MP News: उमरिया के मिट्टी की बोतल की बढ़ी मांग, देशी थर्मस ब्रांडेड कंपनियों को दे रहे टक्कर
Umaria News: मध्य प्रदेश समेत देश में भीषण गर्मी का प्रकोप हैं। उमरिया जिले में गर्मी के कारण लोग काफ़ी परेशान हैं। बच्चों के स्कूलों के समय को भी बदल दिया गया। गर्मी से बचने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं। एक ओर जहां पैसे वाले लोग गर्मी से राहत के लिए फ्रिज एसी और कूलर का सहारा ले रहे हैं।
जबकि साधारण और गरीब परिवार ठंढे पानी के लिए मिट्टी के मटके का उपयोग कर रहे हैं। उमरिया जिले के चंदिया में मटके के अलावा कई मिट्टी की चीजें मौजूद हैं। जिसका उपयोग कर लोग गर्मी से निजात पा रहे हैं।

वहीं उमरिया के बाजारों में मिट्टी के मटके के साथ मिट्टी के वाटर बोतल, मिट्टी के मग लोगों को खूब लुभा रहा है। इन मिट्टी के बर्तनों को मध्य प्रदेश से लेकर देश के अलग-अलग राज्यों के बाजारों में बेचा जा रहा है। खास बात ये है कि इनको साथ में लेकर भी चला जा सकता है। बाजार में इस बार मिट्टी से बनी बोतल खूब बिक रही है। दुकानदार बताते है कि प्लास्टिक के वाटर बोत्तल में पानी जल्दी गर्म हो जाता है।
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जबकि मिट्टी के वाटर बोत्तल में पानी घंटो ठंढा और तरोताज़ा रहता है। अब ऑटो, कार और बसों में भी इस बोतल ने जगह बना ली है। लोग सफर में मिट्टी की बोतलों में पानी भरकर ले जा रहे है। ताकि शीतल जल से गला तर करते रहे। अगर किम्मतों की बात करें तो ये बोतलें काफी कम दाम पर बाजारों में बिक रही हैं।
ओमप्रकाश पंडित ने जानकारी देते हुए बताया कि मिट्टी से बनी इस बोतल में 2 से 3 लीटर पानी रखने की क्षमता होती है। इस बोतल के शहर में आ जाने से लोग इसे बेहद पंसद कर रहे हैं। इस गर्मी में इस बोतल की मांग बहुत ज्यादा है। पहले लोग मिल्टन की बोतल को भी ज्यादा लेते थे। लेकिन अब लोग मिट्टी से बनी बोतल का ज्यादा उपयोग कर रहे है। मिट्टी के बर्तन में पानी पीने से स्वास्थ्य के लिए कई फायदे भी हैं। इसका तापमान सामान्य से थोड़ा ही कम होता है, जो ठंडक तो देता ही है। साथ ही पाचन की क्रिया को बेहतर बनाने में मददगार होता है।
उमरिया जिले के चंदिया नगर की सुराही पूरे देश में प्रसिद्ध है। गर्मी आते ही मध्य प्रदेश के जबलपुर, शहडोल , कटनी, सतना, रीवा, उमरिया तथा छत्तीसगढ़ प्रदेश के बिलासपुर, रायपुर जैसे शहरो मे चंदिया के कुम्हारो द्वारा तैयार किए गए घड़े, सुराही, मिट्टी के खिलौने, कप, केटली आदि की मांग शुरू हो जाती है। चंदिया के कुम्हारों की इस कला को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा चंदिया के मिट्टी कला को आगें बढ़ाने के कोशिश की जा रही है। मिट्टी का कार्य करने वाले 50 कुम्हारों को माटी हस्त कला बोर्ड के माध्यम से ट्रेनिंग दिलाया गया था। साथ ही मिट्टी की कलात्मक वस्तुएं तैयार करने के लिए उपकरण भी वितरित किए गए।












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