'हम ऐसे किसी फैसले को नहीं मानते, हाई कोर्ट में देंगे चुनौती..', ज्ञानवापी पर मुस्लिम पक्ष के वकील ने क्या कहा
Gyanvapi case: वाराणसी की एक अदालत ने 31 जनवरी 2024 को फैसला सुनाते हुए हिंदू पक्ष को ज्ञानवापी के दक्षिणी हिस्से के तहखाने में पूजा करने का अधिकार दे दिया है। कोर्ट ने जिला प्रशासन को अगले सात दिनों में जरूरी इंतजाम करने को कहा है
इस पर मुस्लिम पक्ष के वकील अखलाक अहमद ने कहा कि वे इस फैसले को चुनौती देने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

अखलाक अहमद ने कहा, ''हम फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट जाएंगे। आदेश में 2022 की एडवोकेट कमिश्नर रिपोर्ट, एएसआई की रिपोर्ट और 1937 के फैसले को नजर अंदाज किया गया है, जो हमारे पक्ष में था। हिंदू पक्ष ने कोई सबूत नहीं रखा है कि 1993 से पहले वहां पूजा होती थीं। उस स्थान पर ऐसी कोई मूर्ति नहीं है।"
वहीं अधिवक्ता मेराजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि वह इस आदेश को लेकर ऊपरी अदालतों में जायेंगे। मेराजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा, "हम फैसले से बहुत नाखुश हैं।"
मेराजुद्दीन सिद्दीकी बोले, "मैं ऐसे किसी भी आदेश को स्वीकार नहीं करूंगा। जिलाधिकारी और जिला अध्यक्ष दोनों मिलकर काम कर रहे हैं। हम कानूनी तौर पर इससे लड़ेंगे। यह राजनीतिक लाभ लेने के लिए हो रहा है। वही रवैया अपनाया जा रहा है, जो बाबरी मस्जिद मामले में किया गया था। कमिश्नर की रिपोर्ट और एएसआई की रिपोर्ट में पहले कहा गया था कि अंदर कुछ भी नहीं था।''
हिंदू पक्ष के वकील का क्या कहना है?
हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा, "सात दिनों के भीतर पूजा शुरू हो जाएगी। सभी को पूजा करने का अधिकार होगा।"
विष्णु जैन ने कहा, "हिंदू पक्ष को 'व्यास का तेखाना' में प्रार्थना करने की अनुमति है। जिला प्रशासन को 7 दिनों के भीतर व्यवस्था करनी होगी।" बता दें कि मस्जिद के तहखाने में चार 'तहखाने' (तहखाने) हैं, जिनमें से एक अभी भी व्यास परिवार के कब्जे में है, जो वहां रहते थे।












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