम पर चलने की कोशिश में अखिलेश

जिस तरह ममता बनर्जी ने अपने गढ़ को बचाने की कोशिश करते हुए नंदीग्राम से चुनावी मैदान में उतरीं उसी तरह अखिलेश ने भी यादव लैंड मजबूत करने के लिए चाचा शिवपाल को साथ ले लिया है। साथ ही पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के किले को मजबूत करने के लिए दूसरे दलों से समझौता भी किया है। पश्चिम बंगाल के चुनाव में ममता के तमाम वजीर भाजपा में शामिल हो गए थे। ममता ने जिस तरह से अकेले चुनाव को संभाला, बड़े फैसले खुद लिए उसी तरह यूपी चुनाव में अखिलेश भी अब पार्टी की पूरी बागडोर अपने हाथ में रखे है। टिकट से लेकर प्रचार तक की कमान खुद संभाल रहे हैं।

ममता बनर्जी के साथ से अखिलेश को मिलेगी ताकत

ममता बनर्जी के साथ से अखिलेश को मिलेगी ताकत

यूपी में टीएमसी का कोई खास जनाधार नही है। सूबे के 75 जिलों में संगठन तक नहीं है। ऐसे में ममता बनर्जी अखिलेश यादव को कैसे फायदा पहुंचा पाएंगी? ममता बनर्जी पहले ही कह चुकी हैं कि TMC यूपी में चुनाव नहीं लड़ेगी। टीएमसी का यूपी में जनाधार भी नहीं है, लेकिन ममता का समर्थन अखिलेश की ताकत और बढ़ाएगा। यूपी में बीजेपी और समाजवादी पार्टी में मुख्य मुकाबला देखा जा रहा है। जहां एक तरफ बीजेपी की ओर से पीएम मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ समेत कई बड़े नेता प्रचार कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर अखिलेश यादव का गठबंधन भी अपनी पूरी ताकत झोंके हुए है। ऐसे में ममता बनर्जी का साथ अखिलेश की ताकत को बढ़ाने का काम करेगा। खासतौर से तब जब ममता सीधेतौर पर पीएम मोदी के खिलाफ हमेशा मुखर रहीं हैं।

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