हाथरस घटना के जिम्मेदार "भोले बाबा" की फोटो सीने से लगाए अभी भी महिलाएं मान रही उन्हें अपने "मन का पति"
Hathras Stampede: आस्था और विश्वास के आगे सारी दलीलें निरर्थक हैं। यूपी के हाथरस में "भोले बाबा" के सत्संग में मची भगदड़ जिसमें 121 लोगों की मौत हो गई, उसी नारायण साकार हरि उर्फ 'भोले बाबा' के प्रति उनके भक्तों की अंधभक्ति कुछ ऐसी ही कहानी बयां कर रही है।
जिन नारायण साकार हरि उर्फ 'भोले बाबा' के चरणों की धूल लेना 121 जिंदगियों के लिए काल बन गया उन्हीं भोले बाबा के प्रति आज भी महिला भक्तों की भक्ति जस की तस बरकरार है।

हादसे के बाद आज भी अंधभक्त महिलाएं स्वयंभू भगवान "भोले बाबा" की तस्वीर सीने से लगाए उन्हें अपने मन का पति माने बैठीं हुईं हैं और उन्हें अपना सबकुछ बता रही हैं।
नारायण साकार हरि की अंधभक्त महिलाएं
जबकि इंसानों के द्वारा बनाए गए इस स्वयंभू भगवान के चरणों की धूल पाने की होड़ ने 121 की जान ले ली इन मरने वालों में अधिकांश महिलाएं थीं। जिसकी मौत के बाद उनके छोटे-छोटे बच्चे और घर वाले सिसक-सिसक रहे हैं लेकिन हादसे के बाद गूंजती चीखे और सिसकियां भी बाबा के इन महिला अंधभक्तों की आस्था को डिगा नहीं पाई हैं।
बाबा की फोटो सीने से लगाए घूम रही महिलाएं
हाथरस जहां तीन दिन पहले ये भगदड़ मची, जहां आज भी हाथों की टूटी हुई चूडि़यां, पैरों की चप्पल और खून के धब्बे नजर आ रहे हें वहां से बाबा तो फरार हैं लेकिन कुछ दूर पर अन्य जिलों से सत्संग में आई साधारण सी दिखने वाली भोली-भाली अंधभक्त महिलाएं गले में बाबा का लॉकेट, आश्रम का आईडी कार्ड और सीने से भोले बाबा की फोटो लगाए उन्हें अपना सबकुछ बता रही हैं।
हादसे के बाद भी टिकी हैं दूर-दराज से आईं महिलाएं
इस हादसे बाद उसी घटना स्थल पर बाबा को अपनी आत्मा का पति बताकर उनके चमत्कारों को गुणगान कर रही हैं। आज तक को दिए इंटरव्यू में ऐसी महिलाएं नजर आईं जो अन्य जिलों से अपने सूरज पाल उर्फ नारायण साकार हरि, उर्फ भोले बाबा के दर्शन करने आई हैं। वो अभी भी अपना घर बार छोड़कर यहां टिकी हुई हैं।
नारायण साकार हरि को महिलाएं क्यों मानती है "मन का पति"
इन्हीं में ग्वालियर से "सत्य का साथ" सत्संग में हिस्सा लेने आई सपना ओझा भी हैं। जिन्होंने बताया नारायण साकार हरि को अपने मन यानी आत्मा का पति मानती हैं। वो ही उनके लिए सबकुछ हैं। सपना बताती हैं वो भोले बाबा से कभी मिली नहीं हैं लेकिन वो उनके आत्मा के पति हैं। वो मेरे प्राण नाथ हैं। मेरे नारायण साकार हरि का नाम लेते ही मेरी सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं। जब भी मैं मन से उन्हें याद करती हूं तो वो मुझे साक्षात दर्शन देते हैं।
"नारायण साकार हरि" जब मन के पति तो असली पति क्या हैं?
सपना ने ये भी बताया कि इससे पहले नारायण साकार हरि के प्रवचन में हिस्सा लेने आगरा समेत अन्य कई शहरों में जा चुकी हैं। सत्संग में जाने का खर्चा क्या बाबा देते हैं? इस सवाल के जवाब में सपना बड़ी मासूमियत से बोलीं नहीं वो तो मेरे तन के पति देते हैं। तन का पति यानी मेरे पति संजय ओझा।
"नारायण साकार हरि" ये मेरे नहीं सारे जग के पति हैं
वहीं बाबा के सत्संग में प्रयागराज से आई दूसरी महिला जो हाथ में नारायण साकार हरि की बड़ी फोटो सीने से लगाए बैठीं थीं उन्होंने दिखाते हुए कहा "लेओ कर लेओ हमरे बाबा के दर्शन।" बाबा की भक्त ये कहते हुए बोली ये मेरे नहीं सारे जग के पति की फोटो हैं। जिन परामात्मा का नूर हम सबमें है।
"मैं मर गई थी लेकिन मेरे मन के पति ने जिंदा कर दिया"
महिला ने बताया हमें खुद जीवन दान मिला है देखो मैं ये बैठी हूं। भूत प्रेत की वजह से हमारी मृत्यु हो गई थी। मेरे तन ने मुझे जमीन पर लिटा दिया तो नारायण सकार हरि की ब्रम्ह्यवाणी सुनाई दी कि "अगर मेरे सच्चे सेवाकार को कुछ हो जाएगा तो हमने आप को खत्म कर लेगें।" महिला ने बताया ऐसी आकाशवाणी सुनते ही मेरे प्राण वापस आ गए।"
तो फिर क्यों हाथरस सत्संग में चली गई 121 लाेगों की जान?
इसके साथ ही महिला ने दावा किया कि आप भी श्रद्धा भाव से नाम लीजिए नारायण साकार हरि आपको साक्षात दर्शन देंगे और आपकी समस्या हल करेंगे। तो भगदड़ में अपने भक्तों की जान क्यों बाबा नहीं बचा पाए? इस सवाल के जवाब में महिला बोलीं जो लोग मारे गए सबका अंत समय आ गया था लेकिन लाखों की भीड़ में लोग जिंदा बाबा की कृपा से बचे भी तो।












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