UP: कोरोना से बिगड़ी छवि को सुधारने की कवायद, गंगा किनारे के 28 जिलों में चलेगा खास अभियान

लखनऊ, 19 अगस्त: उत्तर प्रदेश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान यूपी में गंगा किनारे सटे कई जिलों में हजारों लाशें तैरती नजर आयी थीं। कानपुर से लेकर गाजीपुर तक कई जिलों में गंगा किनारे बहती लाशों का मुद्दा राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठा था। उस दौरान केंद्र और प्रदेश की सरकार की छवि काफी धूमिल हुई थी और लोगों के बीच इन दोनों सरकारों को लेकर काफी नाराजगी थी। कोरेाना के समय लोगों के बीच पार्टी के प्रति बढ़ी असंतुष्टता को कम करने के लिए बीजेपी ने अब नया प्लान तैयार किया है। बीजेपी अब गंगा किनारे सटे 28 जिलों में गंगा को लेकर एक जागरुकता अभियान चला रही है जिसके माध्यम से लाखों लोगों तक पहुंचने का प्लान तैयार किया गया है।

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दरअसल, कोरोना की दूसरी लहर जब आई थी उस समय बड़े पैमाने पर लोगों की मौतें हुईं थीं। इस दौरान लोगों ने बड़े पैमाने पर शवों को जलाने के बजाए गंगा में प्रवाहित किया था। कई जगह तो शवो को जलाने के लिए लकड़ियों कम पड़ गईं थीं। तब प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के रवैये पर सवाल खड़े हुए थे। हालांकि सरकार ने बिगड़ती स्थिति को देखते हुए गंगा में शवों को प्रवाहित करने पर रोक लगा दी थी।

कोरोना की दूसरी लहर में योगी के खिलाफ खड़े हो गए थे जन प्रतिनिधि
सरकार ने गंगा किनारे भारी संख्या में पुलिस बल की भी तैनाती की थी ताकि कोई गंगा में शव को प्रवाहित न कर पाए। इस दौरान गंगा में प्रवाहित लाशों की जो तस्वीरें सामने आयीं थीं वह काफी डराने वाली थीं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद योगी और मोदी सरकार के प्रति लोगों का गुस्सा काफी बढ़ा था। लोगों की नाराजगी इस कदर बढ़ी थी कि बीजेपी के विधायक, सांसद और मंत्री भी अपने क्षेत्र में जाने से कतराने लगे थे। उस समय जनता का दबाव जनप्रतिनिधियों पर इतना बढ़ा था कि कई विधायक और मंत्री अपनी ही सरकार के खिलाफ खडे़ हो गए थे। कुछ लोगों ने तो सरकार की लापरवाही को लेकर सीएम योगी तक को पत्र लिख दिया था।

चुनाव से पहले बिगड़ती छवि को लेकर चिंतित था संघ
कोरोना लहर की वजह से केंद्र सरकार और राज्य सरकार की लगातार बिगड़ती छवि से संघ भी चिंतित हो गया था। दूसरी लहर के कम होने के बाद ही संघ ने लोगों की नाराजगी दूर करने की कमान अपने हाथों में ले ली थी। इसके बाद लखनऊ में संघ के पदाधिकारियों के दौरे बढ़ गए थे। मंत्रियों के साथ ही यूपी की नौकरशाही को फटकार लगनी शुरू हुई तब जाकर स्थितियां संभल पायीं।

हालांकि तब तक बीजेपी की छवि को काफी नुकसान पहुंच चुका था। उसी नुकसान की भरपाई के लिए अब संघ के इशारे पर यूपी के 28 जिलों में बीजेपी कार्यक्रम करने जा रही है। कार्यक्रम तो गंगा को साफ रखने के लिए जागरुकता फैलाने का है लेकिन इसके पीछे मंशा यही है कि लोगों की कोरोना के दौरान पैदा हुई नाराजगी को दूर किया जाए।

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बीजेपी के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी ने कहा, ''चुनाव होने में सात माह से कम समय बचा है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान गंगा में तैरती लाशों का मुद्दा काफी गरम हुआ था। इस मामले को लेकर सरकार की कार्यशैली पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए थे। लोगों के बीच भी सरकार को लेकर नाराजगी ज्यादा थी क्योंकि सरकार से अपेक्षाएं होती हैं और जब अपेक्षाएं पूरी नहीं होती हैं तो लोगों में नाराजगी होनी स्वाभाविक है। यूपी के 28 जिलों में चलाए जा रहे इस अभियान के पीछे मंशा यही है कि लोगों की नाराजगी को दूर की जाए।''

अभियान में इन मुद्दों पर रहेगा फोकस

  1. कल्चरल इवेंट्स के साथ ही गंगा क्विज, गंगा सौगंध और सिग्नेचर कैंपेन चलाया जाएगा
  2. सफाई अभियान और श्रमदान के अलावा गंगा स्वच्छता संदेश रैली और पदयात्रा निकाली जाएगी
  3. नुक्कड़ नाटक, गंगा चौपाल व पब्लिक मीटिंग के अलावा कॉम्पिटीशन एंड स्पोर्ट्स एक्टिविटी पर फोकस

यूपी के इन 28 जिलों में चलेगा अभियान
कानपुर, अमरोहा, बदायूं, बलिया, भदोही, बिजनौर, बुलंदशहर, चंदौली, इटावा, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, गाजीपुर, हापुड़, हरदोई, कन्नौज, कासगंज, कौशांबी, मेरठ, मिर्जापुर, मुरादाबाद, मुज्जफरनगर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रायबरेली, संभल, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी।

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हालांकि ऐसा दावा किया जा रहा है कि नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) के निर्देश पर स्टेट मिशन फॉर क्लीन गंगा (एसएमसीजी) ने गंगा के किनारों में जागरुकता को लेकर यह योजना तैयार की है। इसको लेकर एनएमसीजी के डायरेक्टर ने गंगा बेसिन के सभी 28 जिलों को लेटर लिखकर गंगा के प्रति लोगों को जागरुक करने को कहा है। यह कार्यक्रम 15 अगस्त से शुरू हो चुका है जो एक महीने तक चलाया जाएगा।

आस्था से है लाखों लोगों का जुड़ाव
दरसल भारत जैसे देश में मां गंगा आस्था से जुड़ा एक बड़ा विषय है। दरअसल जागरुकता अभियान के तहत रैली, पदयात्रा, संदेश रैली, नुक्कड़ नाटक, गंगा चौपाल और पब्लिक मीटिंग के माध्यम से सरकार अपनी उपलब्धियां भी गिनाना चाहती है। इससे लाखों लोगों को सीधे जोड़ा जा सकता है। अभियानों में गंगा प्रहरी, गंगा दूत, गंगा मित्रों को भी शामिल किया जाएगा। गंगा किनारे स्थित कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, मेरठ और मुरादाबाद गंगा किनारे स्थित हैं। कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी में खासकर गंगा अर्थ प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है।

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