PICs: कांग्रेस की ये प्रत्याशी बिना बोले मांग रही है वोट और विरोधी को दे रही है टक्कर

ना वो कुछ बोलती है और ना सामने वाले से कुछ सुनती है। बस चुपचाप इशारे में अपनी बात समझाती है, चुनाव चिन्ह दिखाती है और एक उम्मीद बांधकर अगले दरवाजे की ओर बढ़ जाती है।

इलाहाबाद। चुनाव यानी नेता जी के ओजस्वी अंदाज को देखने का मौका! भाषण, प्रचार-प्रसार, भोर से लेकर आधी रात तक दरवाजे पर दस्तक, धड़ाधड़ पैरों पर गिरते लोग, वोट मांगने का दिलचस्प तरीका, अजब-गजब स्लोगन, भौकाल, पैदल और वाहन काफिला, जिंदाबाद के नारे लगाती टीम और सोते हुए को भी उठा देने वाला शोर, ये सब मिलाकर जब एक साथ होता है तो समझिए चुनाव मतदान अब नजदीक है लेकिन इस अंदाज से बिल्कुल जुदा तरीके से एक प्रत्याशी अपने लिए वोट मांग रही है। ना वो कुछ बोलती है और ना सामने वाले से कुछ सुनती है। बस चुपचाप इशारे में अपनी बात समझाती है, चुनाव चिन्ह दिखाती है और एक उम्मीद बांधकर अगले दरवाजे की ओर बढ़ जाती है। ये चुनाव प्रचार इलाहाबाद के वॉर्ड नंबर 65 से हो रहा है। यहां कांग्रेस ने नसीमा बेगम को पार्षद का टिकट दिया है। नसीमा दिव्यांग है, वो बचपन से बोल और सुन नहीं सकती। फिलहाल बहादुरगंज इलाके में सबसे चर्चित प्रत्याशी के तौर पर नसीमा चुनाव मैदान में है और अपने प्रतिद्वंदियों को कड़ी टक्कर दे रही है।

Congress divyang Candidate ask votes strongly in Allahabad
Congress divyang Candidate ask votes strongly in Allahabad

किस तरह मांग रही है वोट?

36 साल की नसीमा सियासत की गोटी चलने के लिए भले ही पहली बार चुनाव मैदान में आई है लेकिन उनके घर में हमेशा से चुनावी माहौल रहा है। यहां सीट महिला के लिए आरक्षित होने पर पति इरशाद उल्ला चुनाव नहीं लड़ सके और उन्होंने अपनी पत्नी को चुनाव में उतार दिया। बुर्कानशीं महिलाओं की टोली के साथ बिल्कुल खामोशी से नसीमा डोर-टू-डोर वोट मांगने पहुंचती है। इशारे में पहले दुआ सलाम करती है, फिर वोटर को अपना पंफलेट देकर अपने हाथ का पंजा दिखाती है। वोटर्स भी समझ जाते हैं और नसीमा उन्हें समझा भी लेती है। बड़ी ही सादगी और खामोशी से चल रहा नसीमा का प्रचार दिलचस्प है और लोग नसीमा को पसंद भी कर रहे हैं।

Congress divyang Candidate ask votes strongly in Allahabad
Congress divyang Candidate ask votes strongly in Allahabad

पति का क्या कहना है?

इरशाद उल्ला बताते हैं कि नसीमा बचपन से ही मूक-बधिर है और अब वो देश की पहली ऐसी महिला है जो किसी राष्ट्रीय पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ रही है। उनकी जीत दिव्यांगों के लिए एक प्रेरणा का काम करेगी।

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