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बीजेपी को मात देने के लिए अखिलेश यादव अपनाएंगे '2012 वाला पैंतरा', ये है उनका सीक्रेट प्लान

इलाहाबाद/लखनऊ। हाल ही के उपचुनावों में मिली जीत से उत्साहित सपा नेता अखिलेश यादव यूपी में ज्यादा से ज्यादा सीट जीतने के लिए एक नया फॉर्मूला आजमाने जा रहे हैं। वह यह फॉर्मूला 2012 के चुनावों में पहले भी आजमा चुके हैं। दरअसल अखिलेश यादव मोदी और शाह को टक्कर देने के लिए प्रदेश भर में साइकिल यात्रा निकालने जा रहे हैं।

akhilesh yadav start cycle yatra again like 2012 election

अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारी यूं तो हर दल कर रहा है लेकिन, भाजपा की अचानक से यूपी में बढ़ी सक्रियता ने क्षेत्रीय राजनैतिक दलों की बेचैनी बढ़ा दी है। पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का दौरा फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम और अब इलाहाबाद में फिर से अमित शाह का दौरा यह बताने के लिए काफी है कि भाजपा चुनावी धरातल में अपने समीकरण बैठाने लगी है।

भाजपा की बन रही पकड़ को कमजोर करने और अपनी सियासी ताकत के माध्यम से भाजपा की घेराबंदी के लिए अखिलेश यादव भी मैदान में उतरने जा रहे हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर साइकिल यात्र शुरू करेंगे। इसके लिए लगभग पूरा ब्लू प्रिंट पहले ही तैयार हैं और 2012 के विधान सभा चुनाव के दौरान अपनी ऐसी ही साइकिल यात्रा की रणनीति से अखिलेश ने विरोधियों को चित्त कर दिया था। सूबे में सपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के पीछे अखिलेश की साइकिल यात्रा को भी बहुत श्रेय दिया जाता है और अब एक बार फिर अखिलेश अपनी उसी रणनीति को भाजपा को जवाब देने के लिए आजमाएंगे।

इलाहाबाद की साइकिल यात्रा से उत्साहित
दरअसल इलाहाबाद से पिछले 10 जुलाई को समाजवादी दलित चेतना साइकिल रैली शुरू हुई थी। साइकिल यात्रा सोमवार को लखनऊ तक पहुंची और रास्ते में मिले भारी समर्थन के बाद अखिलेश काफी उत्साहित हैं और ऐसी ही प्रदेश स्तरीय यात्रा को शुरू करने के लिए अब अपनी टीम तैयार कर रहे हैं। राजनैतिक पंडितों का गणित कहता है कि केंद्र की सत्ता तक पहुंचने का रास्ता यूपी से होकर जाता है और यह बात हर दल को पता है। ऐसे में महागठबंधन के बन रहे समीकरण में सपा अपनी मजबूत दावेदारी के लिए खुद को तैयार रखना चाहती है। चूंकि साइकिल यात्रा एक सफल प्रयोग था और उसकी सफलता को फिर से भुनाने के लिए अखिलेश आम चुनाव से पहले साइकिल चलाते नजर आयेंगे।

सितंबर-अक्टूबर में प्लानिंग
समाजवादी पार्टी की साइकिल यात्रा वैसे तो चल ही रही है। पहला चरण इलाहाबाद से शुरू हुआ था जो कौशाम्बी, चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, कानपुर ग्रामीण, फतेहपुर, उन्नाव के रास्ते लखनऊ तक पहुंचा था। अब इसका दूसरा चरण पूर्वाचल में होगा जो 28 जुलाई को बलिया से शुरू होगा। इस यात्रा का नाम लोकतंत्र बचाओ समग्र क्रांति साइकिल यात्रा है और इस यात्रा का अंतिम पड़ाव लखनऊ होगा। यह यात्रा 5 अगस्त को लखनऊ पहुंचेगी और इसके बाद ही अखिलेश की साइकिल यात्रा का कार्यक्रम तय होगा। सपा के पूर्व विधायक सत्यवीर मुन्ना ने बताया कि सितंबर से अक्टूबर के बीच अखिलेश यादव की साइकिल यात्रा शुरू होगी और इस बार यात्रा का दायरा पहले की अपेक्षा बड़ा होगा।

सपा के लिए क्यों जरूरी है यात्रा
2012 में यूपी विधान सभा चुनाव में सपा की सरकार बनने के बाद 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने एकतरफा जीत दर्ज की थी। सपा मुखिया केवल अपने घर के सदस्यों को ही चुनाव में जीत दिला सके थे और पार्टी सिर्फ 5 सीटे पर सिमट गई थी। वह चुनाव मोदी लहर में सबके लिए बुरे सपने सरीखा था और इस चुनाव से उबरने के बाद जब फिर से यूपी विधानसभा चुनाव हुए तो भाजपा ने फिर पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना ली। ऐसे में कहा यही जा रहा है कि सपा की पकड़ आम जनता के बीच ढीली हो चुकी है। अब सपा के लिए भी यह बहुत जरूरी है कि उनके टीपू मैदान में उतरे और पार्टी की नैया पार लगाये। वैसे भी 2012 चुनाव में 10 हजार किमी की साइकिल यात्रा कर अपना विशेष रणकौशल दर्शाने वाले अखिलेश फिर से अपने उसी सफलता को दोहराना चाहेंगे और 2012 विस चुनाव की तरह चमत्कारिक नेतृत्व को अंजाम देकर न सिर्फ वापसी करना चाहेंगे बल्कि भाजपा को पटखनी देकर संभावित गठबंधन में अपनी दावेदारी मजबूत करेंगे।

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