हाईकोर्ट ने पूछा 62 हजार वेतन पाने वाला कैसे बना सकता है 500 करोड़ की संपत्ति?

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इलाहाबाद। चंदौली के अरबपति एआरटीओ आरएस यादव की जमानत याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने आरएस यादव की याचिका पर सुनवाई के दौरान गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि 62 हजार वेतन पाने वाला एक छोटा सा अधिकारी 500 करोड़ की नामी बेनामी संपत्ति कैसे बना सकता है? मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज करने के बाद अपने आदेश की प्रति मुख्य सचिव और डीजीपी को भी भेजी है और दोनों ही अधिकारियों से इस मामले की पुनर्विवेचना के लिए कहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ किया कि एआरटीओ आरएस यादव के मामले में विवेचना सिर्फ खानापूर्ति के तौर पर की गई है।

अरबों की कमाई पर बैठेगी जांच

अरबों की कमाई पर बैठेगी जांच

ऐसे में अगर यादव को अगर जमानत मिलती है तो वो केस को पूरी तरह से प्रभावित करेगा। हाईकोर्ट ने इस बात की भी चिंता व्यक्त की है कि अभी तक के मामले में एआरटीओ की अकूत कमाई की विवेचना को मुकदमें में फाइल नहीं किया गया है। जबकि एआरटीओ की अकूत कमाई की भी जांच होनी चाहिए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब आरएस यादव की अरबों की संपत्ति की जांच होगी और इसके लिए अलग से जांच टीम बनाई जाएगी। मामले पर सुनवाई न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने की है।

क्या है मामला?

क्या है मामला?

यूपी के चंदौली जिले में परिवहन विभाग में प्रतिनियुक्ति पर राधेश्याम यादव की तैनाती हुई थी और आरटीओ इंचार्ज बनने के बाद इन्होंने भ्रष्टाचार की नई परिभाषा लिखते हुए अकूत संपत्ति बटोर डाली। घरेलू नौकर से लेकर बेटा-बेटी ड्राइवर हर किसी के नाम बेनामी संपत्तियां खरीदी, कई शहरों में बिल्डिंग, जमीनें, दर्जनभर वॉल्वो बस, शॉपिंग मॉल, होटल, फ्लैट और जाने क्या-क्या अपनी नामी बेनामी संपत्ति में अर्जित कर लिया। भ्रष्टाचार के आरोप में 12 जून 2017 को गिरफ्तार कर आरटीओ आरएस यादव जेल भेजे गए।

हार्ईकोर्ट ने बढ़ा दी आरएस यादव की मुश्किल

हार्ईकोर्ट ने बढ़ा दी आरएस यादव की मुश्किल

तब इन पर ड्राइवर को धमकाकर घूस लेने का आरोप था और उसी मामले में अब जमानत के लिए वो हाईकोर्ट की शरण में गए थे, लेकिन हाईकोर्ट ने आरएस यादव की मुश्किलें और बढ़ा दी है। अब हाईकोर्ट ने आरएस यादव की नामी बेनामी संपत्तियों की जांच का भी आदेश दे दिया है। ऐसे में आरएस यादव के भ्रष्टाचार की जन्मकुंडली जल्द ही सामने आ जाएगी।

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English summary
High Court reject plea of millionaire RS Yadav
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