BJP के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी बोले- राजनीतिक आंकड़ों के माहिर थे, कल्याण सिंह जैसा कोई नहीं

लखनऊ, 23 अगस्त: उत्तर प्रदेश के पूव मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का अवसान हो गया है। आज अलीगढ़ जिले के नरौरा घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस बीच उनके साथ संगठन में काम करने वाले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने भी अलीगढ़ में कल्याण सिंह के घर जाकर उनको श्रद्धांजलि अर्पित की। वाजपेयी ने कहा कि कल्याण सिंह अपराधियों के लिए निर्मोही थे। वो कहा करते थे कि अपराधियों की कोई जाति नहीं होती। वहीं संगठन के लिए वो चलते फिरते इनसाइक्लोपडिया थे। हर जिले एवं विधानसभा के जातिगत एवं सामाजिक आंकड़े उनकी उंगलियों पर होते थे।

कल्याण सिंह

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजेपेयी ने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ बिताए गए पल के अनुभव वन इंडिया डॉट काम के साथ साझा किए। उन्होंने एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान कल्याण सिंह के कुछ अनछुए पहलुओं और अपने अनुभव के बारे में बातचीत की प्रस्तुत है उनके साथ बातचीत के प्रमुख अंश।

सवाल- आपकी कल्याण सिंह से पहली मुलाकात कब हुई

जवाब- पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से पहली मुलाकात सन 1981-82 में हुई थी। तब उस समय मेरठ में सांप्रदायिक परिस्थितियां थीं, उस पर लेकर चर्चा हुई थी। उसके बाद मैं महामंत्री बना और फिर महानगर का महामंत्री बना। उसके बाद आना जाना और उनसे मिलना जुलना लगातार बना रहा।

लक्ष्मीकांत वाजपेयी

सवाल- राम मंदिर आंदोलन के समय कल्याण सिंह ने आपको क्या जिम्मदेारी दी थी
जवाब- निश्चित तोर पर मंदिर आंदोलन के समय उनके साथ सम्पर्क में था। मंदिर आंदोलन की एक घटना बताता हूं आपको। उन्होंने मुझे निर्देश दिया था कि तुम्हें कारसेवा में शामिल होने अयोध्या नहीं जाना है। तुम मेरठ में ही रहकर वहां परिस्थितियों पर नजर रखोगे और वहां की पल-पल की अपडेट हमें दोगे। किसी भी तरह से वहां का माहौल बिगड़न नहीं चाहिए और दंगा नहीं होना चाहिए। फिर मैं 6 दिसम्बर को पूरे दिन ही शहर में अधिकारियों के साथ इधर उधर भागता रहा। तब बृजलाल मेरठ के एसएसपी थे और जयशंकर मिश्र यहां के डीएम थे। उनके साथ बैठकर पूरी कार्ययोजना बनाई गई थी। शहर और मिश्रित आबादी पर ध्यान दिया गया। न तो हिन्दु को न तो मुसलमान को। किसी को उन्मादी बनने की छूट नहीं थी। आपको ध्यान होगा कि मेरठ में किसी तरह का दंगा नहीं हुआ।

सवाल- कल्याण सिंह की सरकार थी तब आप संगठन में थे या सरकार में ?

जवाब- जब कल्याण सिंह की सरकार थी तब मैं चुनाव हार गया था। चुनाव हारने के बाद मैं लखनऊ जनता दरबार में मिलने गया था। उनकी कोठी में सबसे आखिर में मैं बैठा था। सबसे मिलते हुए जब मेरे पास पहुंचे तो अचानक चौंक गए। उन्होंने कहा कि तुम यहां क्यों आए, ये क्या किया तुमने। मैंने कहा कि मैं किस हैसियत से आपके कार्यालय में आता। विधायकों के मिलने के समय तो मैं आ नहीं सकता था। उस दिन उन्होंने अनुमति दी थी कि जो समय विधायकों के मिलने का है उसी में तुम आ जाया करो। फिर मैं अधिकार पूर्वक उनसे मिलने जाता था।

कल्याण सिंह

सवाल- कल्याण सिंह की छवि एक कुशल प्रशासक की रही। उनके कुछ फैसले आज भी याद किए जाते हैं। इसको लेकर क्या कहेंगे ?

जवाब- कल्याण सिंह पार्टी के चलते फिरते इनसाइक्लोपीडिया, कुशल प्रशासक, दृढ़ इच्छाशक्ति, स्पष्टवादी और कथनी करनी में अंतर नहीं। ऐसे नेता थे वो। अपराधियों के प्रति निर्मोही। वो कहा करते थे कि उनकी कोई जात नहीं, कोई धर्म नहीं, कोई पंथ नहीं। प्रत्येक जनपद और विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक और सामाजिक आंकड़े उनकी उंगलियाों पर पर रहते थे। विकास का विजन और उसकी पूर्ति की इच्छाशक्ति उनके अंदर थी। कल्याण सिंह के प्रदेश अध्यक्ष बनने से पहले भाजपा शहरी पार्टी और व्यापारियों की पार्टी मानी जाती थी। उसको गांव, गरीब और किसान तक पहुंचाने वाले नेता थे कल्याण सिंह। भाजपा को सर्वग्राही बनाने वाले नेता थे। बीजेपी में वन बूथ 20 यूथ का मंत्र उन्होंने ही दिया था। बूथ जीता तो चुनाव जीता इसका मंत्र भी उन्होंने ही पार्टी को दिया था। गुजरात से एक कान्सेप्ट आया था पन्ना प्रमुख का। इसका अध्ययन कर उन्होंने तत्काल उसे लागू करने का निर्देश दिया था।

सवाल- पन्ना प्रमुख वाली बात कब की थी, क्योंकि पन्ना प्रमुख वाला विषय तो आपके प्रदेश अध्यक्ष रहते यूपी में चर्चा में आया था

जवाब- यह कांसेप्ट पहले ही आया था। उस समय तक हम लोग बूथ मैनेजमेंट को लेकर उतने कारगर नहीं थे। लेकिन जब कल्याण सिंह ने वन बूथ 20 यूथ के कांस्पेट को लागू कराने का काम किया तो इसका फायदा मिला। सत्ता को ठुकरा कर वो अमर हो गए। राम मंदिर के लिए उन्होंने सत्ता को ठुकरा दिया था। पार्टी में जब उनकी दोबारा वापसी हुई उस समय मैं ही प्रदेश अध्यक्ष था। लखनऊ के झूलेलाल पार्क में बोलते हुए वो भावुक हो गए थे। उन्होंने कहा था कि मैं अब पार्टी छोड़कर कभी नहीं जाउंगा। मेरी अंतिम इच्छा है कि जब मैं जाउं तो मेरा शव पार्टी के झंडे में लिपटा हो। उनकी यह इच्छा भी पार्टी ने पूरी कर दी है।

kalyan

सवाल- जब कल्याण सिंह प्रदेश अध्यक्ष थे तो आपके पास क्या जिम्मेदारी थी ?

जवाब- जिले में महामंत्री था। बाद में स्थानीय निकाय प्रकोष्ठ में जिम्मेदारी मिली थी। फिर विधानसभाओं का परिसिमन हुआ थ तब अपने नेृतत्व में लखनऊ में बैठकर पूरी ब्योरा तैयार करवाया था। दो मॉल एवेन्यू में हमारे साथ काफी देर तक बैठेकर परिसिमन पर बातचीत करते रहे। वो मेरे राजनीतिक गुरू थे और पार्टी छोड़ने के बाद भी बने रहे। उसके बाद कई ऐसे मौके आए जब उनके साथ बैठने का मौका मिला। देर रात अलीगढ़ उनको श्रद्धांजलि देने के लिए गया था। वहां सीएम से भी मुलाकात हुई और उसके बाद मैं चला आया।

सवाल- वर्तमान में आपको एमएलसी बनाने और मंत्रिमंडल में शामिल करने की अटकलें चल रही हैं, इस पर क्या कहेंगे
जवाब- यह राष्ट्रीय संगठन का का विषय है। उसको क्या करना है। इसपर कुछ भी बोलना सही नहीं होगा। संगठन को जो उचित लगेगा वह करेगा। जो भी अटकलें चल रही हैं उन पर ध्यान मत दीजीए।

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