रामपुर नवाबों के साथ जाएगा या आजम खान के परिवार के

आजम रामपुर से 9 बार विधायक रहे हैं और वर्तमान में सांसद हैं.

नई दिल्ली, 14 फरवरी। रामपुर शहर सीट से लगातार नौ बार से विधायक रहे रामपुर के मौजूदा सांसद आजम खान फिलहाल जेल में हैं और उनका मुकाबला रामपुर के नवाब घराने के नवाब काजिम अली उर्फ नवेद मियां से है. इसके अलावा रामपुर की ही स्वार सीट से आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम और नवेद मियां के बेटे हैदर अली खान उर्फ हमजा मियां के बीच मुकाबला है.

आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं जबकि नवेद मियां कांग्रेस के टिकट पर और उनके बेटे हैदर अली अपना दल से उम्मीदवार हैं. अपना दल का भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन है. पहले हैदर अली भी कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे लेकिन ऐन मौके पर बीजेपी ने यह सीट गठबंधन सहयोगी अपना दल को दे दी और अपना दल ने हैदर अली को टिकट दिया.

हैदर अली को बीजेपी की सहयोगी अपना दल ने टिकट दिया है.

जेल से चुनाव लड़ रहे हैं आजम खान

पिछली समाजवादी पार्टी सरकार में अहम हैसियत रखने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान के खिलाफ पिछले पांच साल में कई मुकदमे दर्ज हुए और इस समय वो सीतापुर जेल में बंद हैं. उनके राजनीतिक करियर में यह पहला मौका है जबकि वो शहर में रहे बिना चुनाव लड़ रहे हों. जेल में बंद होने के कारण उनके चुनाव प्रचार का जिम्मा उनकी पत्नी और रामपुर शहर की मौजूदा विधायक तंजीम फातिमा, उनके बेटे और बेटी ने संभाल रखा है.

आजम खान के एक करीबी कार्यकर्ता रसूल मोहम्मद कहते हैं, "आज भले ही आजम खान साहब जेल में हो लेकिन वो रामपुर के हर नागरिक के दिल में मौजूद हैं. उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान की जितनी भी रैलियां और जनसंपर्क कार्यक्रम हो रहे हैं, उन्हें हम लोग सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचा रहे हैं."

इसके साथ ही रसूल मोहम्मद ने यह भी कहा, "हर क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगा रखी है कि बड़े आजम खान द्वारा किए कामों को आम लोगों तक पहुंचाए. यहां के लोगों ने देख रखा है कि कैसे बकरी चोरी और मुर्गी चोरी के मामलों में एक कद्दावर नेता को जेल में रखा गया है. इसके पीछे असली कारण क्या है, वो रामपुर ही नहीं देश और प्रदेश की जनता को भी पता है."

कुछ दिन पहले तक आजम खान के बेटे और स्वार टांडा क्षेत्र से सपा उम्मीदवार अब्दुल्ला आजम भी जेल में थे लेकिन जमानत मिलने के बाद वो बाहर आ गए हैं. इस समय अपना और अपने पिता दोनों के चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी वो निभा रहे हैं. डीडब्ल्यू से बातचीत में अब्दुल्ला कहते हैं, "मैंने अपना समय बांट रखा है. रात में यदि स्वार में प्रचार करता हूं तो दिन में रामपुर में और जब दिन में स्वार में प्रचार करते हैं तो रात में रामपुर पहुंचकर डोर टू डोर कैंपेन शुरू कर देता हूं. इसके बाद कार्यकर्ताओं से मुलाकात करता हूं."

रामपुर में आजम खान के प्रति लोगों की सहानुभूति है तो उनके विरोधी भी कम नहीं हैं. विरोधियों का आरोप है कि सत्ता में रहते हुए आजम खान ने यहां के मुसलमानों पर जो जुल्म ढाए हैं, उन्हें कोई भूला नहीं हैं. विकास कार्यों के नाम पर जिन लोगों को बेघर किया गया है, उनके भीतर आजम खान को लेकर बेहद नाराजगी है. भारतीय जनता पार्टी ने यहां से सामाजिक कार्यकर्ता आकाश सक्सेना को टिकट दिया है जबकि आम आदमी पार्टी से फैसल लाला चुनाव लड़ रहे हैं.

आजम खान जेल से चुनाव लड़ रहे हैं उनके बेटे भी चुनाव मैदान में हैं.

एक ही परिवार में कांग्रेस बीजेपी दोनों

दूसरी ओर, रामपुर के नूर महल में रहने वाले नवाब खानदान के वारिस काजिम अली उर्फ नवेद मियां भी मुकाबले में हैं और उनका परिवार एक ओर कांग्रेस का प्रचार कर रहा है तो दूसरी ओर बीजेपी और अपना दल का.

स्थानीय पत्रकार मोहम्मद मुजस्सिम बताते हैं, "आमतौर पर यह परिवार विदेश में ही रहता है लेकिन चुनाव के चलते परिवार के ज्यादातर लोगों ने रामपुर में ही डेरा डाल रखा है. बेगम साहिबा अलग-अलग जगहों पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए वोट मांग रही हैं. रामपुर में कांग्रेस के लिए तो स्वार में बीजेपी के लिए. क्योंकि एक जगह से उनके पति चुनाव मैदान में हैं तो दूसरी जगह से बेटा."

रामपुर के नवाब खानदान के वारिस नवाब काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां इस बार रामपुर सीट से कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं जबकि इससे पहले वो रामपुर जिले की स्वार सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं. पिछले चुनाव में आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम ने हरा दिया था और इस बार अब्दुल्ला का मुकाबला नवेद मियां के बेटे से है.

नवाब खानदान का रामपुर की राजनीति में शुरू से ही दखल रहा और साल 1967 में सबसे पहले नवाब अली खान उर्फ मिकी मियां रामपुर से सांसद बने. वो यहां से पांच बार सांसद रहे. उनके बाद उनकी राजनीतिक विरासत उनकी पत्नी बेगम नूर बानो ने संभाली और वो भी यहां से दो बार सांसद रहीं.

नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां उन्हीं के बेटे हैं और रामपुर की स्वार सीट से कई बार विधायक रहे हैं. उससे पहले यह सीट बीजेपी का गढ़ हुआ करती थी और बीजेपी के शिव बहादुर सक्सेना यहां से चार बार विधायक रहे हैं.

चुनाव प्रचार करने रामपुर पहुंची प्रियंका गांधी.

एक तरफ आजम खान दूसरी तरफ नवाब खानदान

मोहम्मद मुजस्सिम बताते हैं, "आजम खान ने पहले नवाब परिवार की ही छत्रछाया में राजनीति शुरू की लेकिन धीरे-धीरे वो प्रदेश की राजनीति में आगे बढ़ते गए और नवाब परिवार की राजनीतिक हैसियत सिमटती गई. इस वजह से दोनों परिवारों में राजनीतिक विरोध भी बढ़ता गया."

1980 में आजम खान जनता पार्टी के टिकट पर लड़े और जीते. ये पहली बार था जब आजम खान विधायक बने. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. 1985 में लोक दल के टिकट पर और फिर 1989 में जनता दल के टिकट पर निर्वाचित हुए और 1989 में ही पहली बार यूपी सरकार में मंत्री बने. इसके बाद 1996 को छोड़कर आजम खान यहां से लगातार विधायक बनते रहे. 1992 में समाजवादी पार्टी के गठन के साथ ही वो उससे जुड़ गए और धीरे-धीरे पार्टी का एक प्रमुख चेहरा बन गए.

साल 2017 में यूपी में बीजेपी की सरकार बनने के बाद अवैध जमीन की खरीद-फरोख्त समेत भैंस चुराने जैसे मामलों में उनके खिलाफ दर्जनों केस दर्ज हुए. उनके बेटे अब्दुल्ला आजम पर चुनाव के दौरान जन्मतिथि की गलत जानकारी देने का केस दर्ज हुआ और वो जेल गए.

आजम खान की पत्नी पर भी कई केस दर्ज हुए और वो भी जेल में रहीं. बेटे अब्दुल्ला और पत्नी तंजीम फातिमा तो जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर हैं लेकिन आजम खान अब तक जेल में ही हैं. आजम खान के खिलाफ ज्यादातर मामले दर्ज कराने वाले आकाश सक्सेना को बीजेपी ने उनके खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा है.

समाजवादी पार्टी ने आजम खान के खिलाफ दर्ज मुकदमों और उन्हें जेल में रखे जाने को मुद्दा बनाया है. शुक्रवार को पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रामपुर में एक सभा में कहा कि किसानों पर जीप चढ़ाकर मार डालने वाले लोगों को जमानत मिल रही है लेकिन बकरी चोरी जैसे जुर्म में आजम खान जैसे वरिष्ठ नेता को जेल भेजा गया है.

मुद्दों पर भारी उम्मीदवार

आजम खान का प्रभाव ना सिर्फ रामपुर में बल्कि आस-पास के भी कई जिलों में है. साल 2017 के विधान सभा चुनाव में बीजेपी लहर के बावजूद रामपुर जिले की पांच विधानसभा सीटों में से तीन सीटें समाजवादी पार्टी ने जीतीं जबकि दो सीटें बीजेपी के खाते में गईं.

रामपुर के सामाजिक जातीय समीकरण की बात करें तो यहां आधी से ज्यादा आबादी मुस्लिम है जबकि 45 फीसद हिन्दू और करीब 3 फीसद सिख और ईसाई और जैन धर्म के लोग हैं. शनिवार को चुनावी सभा को संबोधित करने के लिए रामपुर पहुंचे एआईएमएएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने हिजाब के मुद्दे को उठाते हुए सवाल किया कि अखिलेश यादव इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं? लेकिन रामपुर में आम लोग इस मुद्दे को लेकर बहुत ज्यादा चर्चा नहीं कर रहे हैं.

विकास, कानून-व्यवस्था और मुफ्त राशन को लेकर चर्चाएं जरूर हो रही हैं लेकिन चुनावी मुद्दे के रूप में यहां सिर्फ आजम खान के खिलाफ एफआईआर और उन्हें परिवार समेत जेल भेजे जाने का मामला ही मुख्य चुनावी मुद्दा है.

रामपुर में टेलीविजन पत्रकार आमिर खान कहते हैं, "आजम खान समर्थक बनाम बनाम आजम खान विरोधी, यहां सिर्फ यही मुद्दा है. यहां तक कि जो चुनावी मुद्दे पूरे राज्य में चल रहे हैं, यहां उन पर भी कोई चर्चा नहीं हो रही है.

कुछ लोग ऐसे हैं जो मंत्री रहते आजम खान के कार्यों के विरोधी थे जबकि कई लोग ऐसे हैं जिनकी उनके प्रति सहानुभूति है. पांचों सीटों पर इसी मुद्दे पर वोट पड़ेगा. हां, बिलासपुर में किसान आंदोलन का भी प्रभाव है क्योंकि वहां बड़ी संख्या में सिख समुदाय के लोग भी रहते हैं. लालपुर पुल का मुद्दा भी है जिसे आजम खां ने तुड़वाया था, लेकिन अब उसका निर्माण हो रहा है."

Source: DW

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