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भारत ने भी किया ‘हत्यारे रोबोट’ पर प्रतिबंध का विरोध

Provided by Deutsche Welle

नई दिल्ली, 03 दिसंबर। अमेरिका ने 'किलर रोबोट' कहे जाने वाले हथियारों पर प्रतिबंध लगाने या उनके इस्तेमाल को नियमबद्ध करने की मांग खारिज कर दी है. अमेरिका का प्रस्ताव है कि इनके इस्तेमाल के लिए एक अचार संहिता बनाई जा सकती है.

अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पेश किया है कि 'किलर रोबोट' कहे जाने वाले हथियारों की एक अचार संहिता बनाई जाए. इन हथियारों पर प्रतिबंध लगाने या उनका इस्तेमाल तय नियमों के अंदर करने के कानूनी बंधन सुनिश्चित करने की मांग को खारिज कर उसने यह प्रस्ताव रखा है.

जेनेवा में एक बैठक में बोलते हुए अमेरिकी प्रतिनिधि ने कानून बनाकर स्वचालित घातक हथियारों का इस्तेमाल नियमबद्ध करने के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया. जॉश डोरसिन चाहते थे कि ऐसे हथियारों के इस्तेमाल को लेकर एक साझा पक्ष खोजा जाए जिस पर सभी सहमत हो सकें.

चार साल से जारी बातचीत

इस बैठक में दुनियाभर के विशेषज्ञ शामिल थे. ये लोग अगले हफ्ते होने वाली कॉन्वेंशन ऑफ सर्टेन कन्वेंशनल वेपंस में होने वाली बातचीत की तैयारी कर रहे हैं. इस मौके पर डोरसिन ने कहा, "हमारा विचार है कि आगे बढ़ने का यही सबसे अच्छा तरीका है कि एक अचार संहिता बनाई जाए, जिसमें किसी तरह की बाध्यता ना हो."

संयुक्त राष्ट्र 2017 से ऐसी बातचीत करवा रहा है कि स्वचालित घातक हथियारों के इस्तेमाल को लेकर किसी तरह विभिन्न देशों के बीच सहमति बन जाए. शांति कार्यकर्ता और कई देश मांग कर चुके हैं कि ऐसे हथियारों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए जो बिना मनुष्य के दखल किए ही घातक हमले कर सकते हैं.

नवंबर 2018 में संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंटोनियो गुटेरेश ने भी इस मांग का समर्थन किया था कि जो हथियार बिना इंसानी दखल के हमला करने का फैसला कर सकते हैं उन पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए. लेकिन अब तक इस बात को लेकर किसी तरह की सहमित नहीं बन पाई है.

भारत ने भी किया विरोध

गुरुवार को बहस के दौरान कई देशों ने ऐसे हथियारों पर प्रतिबंध का विरोध किया. इनमें अमेरिका के अलावा भारत भी शामिल था. डोरसिन ने कहा कि अचार संहिता "विभिन्न देशों को जिम्मेदाराना व्यवहार और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन के लिए प्रेरित करेगी."

मानवाधिकार कार्यकर्ता इस बात से सहमत नहीं हैं. स्टॉप किलर रोबोट्स अभियान की क्लेयर कोनबॉय कहती हैं, "देशों के पास एक मौका है यह सुनिश्चित करने का ताकत पर अर्थपूर्ण मानव नियंत्रण बना रहे और ऐसी दुनिया ना बन जाए जहां जिंदगी व मौत के फैसले मशीनों के हाथ में हों."

मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच में हथियारों पर रिसर्च करने वालीं बोनी डॉचरी ने एक बयान में कहा, "फिलहाल चल रहीं कूटनीतिक वार्ताओं के बजाय किलर रोबोट्स पर कानून बनाने के लिए एक निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत विचार-विमर्श करना ज्यादा प्रभावशाली होगा."

वीके/एए (एएफपी)

Source: DW

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