बुंदेलखंड में 5 व 10 रु में भोजन क्यों नहीं? हाईकोर्ट ने मांगा योगी सरकार से जवाब
इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार की 5 और 10 रुपए में सस्ते भोजन की सुविधा पर तीखी टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने लखनऊ में चलाई जा रही योजनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा है कि लखनऊ में सरकार किस कानूनी प्रावधान या किस योजना से पांच और 10 रुपए में गरीबों को भरपेट भोजन दे रही है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि बुंदेलखंड सूखाग्रस्त है और गरीब वहां परेशान है तो वहां ऐसी सुविधा क्यों नहीं दी जा सकती? हाईकोर्ट ने मामले में योगी सरकार से 12 मार्च तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। बता दें कि इस बाबत हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है, जिसमें लखनऊ में दिए जा रहे 5 व 10 रुपए में भोजन पर सवाल उठाते हुए बुंदेलखंड में सुविधा को शुरू करने की मांग की गई है। इस मामले पर जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस शशिकांत की डबल बेंच ने सुनवाई करते हुये सरकार से इस योजना के बारे में जवाब मांगा है।

मुख्य सचिव होंगे तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुंदेलखंड के गरीबों को 5 और 10 रुपए में भरपेट भोजन उपलब्ध कराने की योजना पर सरकार की ओर से हलफनामा मांगा है और 12 मार्च तक हलफनामा दाखिल ना होने पर मुख्य सचिव हाईकोर्ट में तलब होंगे। दरअसल मुख्य सचिव ने एक हलफनामा तो दिया है, जिसमें कानूनी उपबंधों का हवाला देकर कोर्ट को कुछ जानकारी दी गई है, लेकिन भोजन योजना पर वह कोई जानकारी नहीं दे सके हैं । मुख्य सचिव के अनुसार कानून के मुताबिक सरकार गरीबी रेखा से नीचे के लोगों की सहायता योजनाओं पर अमल कर रही है।

सब्सिडी क्यों है?
हाईकोर्ट ने सरकार के गरीबी रेखा से नीचे के लोगों की सहायता वाले हलफनामे पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि सरकार मुफ्त अनाज सहित अन्य योजनाओं में सब्सिडी बंद कर क्यों नहीं कर देती? एक बड़े पैमाने पर तमाम तरह की सब्सिडी सरकार दे रही है, क्यों नहीं इस सब्सिडी का इस्तेमाल सीधे भोजन उपलब्ध कराने के लिये हो ? हाईकोर्ट ने साफ लहजे में कहा कि सरकार को गरीबों के सस्ते दर पर भोजन योजना लागू करनी चाहिए ।

बुंदेलखंड को मिलेगी राहत
गौरतलब है कि बुंदेलखंड का इलाका लगातार सूखे से जूझ रहा है । वहां खेती किसानी की समस्या अपने चरम पर है और गरीबी, विकास की उपेक्षा से बढ़ रही है । ऐसे में सरकार ने बुंदेलखंड में भी सस्ता भोजन योजना कराने की बात कही थी और 5 और ₹10 में भरपेट भोजन उपलब्ध कराने की तैयारी भी हुई, लेकिन यह योजना लखनऊ में तो चलाई जा रही है, परन्तु जहां सबसे अधिक आवश्यकता है वहां इसका क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। इसे लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है और सरकार को अपना रुख साफ करने का निर्देश दिया है।












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