सत्ता बदली तो बदल गए बाहुबली विधायक के दिन, फिर वही बंगला सील
नंदी बच गए थे और वर्तमान योगी सरकार में फिर से मंत्री बने तो अब बाहुबली विधायक विजय मिश्रा पर आफत के बादल मंडराने लगे हैं।
इलाहाबाद। सूबे में योगी सरकार आने के बाद से कई बाहुबलियों की मुश्किल बढ़ी है। जेल बदली से लेकर पुराने मामले खुल रहे हैं। जमानत रद्द हो रही है तो अब इसी क्रम में ज्ञानपुर भदोही के बाहुबली विधायक विजय मिश्रा का नाम भी जुड़ गया है। विजय मिश्र के इलाहाबाद स्थित बंगले को पुलिस प्रशासन की टीम ने सीज कर दिया है। विजय मिश्रा पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई चल रही है। बाहुबली का ये बंगला इलाहाबाद के अल्लापुर इलाके में है। दिलचस्प बात ये है कि विजय मिश्रा का ये बंगला 2010 में सील किया गया था। लेकिन बाहुबली की गुंडई के आगे पुलिस प्रशासन बैकफुट पर रहा और बाहुबली ने बंगले की सील तोड़कर फिर से अपना कब्जा जमा लिया था। लेकिन एक बार फिर सत्ता बदलते ही उनका ये बंगला दुबारा सील किया गया।

गुंडई के दम पर तोड़ी थी सील
2010 में नंदी पर हमले के आरोप में कोर्ट ने विजय की संपत्ति सील करा दी थी। यहां बंगला भी सील कर दिया गया था। बसपा सरकार में मुश्किल बढ़ी तो विजय भागते-फिरते रहे। लेकिन जैसे ही सूबे में सपा सरकार आई गुंडई के दम पर विजय मिश्र ने सील तोड़ बंगले पर फिर से डेरा डाल दिया था।

मंत्री नंदी पर रिमोट बम से हमला
बाहुबली विधायक विजय मिश्र की दहशत उस वक्त हवाओं में फैल गई थी। जब 12 जुलाई 2010 को तत्कालीन बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता उर्फ नंदी पर रिमोट बम से हमला हुआ था। इस हमले में नंदी बच गए थे और वर्तमान योगी सरकार में फिर से मंत्री बने हैं। नंदी के सत्ता में लौटते ही विजय मिश्र की मुश्किल बढ़ने लगी हैं। जिसकी पहली किस्त में बंगला सीज हुआ है। वैसे आप को बता दें कि विधायक विजय मिश्र पर अलग-अलग थानों में अपहरण, हत्या, हत्या के प्रयास, लूट समेत 63 मुकदमे दर्ज हैं। जो बाहुबली की दहशत बताने के लिए पर्याप्त हैं। आपको ये भी बता दें कि नंदी पर हमले में गिरफ्तार राजेश पायलट ने गवाही दी थी कि विजय मिश्र के कहने पर ही उसने हमला किया था।

मोदी लहर में भी बने विधायक
विधायक विजय मिश्रा के रसूख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि समाजवादी पार्टी से टिकट कटने के बाद भी निषाद राज पार्टी से चुनाव लड़े। जब पूरे यूपी में मोदी की सुनामी आयी हुई थी। तब भी बिना किसी बड़े दल के टिकट के बाहुबली ने जीत दर्ज की। यहां तक की उन्होंने सपा प्रत्याशी को बुरी तरह रौंद दिया। अगर बाहुबली की दहशत की बात करें तो पूर्वांचल में इनकी तूती बोलती है। किसी की क्या मजाल कि कोई खिलाफत में आवाज उठा सके। 63 मुकदमे ये बताने के लिए काफी हैं कि जिसने आवाज उठाई वो आवाज कहां पहुंचा दी गई है।
बड़ा है कद
बाहुबली राज नेताओं की श्रेणी में विधायक विजय मिश्रा का कद काफी बड़ा है। अवैध बालू खनन से लेकर सरकारी टेंडर तक। बिना इजाजत कोई काम नहीं होते। गिट्टी-बालू के ठेके के लिए इनका सिर पर हाथ होना जरूरी है। यहां तक सड़क निर्माण से लेकर पंचायत चुनाव तक को विजय मिश्रा सीधे प्रभावित करते हैं। मिश्रा ने अपने बाहुबल से ही पत्नी रामलली मिश्र को भी विधान परिषद् के रास्ते विधायक बनवाया था। पूर्वांचल में इनकी दखल सरकारी मशीनरी से भी गहरी व मजबूत मानी जाती है।












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