क्या जितिन प्रसाद को इस वजह से साइडलाइन करने लगी थीं प्रियंका ?
लखनऊ, 9 जून: जितिन प्रसाद का कांग्रेस से पारिवारिक नाता था। वो तकरीबन 20 साल तक पार्टी से जुड़े रहे, दो बार सांसद बने और केंद्र में मंत्री भी बने। इसकी बुनियाद उनके दादा ज्योति प्रसाद ही डाल चुके थे। उनके बाद जितिन के पिता जितेंद्र प्रसाद ने कांग्रेस की राजनीति की और एक वक्त उनकी पार्टी में लगभग वैसी ही हैसियत थी, जो हाल के वर्षों में अहमद पटेल निभा रहे थे। लेकिन, पहले पिता का सोनिया गांधी से राजनीतिक मोहभंग हुआ था और अब जितिन प्रसाद, राहुल और प्रियंका गांधी से राजनीतिक रिश्तों की डोर तोड़कर भाजपा का कमल खिलाने के लिए तैयार हो गए हैं। असल में यह स्थिति एक दिन में नहीं बनी है।

पहले सिंधिया, अब प्रसाद ने छोड़ा राहुल का 'हाथ'
पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद एक जमाने में उसी तरह कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी माने जाते थे, जैसे कि कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया हुआ करते थे। उस स्तर के दो युवा कांग्रेसी अभी भी चाहे-अनचाहे कांग्रेस का हाथ थामे हुए हैं। राजस्थान में सचिन पायलट और महाराष्ट्र या यूं कहें कि मुंबई में मिलिंद देवड़ा। ये सारे नेता किसी न किसी पारिवारिक सियासी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन सच्चाई ये है कि इन सबने आज अपने दम पर अपनी भी राजनीतिक जमीन तैयार कर ली है। जितिन प्रसाद ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने का फैसला अचानक नहीं किया है। उनके लिए पार्टी में लंबे वक्त से यह स्थिति बन रही थी या बनाई जा रही थी, जिसके चलते शायद वो सही वक्त के इंतजार में थे।
Recommended Video

कांग्रेस से जितिन प्रसाद का क्यों हुआ मोहभंग ?
उत्तर प्रदेश में कम से कम दो ऐसे मौके आए जब जितिन ने उम्मीद पाली थी कि राहुल तक पहुंच होने का प्रसाद उन्हें जरूर मिलेगा और उन्हें पार्टी प्रदेशअध्यक्ष का कमान सौंपेगी। लेकिन, दोनों बार बाजी उनके हाथ से निकल गई। पहली बार राजबब्बर का सिक्का चल गया तो दूसरी बार अजय कुमार लल्लू में प्रियंका गांधी वाड्रा को लंबी रेस का घोड़ा नजर आया। जबकि, प्रसाद शायद इसी भरोसे रह गए कि उनके दादा के जमाने से ब्राह्मण-दलित और मुसलमानों की राजनीति करने वाला गांधी परिवार प्रदेश में 12 फीसदी ब्राह्मण वोट को देखकर उनपर दांव जरूर लगाएगा। खासकर ऐसे समय में जब दावा किया जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ सरकार से ब्राह्मण समाज पहले की तरह खुश नहीं है। प्रसाद (ब्राह्मण) को उम्मीद इस वजह से भी थी कि योगी आदित्यनाथ (ठाकुर), अखिलेश यादव (यादव) और मायावती (दलित) के मुकाबले उत्तर प्रदेश की सियासी रेस में कांग्रेस को उन्हें आगे बढ़ाना आसान होगा। लेकिन, शायद कांग्रेस को तो यूपी में अब 'गांधी परिवार' में विश्वास दिखने लगा है। प्रदेश में प्रियंका की सक्रियता इसी की ओर इशारा करती है। शायद इसीलिए पार्टी में उन्हें वह भाव नहीं मिला, जिसका मंसूबा पाल कर वो इतने दिनों से टिके हुए थे

हाई कमान को 'ज्ञान' देने की हिमाकत कर दी थी
जितिन प्रसाद की दिक्कत ये रही कि कांग्रेस जहां केंद्र में राहुल और यूपी में प्रियंका वाली रणनीति के लिए बहुत कुछ दांव पर लगाने को तैयार हो चुकी है, उसके ठीक उलट वो जी-23 में शामिल होकर हाई कमान को संगठन की व्यवस्था दुरुस्त करने की पाठ पढ़ाने की हिमाकत कर रहे थे। हद तो तब हो गई जब उन्होंने सोनिया गांधी की जगह किसी गैर-गांधी अध्यक्ष की वकालत कर दी। लिहाजा कांग्रेस की परंपरा के मुताबिक उनका पार्टी में जोरदार विरोध शुरू हो गया। दूसरी तरफ जबसे प्रियंका गांधी पार्टी महासचिव बनी हैं और औपचारिक तौर पर उनका पूरा फोसक यूपी में हो गया है, उनके इशारे के बिना वहां पार्टी में पत्ता तक हिलना नामुमकिन है। ऐसे में बगावती खून वाले प्रसाद के लिए वहां करने को कोई खास रह नहीं गया था। उन्हें लगने लगा कि हर मोर्चे पर आलाकमान उन्हें नजरअंदाज कर रहा है। ऊपर से वो न तो 2014 में और ना ही 2019 में लोकसभा का चुनाव ही जीत पाए थे।

क्या इस वजह से जितिन प्रसाद को साइडलाइन करने लगी थीं प्रियंका ?
जितिन प्रसाद पिछले काफी समय से यूपी कांग्रेस में उपेक्षित महसूस कर रहे थे। लेकिन, प्रियंका की ओर से उन्हें नजरअंदाज किए जाने का सिलसिला शायद 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले से शुरू हो चुका था। जानकारी के मुताबिक भैया राहुल को प्रधानमंत्री बनाने की मुहिम में जुटीं प्रियंका बतौर प्रदेश इंचार्ज उन्हें लखनऊ से चुनाव लड़वाना चाहती थीं। लेकिन, जितिन, भाजपा को उसके गढ़ में चुनौती देने के लिए तैयार नहीं हुए। न्यूज18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक 'प्रसाद ऐसा करने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे। जानकारी के मुताबिक उन्होंने लखनऊ में दांव लगाने की बजाए अपनी परंपरागत धौरहरा सीट से ही भाग्य आजमाना ज्यादा मुनासिब समझा। जबकि पार्टी में उनके विरोधियों ने दावा किया कि वह बीजेपी के दिग्गज राजनाथ सिंह को चुनौती नहीं देना चाहते थे। '












Click it and Unblock the Notifications