MP News: सावन में उज्जैन के स्कूलों का टाइमटेबल बदला, अब रविवार को लगेंगी क्लास, निकलेगी बाबा महाकाल की सवारी
MP news: सावन का महीना आते ही उज्जैन का माहौल भक्तिमय हो जाता है। लेकिन इस बार बाबा महाकाल की भक्ति के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया गया है। 14 जुलाई से 11 अगस्त 2025 तक उज्जैन के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में रविवार को कक्षाएं संचालित होंगी, जबकि सोमवार को अवकाश रहेगा।
यह निर्णय बाबा महाकाल की सावन सवारी के दौरान उमड़ने वाली भक्तों की भारी भीड़ और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

बाबा महाकाल की सवारी और प्रशासन का फैसला
हर साल की तरह इस बार भी सावन के दौरान महाकाल की छह पारंपरिक सवारियां निकलेंगी-पांच सोमवार को और एक राजसी सवारी 18 अगस्त को। ये सवारियां न सिर्फ उज्जैन शहर का गौरव हैं, बल्कि धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र भी बनती हैं। लेकिन भक्तों की भारी भीड़ के कारण सड़कों पर भीषण जाम लगना आम बात है। ऐसे में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने मिलकर फैसला लिया कि इन पांच सोमवार को स्कूलों में छुट्टी रखी जाए और उसकी भरपाई के लिए रविवार को पढ़ाई कराई जाए। 18 अगस्त को होने वाली राजसी सवारी के दिन स्थानीय अवकाश रहेगा, इसलिए उस दिन स्कूल नहीं लगेंगे।
शिक्षा विभाग का बयान, "पढ़ाई का नुकसान नहीं होने देंगे"
उज्जैन के जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. रमेश सक्सेना ने बताया, "सावन के सोमवार को सड़कों पर इतनी भीड़ रहती है कि बच्चों के स्कूल आने-जाने में खतरा रहता है। इस बदलाव से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी योजना ऐसे बनाएं जिससे पढ़ाई पर कोई असर न पड़े।"
डॉ सक्सेना ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी सरकारी और निजी स्कूलों को इस आदेश का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा। शिक्षा विभाग जल्द ही विस्तृत दिशानिर्देश जारी करेगा।
अभिभावकों और नागरिकों की प्रतिक्रिया: "सुरक्षा पहले, आराम बाद में"
शहर के निवासी इस फैसले को "सुरक्षा के लिहाज से सही कदम" बता रहे हैं। स्थानीय अभिभावक संजय शर्मा कहते हैं, "सावन के सोमवार को बच्चों को स्कूल भेजना सचमुच डराता है। बाबा महाकाल की सवारी देखने हजारों लोग आते हैं, ऐसे में ट्रैफिक और भीड़ में बच्चे फंस सकते हैं।"
हालांकि कुछ अभिभावकों का मानना है कि ऑनलाइन क्लासेस का विकल्प भी दिया जाना चाहिए था, ताकि रविवार को भी बच्चों को ज्यादा बोझ महसूस न हो। साथ ही, कुछ निजी स्कूलों ने इस असमान्य व्यवस्था के लिए अभिभावकों से अतिरिक्त सहयोग मांगा है।
प्रशासन की तैयारी: श्रद्धालुओं की भीड़ और सुरक्षा पर पैनी नजर
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाबा महाकाल की सवारी को लेकर सभी तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं। जिला कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने कहा, "हम ट्रैफिक, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं। पुलिस, नगर निगम, और स्वास्थ्य विभाग के साथ तालमेल कर योजनाएं बनाई जा रही हैं।"
सवारी मार्गों पर बैरिकेडिंग, CCTV कैमरे, और वॉच टावर लगाए जाएंगे। क्षिप्रा नदी के घाटों पर NDRF और गोताखोरों की तैनाती भी की जाएगी ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
बाबा महाकाल की सवारी: भक्ति और भव्यता का संगम
महाकालेश्वर मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और सावन में यहां होने वाली पालकी सवारी धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। हर सोमवार को बाबा की सवारी मंदिर से निकलकर रामघाट, क्षिप्रा तट, और अन्य प्रमुख मार्गों से होकर गुजरती है। लाखों श्रद्धालु इसमें हिस्सा लेते हैं।
18 अगस्त को निकलने वाली राजसी सवारी विशेष होती है, जिसमें बाबा महाकाल को चांदी की सजी हुई पालकी में सवार कर नगर भ्रमण कराया जाता है। इस दिन उज्जैन में सार्वजनिक अवकाश रहता है।












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