Court Complex: योगी सरकार का बड़ा फैसला, 195 नए कोर्ट पर 1346 करोड़ क्यों खर्च होंगे, क्या होगा फायदा?
Court Complex Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को और दुरुस्त करने के लिए योगी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के छह जिलों में अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स की स्थापना की जाएगी। यह योजना न केवल न्यायिक प्रक्रिया को तेज करेगी, बल्कि आम जनता के लिए कोर्ट से जुड़ी सुविधाओं को भी आसान बनाएगी।
शामली, औरैया, हाथरस, महोबा, अमेठी और चंदौली में ये नए न्यायिक परिसर बनाए जाएंगे। सरकार ने इस परियोजना का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है और लक्ष्य रखा है कि अगले 18 महीनों में काम पूरा कर लिया जाए। इसके लिए करीब 1346 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।

योजना के तहत इन जिलों में कुल 195 कोर्ट बनाए जाएंगे। इसमें सबसे ज्यादा हाथरस में 44 कोर्ट होंगे, जबकि महोबा, औरैया और चंदौली में 37-37 कोर्ट तैयार किए जाएंगे। शामली में 23 और अमेठी में 17 कोर्ट का निर्माण होगा।
कोर्ट कॉम्प्लेक्स में मिलेंगी ये सुविधाएं
सरकार की योजना के मुताबिक, नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स में सभी जरूरी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएंगी। इसमें मुख्य न्यायालय भवन के साथ वकीलों के चैंबर, फैसिलिटी सेंटर, जजों और कर्मचारियों के लिए आवासीय परिसर, खेल सुविधाएं और पार्किंग स्पेस शामिल हैं।
इसके अलावा, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर कॉम्प्लेक्स में CCTV निगरानी, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरण लगाए जाएंगे। इससे न सिर्फ सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि कोर्ट का संचालन भी ज्यादा पारदर्शी होगा।
जानिए कितनी मंजिला होंगी इमारतें
हर जिले में बनने वाले कोर्ट कॉम्प्लेक्स की इमारतें भी खास होंगी। शामली में कोर्ट बिल्डिंग बेसमेंट, ग्राउंड और चार मंजिल की होगी। औरैया में पांच मंजिला न्यायालय और सात मंजिला वकील चैंबर तैयार किया जाएगा।
हाथरस में छह मंजिला कोर्ट बिल्डिंग और आठ मंजिला वकील चैंबर बनेगा। इन सभी इमारतों का डिजाइन आधुनिक जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में भी विस्तार में कोई परेशानी न हो।
इन तीन जिलों शामली, औरैया और हाथरस में कोर्ट कॉम्प्लेक्स निर्माण पर करीब 692 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं, अमेठी और चंदौली में बनने वाले परिसरों पर लगभग 654 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इन परिसरों में कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इससे उन्हें कोर्ट से जुड़ी ड्यूटी में किसी भी तरह की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश में पहली बार कोर्ट परिसरों को इतने बड़े स्तर पर एकीकृत तरीके से विकसित किया जा रहा है। इससे ना केवल मुकदमों के निपटारे में तेजी आएगी, बल्कि जनता को भी न्याय पाने में कम वक्त लगेगा।












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