Umaira News: बाघ के हमले से दादा-पोते मरते-मरते बचे, मौत का नाटक कर बचाई जान

Bandhabgarh Tiger Reserve: बांधवगढ़ क्षेत्र में मवेशी चराने गए दादा-पोते पर बाघ ने हमला कर दिया, जिसके बाद पोते ने भूमि पर लेट के मरने का नाटक कर अपनी जान बचाई है। वही बाघ के हमले दादाजी घायल हो गया। बताते चलें कि इस घटना के बाद पार्क प्रबंधन ने घायल दादा को जिला अस्पताल में एडमिट कराया है और उसका इलाज जारी है।

Bandhabgarh Tiger Reserve

होशियारी पूर्वक जान बचाने का अनोखा मामला

यह घटना बांधवगढ़ नेशनल पार्क के धमोखर बफर जोन से लगे रायपुर बीट की है। दरअसल उमरिया जिले के विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ टाइगर रिजर्व में बाघ के हमले से एक चरवहाक के द्वारा होशियारी पूर्वक खुद को बचाने का अनोखा मामला सामने आया है। मामला पार्क के धमोखर बफर जोन से लगे रायपुर बीट के पीएफ 172 टेनहाई हार जंगल की है। जहां 4 नवंबर को पार्क की जोंन से लगे सकरिया ग्राम निवासी दादा रतन रैदास, पोता दीपचंद मवेशी चराने जंगल गए हुए थे।

दादा का जिला अस्पताल में चल रहा इलाज

वहीं 1 मादा बाघ ने दोनों पर हमला कर दिया, बताते चलें कि बाघिन दादा रतन के ऊपर पहले हमला किया था, फिर पोते दीपचंद की ओर झपटा मारी जिसे देखकर दीपचंद ने होशियारी दिखाते हुए जंगल में लेटकर मरने की नौटंकी किया। जिसके बाद बाघिन पोते दीपचंद को छोड़कर दोबारा दादा रतन की ओर झपटी लेकिन इसी बीच दोनों को समय मिला और वे जंगल से भागकर रोड में आ गए और बाघिन जंगल की ओर चली गई। हालांकि इस हमले में दादा रतन को गंभीर चोट आई हैं। हमले की सूचना के बाद पार्क की रेस्क्यू टीम मौके पर पंहुची और घायल रतन को लेकर जिला अस्पताल पंहुची है जहां उसका उपचार किया जा रहा है।

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