यूपी चुनाव: भाजपा की अंदरूनी कलह पहुंची चरम पर, डैमेज कंट्रोल करना हुआ मुश्किल!

एक दुसरे को गले लगा कर विरोधियों को सबक सिखाने का दावा करने वाले आज टिकट ना मिलने से उन्हीं लोगों का खुलेआम विरोध करने उतर आए हैं।अब इस शतरंज की बिसात पर शह-मात का खेल जारी है।

वाराणसी। अनुशासन, सिद्धांत और विकास का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी में पैदा हुई भूचाल की स्थिति संभले का नाम ही नहीं ले रही है। विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों को दिए गए टिकट के बाद पार्टी के नेताओं का सिद्धांत और चरित्र उभरकर सामने आ गया है। एक दुसरे को गले लगा कर विरोधियों को सबक सिखाने का दावा करने वाले आज टिकट ना मिलने से उन्हीं लोगों का खुलेआम विरोध करने उतर आए हैं। सभी को पार्टी के सिंबल पर उम्मीदवारी चाहिए और अब इस शतरंज की बिसात पर शह-मात का खेल जारी है। अंदरुनी कलह चरम पर पहुंच गई है और मामला प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र बनारस से जुड़ा हुआ है। ऐसे में वरिष्ठ पार्टी नेताओं की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।

दो केंद्रीय नेताओं ने डाल रखा है डेरा फिर भी नहीं संभल रही स्थिति

दो केंद्रीय नेताओं ने डाल रखा है डेरा फिर भी नहीं संभल रही स्थिति

इस पूरे प्रकरण की बात करें तो टिकट बंटवारे के बाद शुरू हुआ घमासान कम होने के बजाए बढ़ता ही जा रहा है। जिन विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी ने उम्मीदवार घोषित किए हैं और जहां घोषित करना बाकी है वहां दोनों तरफ विरोध के स्वर गूंज रहे हैं। प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष के बाद पार्टी में मचे घमासान और बिखराव को रोकने के लिए दो-दो केंद्रीय मंत्रियों को शीर्ष नेतृत्व ने यहां भेजा है। लेकिन स्तिथि ये है कि विरोध सिर्फ दिखाई ही नहीं दे रहा है बल्कि आरोप भी लग रहे हैं कि पार्टी अपने ही नेताओं की अनदेखी कर रही है।

डैमेज कंट्रोल में लगे मंत्री हालात पर नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं। जिससे दिन-प्रतिदिन हालात बत से बत्तर होते जा रहे हैं। मजेदार बात तो यह है की हर कोई विधायक बनना चाहता है और कतार लगा कर खड़ा है। सभी की मांग एक ही है कि प्रत्याशी बदले जाएं या जहां उम्मीदवार घोषित नहीं हुए हैं वहां उन्हें उम्मीदवार बनाया जाए। जिससे बगावत के सुर बढ़ते ही जा रहे हैं। हालांकि दोनों मंत्रियों ने बीते दिनों ये दावा किया था कि पार्टी में सबकुछ ठीक हैं और जो लोग विरोध कर रहे हैं उन्हें समझा लिया जाएगा पर हालात जिस तरह बिगड़ रहे हैं उसे देखकर नहीं लगता कि पार्टी की वाराणसी इकाई की स्तिथि ठीक है।

दया के मूड में नहीं लगते 'दयालु'

दया के मूड में नहीं लगते 'दयालु'

कांग्रसे से भाजपा का दामन थामने वाले डॉक्टर दया शंकर मिश्रा (दयालु) वाराणसी के शहर दक्षिणी से पार्टी का उम्मीदवार न बनाए जाने से व्यथित हैं। इन्हें पार्टी से टिकट मिलने का पूरा भरोसा था। यही वजह है की ये चुपचाप पार्टी की सेवा कर रहे थे। शहर दक्षिणी का प्रत्याशी घोषित हो जाने के बाद कई दिनों तक चुप रहने के बाद oneindia से बातचीत में इन्होंने साफ किया की ये बिलकुल ही दया के मूड में नहीं हैं। यकीनन यह कोई कड़ा फैसला ले सकते हैं। उन्होंने साफ किया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बात की है, सकारात्मक आश्वासन भी मिला है पर पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों का दबाव दिन-पे-दिन बढ़ता ही जा रहा है। जिससे कठोर कदम उठाना आवश्यक हो गया है।

बीजेपी से जुड़े हुए सवाल पर मिश्रा ने कहा कि बड़ी उम्मीद के साथ मैं भाजपा से जुड़ा पर पार्टी ने तो मेरी दुनिया ही उजाड़ दी। पार्टी के इस निर्णय से मेरा राजनीतिक जीवन ही खत्म हो चला है। जिससे कोई फैसला लेना जरूरी हो गया हैं। कार्यकर्ता और समर्थक दबाव बना रहे हैं और बनाए भी क्यों न बीते विधानसभा चुनाव में दयालु दूसरे पायदान पर थे। इसीलिए सभी जल्दी ही कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ बैठक करने वाले हैं। जिसके बाद निर्णय लिया जा सकता है कि वो निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है।

पिंडरा विधानसभा के समर्थक भी पहुंचे अपने नेता को टिकट दिलाने

पिंडरा विधानसभा के समर्थक भी पहुंचे अपने नेता को टिकट दिलाने

दो दिनों पहले भाजपा के पिंडरा विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी के समर्थक भी कांग्रेस से बीजेपी में आए अपने नेता अवधेश सिंह को टिकट दिलाने के लिए प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय पहुंचे थे। बता दें की अवधेश सिंह की महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता दया शंकर सिंह से अच्छे रिश्ते हैं। लेकिन चाहे दयालु हों या अवधेश सिंह इन लोगों ने बीते लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के चुनाव लड़ने पर बीजेपी ज्वाइन किया था और चुनाव में जी जान तक लगा दी थी, तो अब समय आने पर पार्टी की सेवा कर मेवा लेना चाहते हैं। हालांकि भाजपा और अपना दल (अनुप्रिया गुट) के गठबंधन के बाद अपना दल इस सीट के लिए पहले ही अपनी दावेदारी पेश कर चुका है। ऐसे में समर्थकों का यह विरोध इतनी आसानी से थमने वाला नहीं हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+