UP में पिछले एक साल में हुई 2 लाख भर्तियां, आरक्षण नियमानुसार, भटका रहे अखिलेश

उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। इस बार उन्होंने सरकारी नौकरियों और प्रमोशन में आरक्षण का मुद्दा उठाया है। अखिलेश यादव ने चार साल पुरानी अखबार की एक कटिंग साझा की, जिसमें मौजूदा बीजेपी सरकार पर आरोप लगाया गया है कि वह आरक्षण के नियमों का सही से पालन नहीं कर रही है।

हालांकि, यह खबर चार साल पुरानी है, और उस समय की स्थिति आज से बिल्कुल अलग थी। अखिलेश यादव ने इस पुराने संदर्भ को लेकर वर्तमान सरकार पर निशाना साधा है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या इस पुरानी खबर से आज की सच्चाई को बदला जा सकता है?

UP Yogi Adityanath government

क्या है सच ?
वास्तविकता यह है कि पिछले पांच सालों में उत्तर प्रदेश में करीब 6.5 लाख नौकरियां दी गई हैं। सिर्फ पिछले एक साल में ही दो लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। यूपी लोक सेवा आयोग की वेबसाइट पर दी गई जानकारी से स्पष्ट होता है कि नौकरियों में आरक्षण के प्रावधानों को पूरी तरह से लागू किया गया है।

नाम न छापने की शर्त पर सेवायोजन निदेशालय के अधिकारी ने बताया कि अनुसूचित जातियों को 21%, अनुसूचित जनजातियों को 2%, और अन्य पिछड़े वर्गों को 27% आरक्षण का लाभ दिया गया है। इसके अलावा राज्य सरकार ने कौशल विकास के जरिए 10 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार प्रदान किया है।

जनता को भ्रमित करने की कोशिश
अखिलेश यादव का इस चार साल पुरानी खबर को आज के संदर्भ में पेश करना एक राजनीतिक चाल के अलावा कुछ नहीं है। इसका उद्देश्य केवल जनता को गुमराह करना और चुनावी फायदे के लिए माहौल बनाना है। यदि वाकई में आरक्षण की अनदेखी हो रही होती, तो यह मुद्दा चार साल पहले ही क्यों नहीं उठा?

आरक्षण नीति पर सरकार का स्पष्ट रुख
बीजेपी सरकार ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि वह आरक्षण के नियमों का सख्ती से पालन करती है। चाहे यूपीएससी हो या यूपीपीएससी, सभी प्रमुख परीक्षाओं और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षण नीति का पालन किया जा रहा है। यहां तक कि प्रमोशन के मामले में भी आरक्षण का ध्यान रखा गया है।

सरकार के इस स्पष्ट रुख के बावजूद अखिलेश यादव का पुराने मामलों को उठाना सिर्फ चुनावी चाल लगती है। जनता भी इस बात को समझ रही है और यही कारण है कि अखिलेश के ट्वीट के जवाब में लोग उनकी सरकार के समय की खामियों को गिनाने लगे हैं। कुछ लोगों ने पुराने अखबार की कटिंग शेयर की, जिसमें अखिलेश ने खुद कहा था कि उनकी पार्टी प्रमोशन में आरक्षण का समर्थन नहीं करती है।

5 साल में 6.5 लाख नौकरियां दीं

  • 2017-2018: करीब 1.5 लाख युवाओं को विभिन्न सरकारी नौकरियों में नियुक्त किया गया।
  • 2018-2019: 1.4 लाख से अधिक सरकारी नियुक्तियां की गईं।
  • 2019-2020: इस वर्ष में विशेष रूप से स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में रोजगार दिया गया, जिसमें करीब 1.3 लाख लोगों को नौकरियां मिलीं।
  • 2020-2021: कोविड-19 महामारी के बावजूद, सरकार ने 1 लाख से अधिक नियुक्तियां कीं, खासकर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और नर्सों के लिए।
  • 2021-2022: लगभग 1.2 लाख युवाओं को विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्त किया गया।
Yogi Adityanath Government

चुनावी राजनीति में आरक्षण का मुद्दा
यह पहली बार नहीं है जब अखिलेश यादव ने आरक्षण के मुद्दे को उठाया हो। लोकसभा चुनाव के समय भी उन्होंने इसे लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश की थी। अब जब उपचुनाव नजदीक हैं, तो एक बार फिर वह आरक्षण को लेकर सक्रिय हो गए हैं।

Akhilesh Yadav

आरक्षण नीति में बदलाव की प्रक्रिया
नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि आरक्षण के नियमों में बदलाव लाने के लिए संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव रखना होता है। बिना संसद में प्रस्ताव पास हुए, किसी भी प्रकार के नियमों में बदलाव संभव नहीं है। यूपी लोक सेवा आयोग या संघ लोक सेवा आयोग जैसे निकाय सिर्फ भर्ती प्रक्रिया को संचालित करते हैं, लेकिन नियमों में बदलाव का अधिकार उनके पास नहीं है।

अखिलेश यादव का चार साल पुरानी खबर को शेयर कर बीजेपी सरकार पर हमला करना एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है। हालांकि, जनता इस तरह की चालों से गुमराह होने के बजाय सच्चाई को समझ रही है। आरक्षण नीति को लेकर बीजेपी सरकार ने स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया है, और इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जा रहा है।

यूजर्स ने अखिलेश को दिखाया आइना
अखिलेश यादव के एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए पोस्ट के जवाब में लोगों ने सपा सरकार की खामियां ही गिनानी शुरू कर दी। एक यूजर ने तो उस समय के अखबार की कतरन भी पोस्ट किया है जिसमें अखिलेश को यह कहते हुए पाया गया है कि समाजवादी पार्टी पदोन्नति में आरक्षण की हिमायती नहीं है। एक अन्य यूजर बृजकिशोर तिवारी ने लिखा कि शासन में रहते आरक्षण का विरोध और अब राजनीतिक फायदे के लिए समर्थन-अखिलेश यादव का यह कदम उनके 'दोगलेपन' की पराकाष्ठा है।

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