मेरठ: चुनाव आते ही बढ़ जाती है अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त, जानिए कौन है इस गोरखधंधे के पीछे ?
अवैध हथियार बेचने वाले एक तस्कर ने Oneindia से बात की और इस गोरखधंधे में पुलिस और नेता के खेल को उजागर कर दिया। तस्कर की माने तो नेता ही पैसे खर्च कर चुनाव के लिए एडवांस में हथियार मंगा रहे हैं।
मेरठ। चुनाव आते ही हथियारों के तस्कर भी सक्रिय हो गए हैं। पुलिस कार्यवाही करने के भले ही लाख दावे क्यों न करे लेकिन हकीकत कुछ और ही है। उत्तर प्रदेश और पंजाब में विधानसभा चुनाव के दौरान गड़बड़ी फैलाने के लिए अवैध हथियार की खरीद फरोख्त जारी है। मेरठ का राधना इलाका अवैध हथियारों के लिए जाना जाता है। तो गन्ने के खेत में हथियारों का जो जखीरा सामने आया है वो इस धंधे की पोल खोलने के लिए काफी है।

अवैध हथियारों के गोरखधंधे से चुनाव का सीधा कनेक्शन
दरअसल यूपी में पहला चरण 11 फरवरी को होना है वहीं पंजाब में 4 फरवरी को मतदान है। उत्तर प्रदेश के अतिसंवेदनशील जिलों में मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत भी शामिल हैं। ऐसे में पुलिस-प्रशासन के सामने शांति पूर्ण चुनाव कराने की कठिन जिम्मेदारी है। जिसके लिए हर बार की तरह ही पुलिस ने लाइसेंसी हथियारों को जमा कराने के आदेश दिए हैं।

अवैध हथियारों का गढ़ मेरठ का गांव राधना
मेरठ के किठौर थाना इलाके का गांव राधना जो अवैध हथियारों का गढ़ माना जाता है। यहां अवैध हथियार बनाने-बेचने का काम भारी तादाद में किया जाता है। हमारे पास अवैध हथियार बेचने वाला एक तस्कर लाइव आया जिसने इस खतरनाक गोरखधंधे में पुलिस और नेता के खेल को उजागर कर दिया। तस्कर की माने तो पुलिस का इस काम से कोई मतलब नहीं है। नेता ही पैसे खर्च कर चुनाव के लिए एडवांस में हथियार मंगा रहे हैं। पिछले दिनों हुई धर-पकड़ के बाद तस्करों की चांदी हो गई। जो हथियार 10 हजार में बिक रहा था वो अब 15 हजार में बिक रहा है।

नेताओं को चुनाव में क्यों पड़ती है इन हथियारों की जरूरत ?
यूपी के साथ पंजाब तक के चुनाव में इन हथियारों का इस्तेमाल होना था। अब सवाल ये उठता है कि आखिर क्यों नेताओं को चुनाव में इन हथियारों की जरूरत पड़ रही है। इसका जवाब भी तस्कर ने ही दिया की लाइसेंस वाले हथियार जमा हो जाते हैं। जिसके बाद असली काम यही करते हैं।

जैसी डिमांड वैसा हथियार हो जाता है तैयार
इन तस्करों के पास से डिमांड पर हर तरह के हथियार उपलब्ध हो जाते हैं। ये तस्कर अवैध हथियारों का ये काम खेतों में ही करते हैं। जिससे पुलिस को भी इन्हें ढूढना मुश्किल हो जाता है।

राजनीतिक पार्टियां भी एक-दूसरे पर लगाती हैं आरोप, नहीं रुकता गोरखधंधा
इस अवैध हथियार के कारोबार पर राजनीतिक पार्टियों की भी एक राय नहीं है। भाजपा तो प्रदेश सरकार पर ही इनको संरक्षण देने का आरोप लगा रही है और सपा-कांग्रेस गठबंधन में इसके इस्तेमाल की बात कह रही है। वहीं पुलिस ऐसे शातिरों की फिराक में है और जगह-जगह चेकिंग चला कर ऐसे लोगों की धर-पकड़ में जुट गई है। अवैध हथियारों पर लगाम लगाने की पुलिस भले ही लाख दावे करे लेकिन देहात के क्षेत्रों में चल रहा यह अवैध गोरखधंधा पुलिसिया नाकामी का ही नतीजा है। देखना है कि आने वाले चुनावी दिनों में पुलिस इस चुनौती से कैसे निपटती है ?












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