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UP Election 2022: योगी के गोरखपुर आने से बैलेंस हो गया 41 सीटों का समीकरण !

लखनऊ, 19 जनवरी। योगी आदित्यनाथ पहली बार गोरखपुर से विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। इसके पहले वे यहां से पांच बार सांसद रहे। मुख्यमंत्री बने तो विधान परिषद का सदस्य बनना पड़ा। लेकिन अब गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र के लोगों का कहना है कि वे इस बार यहां से विधायक नहीं, मुख्यमंत्री का चुनाव करेंगे।

BJP will capture 41 assembly seats from yogi Adityanath contesting election from Gorakhpur

योगी के विधानसभा चुनाव लड़ने से भाजपा समर्थकों में उत्साह है। गोरखपुर और उसके आसापास के इलाके में भाजपा समर्थक इस बात से खुश हैं कि सीएम बनने के बाद भी वे अपनी कर्मभूमि को नहीं भूले। वे कहीं से भी चुनाव लड़ सकते थे। जीत भी सकते थे। लेकिन आखिरकार उन्होंने विधायक बनने के लिए गोरखपुर को ही चुना। वे एक राजनेता से अधिक गोरक्षपीठाधीश्वर हैं। संत हैं। योगी हैं। उनके लाखों भक्त और अनुयायी हैं। उनका चुनाव लड़ना राजनीति से अधिक आस्था का विषय है। इसलिए अब गोरखपुर-बस्ती मंडल की 41 विधानसभा सीटों पर भाजपा की पकड़ मजबूत होती दिख रही है। 2017 में इन 41 में से 37 सीटों भाजपा गठबंधन को जीत मिली थी।

गोरखपुर जिले की नौ सीटें

गोरखपुर जिले की नौ सीटें

उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता हरिशंकर तिवारी के बेटे और भांजा के सपा में जाने से गोरखपुर का चुनावी समीकरण नया रूप ले रहा था। इस बीच स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी साइकिल की सवारी शुरू कर दी। इस नये समीकरण को बेअसर करने के लिए अब योगी आदित्यनाथ ने मोर्चाबंदी कर दी है। उनके साथ निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद भी हैं। हरिशंकर तिवारी के पुत्र विनय शंकर तिवारी 2017 में बसपा के टिकट पर चिल्लूपार विधानसभा सीट से जीते थे। अब विनय सपा में हैं। इस बार विनय शंकर तिवारी को टक्कर देने के लिए भाजपा ने संजय निषाद के बेटे श्रवण निषाद को चिल्लूपार सीट से खड़ा करने की योजना बनायी है। गोरखपुर इलाके में निषाद वोटर निर्णायाक स्थिति में हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में गोरखपुर के पड़ोसी जिले संत कबीर नगर से हरिशंकर तिवारी के बड़े बेटे कुशल तिवारी (बसपा) खड़े थे। वे पूर्व सांसद थे। उनको हराने के लिए भाजपा ने संजय निषाद के बड़े बेटे प्रवीण निषाद को मैदान में उतारा था। भाजपा का यह दांव सफल रहा था। प्रवीण निषाद ने कुशल तिवारी को हरा दिया था। अब भाजपा विधानसभा चुनाव में भी विनय शंकर तिवारी के खिलाफ निषाद कार्ड का इस्तेमाल करेगी। 2017 में गोरखपुर की नौ विधानसभा सीटों में से भाजपा ने आठ पर कब्जा किया था। सिर्फ चिल्लूपार सीट ही उसके हाथ से छिटक गयी थी। लेकिन 2022 में अब सभी नौ सीटों पर जीत के लिए बिसात बिछ रही है। भाजपा सोशल मीडिया पर गोरखपुर को सीएम का जिला के रूप में प्रचारित कर रही है।

गोरखपुर-बस्ती मंडल के सात जिले

गोरखपुर-बस्ती मंडल के सात जिले

गोरखपुर-बस्ती मंडल में सात जिले हैं। गोरखपुर के अलावा देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थ नगर, और संतकबीर नगर जिले में भाजपा समर्थक उत्साहित हैं। सीएम योगी बस्ती, सिद्धार्थ नगर और देवरिया में मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास कर चुके हैं। गोरखपुर को एम्स और खाद कारखाना दे चुके हैं। कुशीनगर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट की आधारशिला रखी गयी है। गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन की सौगात दी गयी है। भाजपा का दावा है कि योगी सरकार की विकास योजनाओं ने गोरखपुर इलाके की तस्वीर बदल दी है। अब जब खुद योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से चुनाव लड़ रहे हैं तो क्षेत्र की जनता उनके किये गये कामों के प्रति समर्थन का भाव दिखा रही है। योग्य प्रशासक के साथ-साथ लोग उनका एक संत के रूप में आदर करते हैं। गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में उनके लाखों अनुयायी भाजपा के पक्ष में मजबूती से खड़े हैं। कई लोगों का मानना है कि इस इलाके में गोरक्षपीठाधीस्वर के नाम पर ही वोटिंग होती है। योगी आदित्यनाथ अगर निर्दलीय भी लड़ें तो वे अकेले 15-20 सीटों पर अपने समर्थकों को चुनाव जीता सकते हैं। वे गोरखपुर के सबसे लोकप्रिय संत और नेता हैं। इस इलाके में जीत या हार गोरखनाथ मंदिर से तय होती है।

पूरे पूर्वांचल में असर !

पूरे पूर्वांचल में असर !

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल (भोजपुरी भाषी) इलाके में वाराणसी, आजमगढ़, जौनपुर समेत 28 जिले आते हैं। गोरखपुर-बस्ती मंडल के 7 जिले भी पूर्वांचल का ही हिस्सा हैं। इन 28 जिलों में 164 विधानसभा सीटें हैं। यानी कुल सीटों का 33 फीसदी हिस्सा इसी इलाके में है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इन 164 में से 115 सीटों पर विजय प्राप्त की थी। सपा को 17, बसपा को 14 और कांग्रेस को 2 सीट मिली थी। 16 सीटें अन्य के खाते में गयी थी। माना जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर से चुनाव लड़ने का फायदा पूरे पूर्वांचल को मिलेगा। भाजपा, आजमगढ़ एक्सप्रेवे को योगी सरकार की प्रमुख उपलब्धि के रूप में गिना रही है। अब आजमगढ़ से लखनऊ जाने में महज ढाई घंटे लगते हैं। योगी आदित्यनाथ ने जब 2017 में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी तब पूरे पूर्वांचल में कई दिनों तक जश्न मनाया गया था। लेकिन 2022 में सपा ने भी खूब जोर लगाया है। जिस सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने 2017 में भाजपा के साथ मिल कर चुनाव लड़ा था अब वह सपा के साथ है। सुहेलदेव पार्टी के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर का दावा है कि बलिया, मऊ, आजमगढ़ और गाजीपुर इलाके में राजभर समुदाय के 12 से 22 फीसदी तक वोट हैं। ऐसे में योगी आदित्यनाथ को नयी चुनौतियों के बीच अपनी क्षमता को साबित करना है।

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