दलित साधु को महामंडलेश्वर घोषित कर सनातन संस्कृति के इतिहास में लिखा गया नया अध्याय

इलाहाबाद। सनातन संस्कृति के इतिहास में पहली बार दलित वर्ग के किसी संत को महामंडलेश्वर बनाया जा रहा है। जूना अखाड़े के महंत प्रभुनंद गिरि को विधि-विधान के साथ महामंडलेश्वर की उपाधि दी जाएगी। तीर्थराग प्रयाग में यमुना तट पर इस बाबत अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने घोषणा करते हुए बताया कि मौज गिरि आश्रम में महंत प्रभुनंद गिरि को पूर्ण संन्यास दिलाया गया और केश मुंडन के बाद संन्यास संस्कार की दीक्षा दी गई। बता दे कि प्रभुनंद गिरि को महामंडलेश्वर बनाने की घोषणा काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी नरेंद्रानंद सररस्वती महाराज ने की थी जिसे अखाड़ा परिषद ने भी अपनी मान्यता दे दी है।

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संत बोले यह बड़ी पहल
प्रभुनंद गिरि को महामंडलेश्वर बनाने की घोषणा के साथ देश में अब एक नए युग का शुभारंभ हुआ है। प्रयाग में जुटी संत मण्डली ने सामाजिक समरसता की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक आध्यात्मिक कदम बताया है। गौरतलब है कि इन दिनों देश में दलित वर्ग को लेकर खासा बवाल मचा हुआ है। कोर्ट से लेकर सड़क तक लगातार चर्चा में रहे इस वर्ग के संत को आध्यात्मिक तौर पर बड़ा पद मिलने के बाद निश्चित तौर पर जाति भेदभाव दूर कर समाज में बराबर की हिस्सेदारी वाले संदेश को बल मिलेगा।

यह बड़ा निर्णय
हाल के ही कुछ दिनों में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद खूब चर्चा में रहा। सबसे चर्चा का विषय तो परिषद द्वारा जारी की जा रही फर्जी संतों की सूची रही और अब उसी क्रम में अखाड़ा परिषद का एक और बड़ा निर्णय देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद द्वारा कन्हैया प्रभु को महामंडलेश्वर की उपाधि दिए जाने के फैसले से अब देश में उपजे राजनीतिक माहौल को भी स्थिरता मिलेगी। इस बाबत अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने बताया कि सनातन संस्कृति के इतिहास में यह एक नया अध्याय है और इसका पूरे देश में स्वागत होना चाहिए।

कन्हैया प्रभुनंद गिरी का परिचय
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में कन्हैया कुमार का जन्म हुआ था। यह वहां के एक छोटे से गांव बरौनी दिवाकर पट्टी (लक्ष्मणपुर) के रहने वाले हैं। कन्हैया कुमार कश्यप ने ज्योतिष शास्त्र में शिक्षा हासिल कर सन्यास ले लिया था। वर्ष 2016 में जब उज्जैन में स्थित सिंहस्थ कुंभ लगा तो वहां कन्हैया कुमार भी पहुंचे थे। कन्हैया कुमार ने जगद्गुरु पंचानंद गिरी के प्रति अपनी अगाध भक्ति दिखाई तो प्रसन्न होकर उन्होंने कन्हैया कुमार का आध्यात्मिक नामकरण करते हुये उनका नाम महंत कन्हैया प्रभुनंद गिरि रख दिया था और 22 अप्रैल 2016 को विधिवत गोसाई साधु की दीक्षा दी थी। पहली बार वहीं पटियाला काली मंदिर में महंत पंचानन गिरि महाराज ने कन्हैया को दीक्षा दी और कन्हैया यहीं से कन्हैया प्रभुनंद गिरि बन गए। अब कन्हैया प्रभुनंद गिरि को प्रयाग में सोमवार की शाम यमुना किनारे मौज गिरि आश्रम में पूर्ण संन्यास दिलाया गया। विधिवत जूना अखाड़ा में प्रवेश संन्यास वेश धारण कराते हुए उनके महामंडलेश्वर बनाने का ऐलान किया गया।

कुंभ में बनेंगे महामंडलेश्र्वर
इलाहाबाद में जूना अखाड़े में शामिल किये गए कन्हैया प्रभुनंद गिरि को प्रयाग में लगने वाले आगामी 2019 कुंभ के दौरान महामंडलेश्वर बनाया जाएगा। कुंभ में ही उनका पट्टाभिषेक कर महामंडलेश्वर बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। बता दें कि कन्हैया प्रभु पंजाब में रहते हैं और उनके शिष्यों की संख्या भी काफी अधिक है।

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