BJP की हालत पतली देखकर क्या डर गए अमित शाह, जानिए क्यों बना रहे काशी प्रांत में 'क्लीन स्वीप' का प्लान
लखनऊ, 24 फरवरी: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव जैसे जैसे आगे बढ़ रहा है वैसे वैसे राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ती जा रही हैं। पश्चिमी यूपी और मध्य यूपी के बाद अब बाकी के तीन चरणों में गोरक्ष प्रांत और काशी प्रांत की सीटों पर मतदान होना है। इनमें भी वाराणसी समेत काशी प्रांत की 71 विधानसभा सीटें बीजेपी के लिए काफी अहम साबित होने वाली हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पार्टी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कड़ी मेहनत के दम पर 'क्लीन स्वीप' करने को कहा है ताकि काशी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जिलों की सभी 71 सीटों पर भाजपा उम्मीदवार जीत सकें।

काशी प्रांत की 71 सीटों पर बनाया प्लान
वाराणसी के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को भाजपा नेताओं से काशी क्षेत्र की हर सीट पर पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत करने को कहा है। भाजपा काशी क्षेत्र के 16 जिलों में 71 विधानसभा क्षेत्र हैं। शाह ने काशी क्षेत्र के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक की और उन सीटों के लिए रणनीति बनाई जहां पांचवें, छठे और सातवें चरण में मतदान होना है। पार्टी सूत्रों के अनुसार शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कड़ी मेहनत करने को कहा ताकि काशी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जिलों की सभी 71 सीटों पर भाजपा उम्मीदवार जीत सकें। उन्होंने कहा कि इसमें कोई ढील नहीं होनी चाहिए।

काशी विश्वनाथ धाम कारिडोर, राम मंदिर को भुनाने की कोशिश
अमित शाह ने काशी में बने भव्य काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, अयोध्या में बन रहे राम मंदिर, विंध्याचल में बन रहे मां विंध्यवासिनी कॉरिडोर और भाजपा सरकार के शासन काल में बने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के बारे में लोगों को बताने पर जोर दिया। उन्होंने माफियाओं और अपराधियों के खिलाफ योगी सरकार की कार्रवाई को उजागर करने पर भी जोर दिया। उन्होंने वाराणसी की सभी आठ विधानसभा सीटों का फीडबैक लिया और पार्टी कार्यकर्ताओं से यह सुनिश्चित करने को कहा कि काशी में क्लीन स्वीप हो।

मोदी-योगी की योजनाओं का प्रचार बूथ स्तर तक हो
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि टिकट दावेदारों को अभियान में सक्रिय किया जाए और लोगों को लाभान्वित करने वाली कल्याणकारी योजनाओं की चर्चा बूथ स्तर पर की जाए। उन्होंने कहा कि निर्वाचन क्षेत्रों में कमजोरियों की पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए प्रभावी रणनीति बनाई जाए। इससे पहले अमित शाह ने चौथे चरण के मतदान के दौरान एक अहम बयान देकर सबको चौंका दिया था। अमित शाह ने कहा था कि बसपा को अंडरस्टीमेट नहीं करना चाहिए क्योंकि बसपा भी मुसलमानों का अच्छा खासा वोट पा रही है। शाह के इस बयान के दो अर्थ निकाले गए।

मुस्लिमों की एकतरफा वोटिंग से डर गए अमित शाह ?
राजनीतिक विश्लेषकों की माने शाह के इस बयान के पीछे तीन मायने हैं। पश्चिमी यूपी में पिछली बार की तुलना में बीजेपी की हालत इस बार पतली है। वहां अखिलेश-जयंत का गठबंधन बीजेपी को कड़ी टक्कर दे रहा है। जिससे बीजेपी को लग रहा है कि पश्चिम में उन्हें सीटों के नुकसान का खामियाजा उठाना पड़ सकता है जिसकी भरपाई वह पूर्वांचल और अवध से करना चाहते हैं। लेकिन अवध में भी मुस्लिम और दलित वोट बैंक अच्छी संख्या में जिसको लेकर बीजेपी घबराई हुई है। दूसरा यह कि बीजेपी मायावती की तारीफ कर उन्हें अपनी करीब लाना चाहती है। क्योंकि उसे पता है कि यदि पुर्ण बहुमत नहीं मिला तो बसपा का समर्थन लिया जा सकता है। ऐसी सूरत में मायावती ही काम आएंगी। तीसरा यह कि अमित शाह के बयान की वजह से बाकी के तीन चरणों में यदि मुस्लिम मतों का बिखराव सपा और बसपा के बीच हुआ तो इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है। बीजेपी भी यही चाहती है कि मुस्लिम वोट एकमुश्त सपा को न मिलें।

आरएसएस ने भी काशी प्रांत में चलाया अभियान
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने राष्ट्रवाद और 'सामाजिक समरसता' का आह्वान करते हुए अपने छात्र, चिकित्सा, वकील, अपनी राष्ट्र सेविका समिति की महिला लोक, व्यापारियों, किसान और अन्य अनुसांगिक संगठनों को काशी प्रांत की 61 विधानसभा में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए डोर टू डोर कैंपेन करने का निर्देश दिया है। काशी प्रांत की विधानसभा सीटों में 16 जिले शामिल हैं। आरएसएस ने वास्तव में मतदाताओं तक पहुंचने के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 1,500 सक्रिय फ्रंटलाइन स्वयंसेवकों की एक टीम बनाई है, जिसमें उन्हें नागरिकों से राष्ट्रप्रथम की अपील के साथ लोगों से वोट करने को कहने के लिए कहा गया है। .












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