यूपी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे 257 उम्मीदवार, जानिए चुनाव आयोग ने क्यों घोषित किया अयोग्य
यूपी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे 257 उम्मीदवार, जानिए चुनाव आयोग ने क्यों घोषित किया अयोग्य
लखनऊ, 04 दिसंबर: 2022 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावों में अब बहुत ही कम समय बचा है। ऐसे में चुनाव आयोग के एक फैसले ने यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने वाले नेताओं को बड़ा झटका दिया है। चुनाव आयोग के फैसले के बाद प्रदेश के 257 उम्मीदवार यूपी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। क्योंकि, केन्द्रीय चुनाव आयोग ने इन लोगों को चुनाव लड़ने के अयोग्य करार दिया है। उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करने के पीछे क्या कारण है जानिए...
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चुनाव आयोग को नहीं दिया खर्च का ब्यौरा
257 उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करने के पीछे चुनाव आयोग को खर्च का ब्यौरा नहीं देना है। दरअसल, केंद्रीय चुनाव आयोग ने पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनाव में इन लोगों द्वारा चुनाव लड़ने और परिणाम आने के एक महीने बाद समय से और सही ढंग से अपने चुनावी खर्च का ब्यौरा आयोग में जमा करने के लिए बोला था। लेकिन इन उम्मीदवारों ने परिणाम घोषित होने के एक माह बाद भी चुनाव खर्च की जानकारी आयोग को नहीं दी है। जिसके बाद आयोग ने ये सख्त कदम उठाया है।
ज्यादातर निर्दलीय उम्मीदवार
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, अयोग्य घोषित किए 257 उम्मीदवारों में से 34 लोगों ने 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा था। बाकी 213 लोगों ने 2017 में विधानसभा चुनाव में चुनाव लड़ा था। चुनाव लड़ने के बाद आयोग के खर्च का ब्यौरा देने होता है, लेकिन इन लोगों आयोग को किसी भी तरह की जानकारी नहीं दी थी। इसमें सबसे ज्यादा संख्या निर्दलीय प्रत्याशियों की है। जबकि कुछ प्रमुख राजनीतिक दलों के उम्मीदवार है।
RLD के है सबसे ज्यादा प्रत्याशी, चार BSP के भी
चुनाव आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक, खर्च का ब्यौरा ना देने वाले दलों में सर्वाधिक 12 प्रत्याशी राष्ट्रीय लोकदल के हैं। इसके बाद छह उम्मीदवार पीस पार्टी के, पांच एनसीपी के, चार-चार उम्मीदवार सीपीआई और बसपा के। जबकि एआईएमआईएम के दो व निषाद पार्टी के दो उम्मीदवार हैं। सीपीआईएमएल के भी दो उम्मीदार हैं। कांग्रेस पार्टी के भी एक उम्मीदवार को चुनाव खर्च का विवरण न जमा किये जाने पर आयोग्य घोषित किया गया है। इन सभी को एक साल के लिए चुनाव लड़ने से रोका गया है यह अवधि अगले साल फरवरी-मार्च में होने वाले विधान सभा चुनाव के बाद ही खत्म होगी।












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