Chandra Grahan 2023: सूर्य हो या चंद्र ग्रहण बंद नहीं होते महाकाल मंदिर के कपाट, ये है बड़ी वजह
(संवाद सूत्र: उज्जैन से विमल बैंडवाल)
शरद पूर्णिमा के दिन साल का अंतिम चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। चंद्र ग्रहण को देश के कुछ हिस्से में देखा जा सकेगा। सूर्य हो या चंद्र ग्रहण इस दौरान पूजा पाठ करने पर भी मना ही होती है। ग्रहण के नियम सूतक काल लगते ही शुरू हो जाते हैं। ग्रहण काल के दौरान देशभर में स्थित लगभग सभी मंदिरों के कपाट बंद हो जाते हैं।
धार्मिक नगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर मंदिर के कपाट ग्रहण काल के दौरान बंद नहीं होते, मान्यता है कि मंदिर में ग्रहण का कोई असर नहीं होता। यही कारण है कि, ग्रहण काल के दौरान भी भगवान महाकाल मंदिर के कपाट खुले रहते हैं।

कुछ ऐसी है मान्यता
ग्रहण काल के दौरान मंदिर के कपाट बंद नहीं होते, लेकिन पूजा-पाठ के समय में कुछ बदलाव जरूर कर दिया जाता है, जहां गर्भ गृह में श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं दिया जाता, तो वहीं इस दौरान होने वाली आरती का समय भी परिवर्तित कर दिया जाता है। वहीं ग्रहण काल समाप्त हो जाने के बाद मंदिर परिसर को धोने की भी परंपरा है, जहां ग्रहण काल समाप्त होते ही मंदिर से जुड़े कर्मचारी मंदिर परिसर को धोने का कार्य करते हैं। वहीं इसके बाद भगवान महाकालेश्वर की आरती होती है। ग्रहण काल के दौरान भले ही गर्भगृह में श्रद्धालुओं का प्रवेश नहीं होता, लेकिन आम भक्तों के दर्शन खुले रहते हैं।
चंद्र ग्रहण पर रहेगी ऐसी व्यवस्था
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल मंदिर में चंद्र ग्रहण होने की वजह से शुद्धिकरण के बाद ही बाबा को भोग लगाया जाएगा। महाकाल मंदिर के पुजारी आशीष गुरु ने बताया की, चंद्र ग्रहण 28 और 29 अक्टूबर की दरमियानी रात होगा, जिस वजह से चंद्र ग्रहण का प्रभाव महाकाल मंदिर में इतना नहीं होगा, और बाबा के पट रात्रि 11 बजे बंद हो जाते हैं। महाकाल के दरबार में ग्रहण रात्रि कालीन होगा, जिस वजह से पट खुलने के बाद बाबा महाकाल के गर्भ ग्रह में मंदिर का शुद्धिकरण किया जाएगा। साथ ही बाबा को स्नान कराने के बाद बाबा की पूजा आरती की जाएगी।
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