महिलाओं को ताकत देता यूपी का यह खास जिम

नई दिल्ली, 03 सितंबर। बड़े शहरों में तो महिलाओं के लिए अलग जिमनेजियम रहते हैं या फिर अलग टाइमिंग रहती हैं. अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना और एक्सरसाइज करना उनका भी अधिकार है.

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छोटे शहरों में जिमनेजियम तो अवश्य खुल गए हैं लेकिन महिलाओं के लिए अभी उतनी सुविधाएं नहीं हैं. युवा लड़कियां भले जिमनेजियम जाती हों लेकिन छोटे शहरों में अभी भी इस सुविधा से महिलाएं दूर ही हैं. इसके पीछे कुछ सामाजिक और आर्थिक कारण भी हैं.

अगर आप बात छोटे कस्बे की करें तो ये संभव ही नहीं दिखता कि महिलाएं जिमनेजियम जाए. एक तो इस प्रकार की कोई सुविधा उनके कस्बे में नहीं होती और दूसरी बात ये कि उनका घर से सिर्फ एक्सरसाइज करने जाना अभी सामाजिक बंधनों में आता हैं.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश से अक्सर आपको ऐसी खबरें सुनने को मिल जाती होंगी कि लड़कियों पर बंदिश लगाई जा रही हैं लेकिन इसी क्षेत्र से एक ऐसी पहल हुई जो पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन गयी है. मुजफ्फरनगर जनपद से 28 किलोमीटर दूर एक छोटा सा कस्बा है पुरकाजी जो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित है. इसकी जनसंख्या मात्र 40 हजार हैं जिसमे आधे से अधिक मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं. मुजफ्फरनगर जनपद में लिंगानुपात 889 है जबकि उत्तर प्रदेश का लिंगानुपात 912 है.

पुरकाजी कस्बे में महिलाओं के लिए जिमनेजियम खुल गया है. ये वाकई बड़ी बात है क्यूंकि ये महिलाओं का जिमनेजियम वहां की नगर पंचायत पर सरकारी भूमि पर स्थापित किया गया है. पूरे प्रदेश में पहली बार है जब सरकारी पैसे से किसी नगर पंचायत में महिलाओं के लिए जिमनेजियम खोला गया है. महिलाएं उत्साहित हैं, अच्छी संख्या में जिमनेजियम जा रही हैं.

कैसे खुला जिम

साल 2017 में पुरकाजी में नगर पंचायत अध्यक्ष के रूप में जहीर फारूकी ने चुनाव जीत कर शपथ ली. उन्होंने अपने चुनावी घोषणा पत्र में महिलाओं के लिए जिमनेजियम खोलने का वादा किया था. इसलिए शपथ के बाद पुरकाजी की महिलाओं ने जहीर फारूकी को फोन करना शुरू कर दिया. फारूकी बताते हैं, "महिलाओं ने उनको फोन करके कहना शुरू कर दिया कि उनके वादे का क्या हुआ, कब खुलेगा का महिलाओं के लिए जिमनेजियम. जब इतना उत्साह महिलाओं में देखा तो फिर इस काम को करने के लिए आगे कदम उठाने शुरू किये."

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लेकिन जैसा होता है, उनके इस प्रस्ताव पर कुछ अधिकारी गंभीर नहीं हुए. फारूकी के अनुसार उनसे कहा गया कि सरकारी धनराशि से वो सड़क, नाली, खड़ंजा इत्यादि बनवा लें. इस प्रकार का कार्य पहले कभी नहीं हुआ. फिर उन्होंने तत्कालीन जिलाधिकारी से सीधे संपर्क किया और उनका प्रस्ताव स्वीकृत हो गया. काम भले पहली बार हो रहा था लेकिन फारूकी इसमें लग गए और आखिरकार एक सरकारी भूमि को चिन्हित किया गया और धनराशि का आवंटन हुआ. इसके बाद महिलाओं के लिए किसी भी नगर पंचायत में पहले जिमनेजियम की आधारशिला रख दी गयी. अक्टूबर 2019 में आखिरकार महिलाओं का ये जिमनेजियम बन कर तैयार हो गया.

क्या क्या है इस महिला जिमनेजियम में

इस महिला जिमनेजियम में सभी आधुनिक मशीन लगाई गई हैं. एक्सरसाइज करने के लिए सभी सुविधाएं हैं. म्यूजिक है, बड़ी-बड़ी टीवी स्क्रीन लगायी गयी हैं. जैसा किसी बड़े शहर में होता है. सुरक्षा की दृष्टि से कैमरे भी लगाए गए हैं. शौचालय की सुविधा भी उपलब्ध है. महिला ट्रेनर भी हैं. इसके अलावा इस कार्य से महिलाओं में कितना जोश है इसका अंदाजा इसी से लगाएं कि पुरकाजी से 28 किलोमीटर दूर से अपनी कार से डॉ सारा भी जिमनेजियम आती हैं. वह एक फिजियोथेरेपिस्ट हैं और सिर्फ महिलाओं को सुविधा देने के लिए जिमनेजियम आती हैं.

तस्वीरेंः कानून के सहारे बच जाते हैं रेपिस्ट

फारूकी बताते हैं, "इस कार्य के लिए डॉ. सारा कोई शुल्क भी नहीं लेती हैं. इसके अलावा योग ट्रेनर की भी व्यवस्था की गयी है. जिमनेजियम का अंदर से दृश्य किसी भी बड़े शहर के जिमनेजियम को मात दे देगा."

जिमनेजियम का समय सुबह 5 बजे से 10 बजे तक और शाम में 4 बजे से 9 बजे तक है. कुछ दिन कोरोना के कारण जिमनेजियम बंद करना पड़ा लेकिन वर्तमान में वो फिर शुरू हो गया है.

कैसा है महिलाओं में उत्साह

महिलाओं में जिमनेजियम के प्रति उत्साह का अंदाजा आप इसी से लगा लीजिये कि उद्घाटन के दिन लगभग 200 महिलाएं वहां इकठ्ठा हो गईं. भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत स्वयं वहां पर महिलाओं का उत्साहवर्धन करने पहुंचे थे. हिन्दू मुस्लिम दोनों समुदाय की महिलाएं मौजूद रहीं. कुछ के लिए तो नयी तरह तरह की मशीन एक अचम्भा थी.

स्थानीय निवासी मीर जहां भी जिमनेजियम जाती हैं. उनके अनुसार आजकल के दौर में अपने स्वास्थ्य के प्रति सभी गंभीर हैं और महिलाएं कोई अलग नहीं हैं. फारूकी बताते हैं कि महिलाओं की भीड़ जिमनेजियम में क्षमता के अनुपात में बहुत अधिक हो गयी थी, इस कारण एक मामूली शुल्क रखना पड़ा है.

अब महिलाओं को अपना रजिस्ट्रेशन करवाने के साथ मासिक शुल्क भी 100 रुपये देना होगा. हालांकि फारूकी का कहना है किसी भी गरीब महिला से अब भी कोई शुल्क नहीं लिया जाता हैं. वर्तमान में 130 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन है. हालांकि इससे इतर भी महिलाएं इस सुविधा का लाभ उठा रही हैं.

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Source: DW

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