पोस्टमार्टम हाउस से गायब हुए शव के दोनों पैर, 18 वर्षीय बेटे का आधा शरीर देख परिजनों ने काटा हंगामा
कानपुर के हैलट अस्पताल में भर्ती एक 18 वर्षीय युवक की मौत के बाद उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। लेकिन जब अगले दिन सुबह परिजन शव लेने पहुंचे तो युवक के दोनों पैर गायब थे। यह देख मृत युवक के परिजन भड़क गए और पोस्टमार्टम हाउस पर हंगामा काट डाला।
ये है पूरा मामला
बता दें कि कानपुर के संजय नगर कैंट निवासी रिक्शा चालक जगदीश यादव का 18 वर्षीय बेटा हर्ष यादव सोमवार रात चुंगी क्रॉसिंग के पास ट्रेन की चपेट में आ गया था। इस हादसे में उसके दोनों पैर कट गए थे। जिसके बाद मौके पर पहुंचे परिजन और पुलिस हर्ष को एम्बुलेंस के जरिये हैलट अस्पताल ले लाए। साथ ही उसके दोनों कटे हुए पैर भी एक पॉलीथिन में पैक करके अस्पताल ले आए।

बेटे के दोनों पैर गायब
बताया जा रहा है कि अस्पताल में आने के बाद परिजनों ने पैरों को डॉक्टर के हवाले कर दिया। वहीं थोड़ी देर बाद हर्ष की मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, हर्ष की मौत के बाद डॉक्टरों ने बिना बताए शव को सील कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। इसके बाद जब वे पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे, तो वहां पर हर्ष के दोनों पैर नहीं थे।
बेटे के पैर मांगने पर धमकी, लगवाया अंगूठा
परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने डॉक्टरों से बेटे के पैर मांगे, तो वो धमकाने लगे। इतना ही नहीं बल्कि मृतक के पिता और नाबालिग भतीजे को बंधक बना लिया और जबरन किसी कागज में अंगूठा लगवा लिया। उधर, मृतक के बहनोई रविंद्र कुमार का कहना है कि रात में हर्ष को डॉ. संजय कुमार के देखरेख में भर्ती कराया था। पैर गायब होने के बारे में जब डॉक्टर से पूछा तो डॉक्टर एक दूसरे पर बात डालते रहे। जब हंगामा शुरू किया, तो उन्होंने मारपीट करने की धमकी दी और अस्पताल से चले जाने को कहा।

आखिर कहां गए दोनों पैर?
वहीं EMO डॉ. अनुराग राजोरिया ने मामले की छानबीन करनी शुरू की। उनको पता चला कि जिस डॉक्टर के अंडर में मरीज भर्ती हुआ था, उस डॉक्टर ने पैरों को डिस्पैच करने के लिए नर्स को हैंड ओवर किया था। किस नर्स को हैंड ओवर किया गया है, यह कोई नहीं बता पाया। इस मसले पर CMO डॉ. NC त्रिपाठी ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। इसमें जो भी दोषी होगा। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।












Click it and Unblock the Notifications