BJP plans Sufi Sammelans: यूपी में अल्पसंख्यकों को लुभाने के लिए सूफ़ी सम्मेलन आयोजित करेगी भाजपा
उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि भाजपा ने अपने अल्पसंख्यक मोर्चा को मुख्य रूप से राज्य के मुस्लिम बहुल इलाकों में 'सूफी सम्मेलन' आयोजित करने का काम सौंपा है।

BJP plans Sufi Sammelans in UP: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल करने के बाद अब बीजेपी ने अपनी नजरें अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव पर टिका दी है। अगले आम चुनाव में बीजेपी यूपी में 75 प्लस सीटें जीतने का टारगेट लेकर चल रही है। इस टारगेट को पूरा करने के लिए अब बीजेपी ने अल्पसंख्यकों के बीच पैठ बनाने का खाका तैयार किया है। इस प्लान के मुताबिक बीजेपी उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यकों को लुभाने के लिए सूफी सम्मेलनों का आयोजन करेगी। इसके अलावा कौमी चौपाल का भी आयोजन ग्राम चौपालों की तर्ज पर किए जाने की तैयारी भी चल रही है।
कौमी चौपाल भी लगाएगी बीजेपी
अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले अल्पसंख्यकों तक पहुंचने के लिए एक और महत्वाकांक्षी कदम के तहत भाजपा सूफीवाद के अनुयायियों को लुभाने के लिए सम्मेलन आयोजित करने पर विचार कर रही है। संगठन की योजना 'कौमी चौपाल' आयोजित करने की भी है, जो 'ग्राम चौपाल' के समान एक अभियान है, जो केंद्र और राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से जुड़ने के लिए 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा द्वारा आयोजित किया गया था।
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अल्पसंख्यक मोर्चा को मिली सूफी सम्मेलनों की जिम्मेदारी
उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि भाजपा ने अपने अल्पसंख्यक मोर्चा को मुख्य रूप से राज्य के मुस्लिम बहुल इलाकों में 'सूफी सम्मेलन' आयोजित करने का काम सौंपा है। एक अनुमान के मुताबिक, राज्य के 1.6 लाख से अधिक मतदान केंद्रों में से लगभग 30,000 में मुस्लिम आबादी का एक बड़ा हिस्सा है।
इसकी पुष्टि करते हुए, यूपी भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रमुख कुंवर बासित अली ने कहा कि,
पार्टी समाज के सभी वर्गों तक पहुंच रही है। सूफीवाद के अनुयायी पार्टी के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। हम आने वाले दिनों में उन तक पहुंचने के लिए एक अभियान की योजना बना रहे हैं।
दरगाहों से जुड़े सूफी समाज को साधने की कोशिश
विशेषज्ञों ने कहा कि सूफी अनिवार्य रूप से दरगाहों (तीर्थों) से जुड़े हुए हैं, जो वहाबी मुसलमानों के विपरीत होते हैं। दरगाहों को मूर्ति पूजा के स्थान के रूप में मानते हैं, जो इस्लाम में प्रतिबंधित है। उनका मानना है कि दरगाह पर जाना सूफी संत की कब्र की पूजा करना है, जबकि इस्लाम केवल अल्लाह की इबादत की इजाज़त देता है।
पीएम मोदी ने की थी पसमांदा को जोड़ने की पहल
पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा मुस्लिमों के बीच सामाजिक रूप से उत्पीड़ित पायदान तक कल्याणकारी उपायों को सुनिश्चित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के महीनों बाद पसमांदा (पिछड़े) मुसलमानों के साथ अब सूफी मुसलमानों को टारगेट करने की योजना बनाई है। यहां तक कि भाजपा ने निकाय और लोकसभा चुनावों के लिए अपना चुनावी खाका तैयार किया है।
आम चुनाव से पहले रणनीतिक तौर पर आगे बढ़ रही बीजेपी
विश्लेषकों ने कहा कि भाजपा उन मुसलमानों को लुभाने के लिए रणनीतिक तौर पर पहल कर रही है ताकि इसका थोड़ा बहुत लाभ भी मिल सके। इसके लिए बीजेपी नेताओं ने काफी पहले से रणनीति तैयार कर रखी है। अब उसी रणनीति को अमल में लाने की कोशिश की जा रही है।












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