• search
उत्तर प्रदेश न्यूज़ के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  

51 साल पहले CM योगी के गोरखपुर से एक और मुख्यमंत्री लड़ चुके हैं चुनाव, हार गए तो छोड़नी पड़ी कुर्सी

|
Google Oneindia News

लखनऊ, 20 जनवरी: गोरखपुर की एक विधानसभा सीट पर 51 साल पहले एक उपचुनाव हुआ था। तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्म भी नहीं हुआ था। उस चुनाव में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री चुनाव लड़ रहे थे। सीएम योगी के गुरु महंत अवैद्यनाथ खुद उस मुख्यमंत्री का समर्थन कर रहे थे। लेकिन, तत्कालीन सीएम चुनाव हार गए। इसकी वजह से उन्हें अपना मुख्यमंत्री पद भी छोड़ना पड़ा। हालांकि, गोरखपुर की एक और सीट से एक नेता चुनाव जीते और उन्हें प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने का भी मौका मिला। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर सदर सीट से चुनाव मैदान में उतरे हैं।

गोरखपुर सीएम योगी और उनके गोरखनाथ मठ का गढ़ रहा है

गोरखपुर सीएम योगी और उनके गोरखनाथ मठ का गढ़ रहा है

गोरखपुर बीजेपी का गढ़ माना जाता है और खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यहां अत्यधिक प्रभाव है। क्योंकि, सीएम योगी गोरखनाथ मठ के महंत भी हैं और पांच-पांच बार लगातार इस संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। राजनीतिक तौर पर गोरक्षपीठ का दबदबा सीएम योगी के गुरु महंत अवैद्यनाथ के जमाने से भी पहले से कायम है। अवैद्यनाथ सांसद बनने से पहले गोरखपुर की ही एक विधानसभा सीट मणिराम से पांच-पांच बार चुनाव जीते थे- 1962, 1967, 1969, 1974 और 1977 में। उन्होंने 1989 से लेकर 1998 तक गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र का भी प्रतिनिधित्व किया था। लेकिन, इससे पहले वे एक बार गोरखपुर से लोकसभा का उपचुनाव भी जीते थे, उसकी भी चर्चा हम आगे कर रहे हैं, क्योंकि उससे ही यह दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है।

गोरखपुर से सीएम योगी से पहले उनके गुरु थे सांसद

गोरखपुर से सीएम योगी से पहले उनके गुरु थे सांसद

1970 की बात है। गांधीवादी माने जाने वाले त्रिभुवन नारायण सिंह को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया गया। 1957 में वे चंदौली सीट से दिग्गज समाजवादी डॉक्टर राम मनोहर लोहिया को चुनाव में हरा भी चुके थे। लेकिन, जब सीएम बने तो यूपी में किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। उनके लिए जरूरी था कि 6 महीने के अंदर या तो किसी विधानसभा से चुनाव जीतकर आएं या फिर विधान परिषद के जरिए बैकडोर से एंट्री मारें। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी नहीं चाहती थीं कि वे सीएम की कुर्सी पर बने रहें। इसी दौरान गोरखपुर लोकसभा की सीट भी खाली हो गई थी। क्योंकि, वहां से सीएम योगी के गुरु महंत अवैद्यनाथ के भी गुरु महंत दिग्विजय नाथ सांसद थे, जिनका 1969 में निधन हो गया था। गुरु की सीट पर 1970 की शुरुआत में उपचुनाव हुआ तो महंत अवैद्यनाथ जीतकर लोकसभा चले गए।

जब गोरखपुर की मणिराम सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री हार गए चुनाव

जब गोरखपुर की मणिराम सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री हार गए चुनाव

सांसद बनने के बाद सीएम योगी के गुरु ने अपनी मणिराम विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया। मुख्यमंत्री त्रिभुवन नारायण सिंह कांग्रेस (ओ) के नेता था, जो इंदिरा गांधी की वजह से 1969 में कांग्रेस के विभाजन के चलते बनी थी। इंदिरा गांधी कांग्रेस (आई) की नेता थीं। सीएम के लिए किसी भी सदन की सदस्यता जरूरी थी तो अवैद्यनाथ ने त्रिभुवन नारायण को अपनी मणिराम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने का ऑफर दिया। अवैद्यनाथ उनकी कई दलों की गठबंधन सरकार को भी समर्थन दे रहे थे। कांग्रेस (आई) ने यहां पर तत्कालीन सीएम त्रिभुवन नारायण सिंह के खिलाफ रामकृष्ण द्विवेदी को उतारा, लेकिन योगी आदित्यनाथ के गुरु के पूर्ण समर्थन और सहयोग के बावजूद मुख्यमंत्री चुनाव हार गए। रामकृष्ण द्विवेदी महंत अवैद्यनाथ के राजनीतिक विरोधी थे। लेकिन, तत्कालीन प्रधानमंत्री के आशीर्वाद से गोरखपुर की वह सीट जीतने में वे सफल हो गए।

तत्कालीन प्रधानमंत्री ने सीएम के खिलाफ किया था प्रचार

तत्कालीन प्रधानमंत्री ने सीएम के खिलाफ किया था प्रचार

उस समय एक परंपरा सी थी कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री उपचुनाव में प्रचार करने नहीं जाते थे। त्रिभुवन नारायण भी इसी का पालन करने में रह गए। लेकिन, उस समय की पीएम इंदिरा गांधी ना सिर्फ उनके खिलाफ प्रचार करने पहुंचीं, बल्कि बनारस गोली कांड की बात छेड़कर सीएम के खिलाफ माहौल तैयार कर दिया। नतीजा ये हुआ कि विधानसभा का सत्र चल रहा था, राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस हो रही थी और मुख्यमंत्री को कहना पड़ा कि उन्हें पद छोड़ना पड़ेगा। उपचुनाव नहीं जीत पाने पर वह पहले सीएम थे, जिनकी कुर्सी चली गई। हालांकि, बाद में झारखंड में जेएमएम सुप्रीमो शिबू सोरेन को भी इसी तरह से गद्दी गंवानी पड़ी थी।

इसे भी पढ़ें- चंद्रशेखर रावण ने क्यों चुनी गोरखपुर सदर सीट? जानिए इसके पीछे की वजहइसे भी पढ़ें- चंद्रशेखर रावण ने क्यों चुनी गोरखपुर सदर सीट? जानिए इसके पीछे की वजह

वीर बहादुर सिंह गोरखपुर से जीतकर सीएम बने थे

वीर बहादुर सिंह गोरखपुर से जीतकर सीएम बने थे

यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री को 51 साल पहले जब अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी, तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्म भी नहीं हुआ था। लेकिन, यूपी के सभी मुख्यमंत्री के साथ ऐसा नहीं हुआ है कि वह चुनाव हारे हों। गोरखपुर जिले में ही पहले एक पनियारा विधानसभा सीट भी थी, जहां से पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह जीते थे और 1985 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। बाद में पनियारा सीट महाराजगंज जिले में चली गई।1986 में वीर बहादुर सिंह के सीएम रहते हुए ही अयोध्या में पवित्र राम जन्मभूमि का ताला खुला था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई दफे उनकी सराहना भी कर चुके हैं।

Comments
English summary
The then Chief Minister Tribhuvan Narayan Singh has lost the by-election 51 years ago from Maniram assembly seat of Gorakhpur in UP,Former PM Indira Gandhi campaigned against him
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X