यूपी चुनाव में टूट गया जाट, दलित, मुस्लिम वोटों का मिथक, आंकड़े हैं सबूत
यूपी के चुनाव ने कई मिथकों को तोड़ दिया है इसमें सबसे अहम जो मिथक वो है जो पश्चिम यूपी के जाट, दलित और मुसलमान वोटों को लेकर लंबे समय से रहा है।
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद जिस तरह से भाजपा के पक्ष में परिणाम आए हैं उनसे कई मिथकों को तोड़ दिया है इसमें सबसे अहम जो मिथक टूटा है वो पश्चिम यूपी के जाट, दलित और मुसलमान वोटों को लेकर लंबे समय से रहा है। भाजपा ने अपने सहयोगियों के साथ 403 में से 325 सीटें जीती हैं। शहरी सीटों पर भाजपा मजबूत मानी जाती रही है लेकिन ग्रामीण सीटों पर भी इस बार भाजपा का झंडा लहराया है। इन सबके बीच सबसे ज्यादा चौंकाने वाले नतीजें उन सीटों के हैं, जिन पर मुसलमान, जाट और दलित वोट निर्णायक भूमिका में हैं जिन्हें परंपरागत तौर पर भाजपा का वोटर नहीं माना जाता है।

उत्तर प्रदेश में 85 सुरक्षित (आरक्षित) सीटें हैं। वहीं पश्चिम यूपी की 59 सीटें मुस्लिमों और जाटों के प्रभाव वाली हैं। इन्ही में अजित सिंह के प्रभाव वाला बागपत और आसपास के क्षेत्र भी हैं। माना जाता है कि जाट अपनी पहचान की राजनीति करते हैं और राष्ट्रीय लोकदल को उनकी पहली पसंद माना जताा है। दलितों की पहली पसंद बसपा रही है। वहीं मुसलमान सपा और बसपा के बीच बंटता रहा है और रालोद के प्रभाव वाले क्षेत्रों में रालोद को भी वोट देते रहे हैं लेकिन माना जाता है कि भाजपा से मुस्लिम दूरी बनाकर रखते हैं।

पश्चिम यूपी की जिन 59 सीटों पर मुसलमान वोट निर्णायक हैं। इनमें ज्यादातर सीटों पर मुसलमान वोट 25 फीसदी से ज्यादा हैं। मुस्लिम बहुल 59 सीटों पर भाजपा को इस इलेक्शन में 39.1 फीसदी वोट मिले हैं। भाजपा को 59 में से 39 सीट हासिल हुई हैं। 2014 के लोकसभा में ये वोट प्रतिशत 43 जबकि 2012 में 22 था। वहीं सपा को 2017 के चुनाव में 28.7 फीसदी वोट मिले हैं , 2014 के लोकसभा में सपा को 27 जबकि 2012 के विधानसभा में 26 फीसदी वोट मिले थे। बसपा को 2012 में इन 59 सीटों पर 26 फीसदी, 2014 में 16 फीसदी जबकि 2017 में 18 फीसदी वोट मिले हैं।

85 सुरक्षित सीटों पर 2012 विधानसभा में सपा को 32 फीसदी वोट, बसपा को 27 प्रतिशत वोट, और भाजपा को 14 फीसदी वोट मिले थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा को 21 फीसदी, बसपा को 23 फीसदी और भाजपा को 41 फीसदी वोट मिले। 2017 के नतीजों में सुरक्षित सीटों पर भाजपा को 40 प्रतिशत वोट मिले हैं। वहीं सपा को 19 फीसदी जबकि बसपा को 24 फीसदी वोट मिले हैं। 2014 के बाद 2017 के चुनाव ने जहां जाटों की अपनी पहचान की राजनीति को खत्म कर दिया है,वहीं दलित और मुसलमान वोट के किसी को चुनाव जिता देने के मिथक ने भी दम तोड़ा है।












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