चार दोस्तों की सक्सेस स्टोरी, बिजनेस मंदा पड़ा तो कर डाली बिना जमीन के खेती, कमाई लाखों में
उदयपुर। यह कहानी है चार दोस्तों। चारों ने कमाल कर दिखाया है। बिजनेस मंदा पड़ा तो दिल की सुनी और दिमाग लगाया। नतीजा आज ये सभी आत्मर्निभर बन गए। हुआ यूं कि कोरोना महामारी का दौर शुरू हुआ तो देशभर में लॉकडाउन घोषित किया, जिसमें एक ही झटके में लाखों लोगों की नौकरी चली गई थी। धंधे बंद हो गए थे, मगर यह वो काल था जो नवाचार के भी नए रास्ते खोल गया।

लीक से हटकर खेती करने की ठानी
ऐसा ही उदयपुर के चार दोस्त दिव्य जैन, भूपेन्द्र जैन, रौनक और विक्रम के साथ हुआ। ये सभी उदयपुर में टूरिज्म व्यवसाय से जुड़े थे। राजस्थान के सबसे खूबसूरत शहर उदयपुर में दुनियाभर के पर्यटक आते हैं। लॉकडाउन 2020 में पर्यटन व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुआ। काम मिलना बंद हुआ तो इन चारों दोस्तों ने खेती में भाग्य आजमाने की योजना बनाई और यह भी किया वे परम्परागत खेती की बजाय लीक से हटकर कुछ नया करेंगे।
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दस हजार स्कावयर फीट पर बनाया अनूठा फार्म
इन्होंने उदयपुर शहर से 12 किलोमीटर दूर दस हजार स्कावयर फीट पर बनाया अनूठा फार्म बनाया। इसे हाइड्रोपोनिक फार्मिंग के नाम से भी जाना जाता है उसके माध्यम से ओक लेट्यूस, ब्रॉकली, पाक चोय, चैरी-टोमेटो, बेल पेपर, बेसिल की खेती कर रहे हैं। इन सब्जियों की सबसे ज्यादा मांग पांच सितारा होटल्स में होती है और पर्यटक इसे पसंद भी करते हैं।

पहले तो सुनकर ही अजीब लगा था
दिव्य जैन बताते हैं कि बिना मिट्टी के पानी से होने वाली इस फार्मिगं के बारे में सुनकर पहली बात तो अजीब लगा, मगर फिर हमने के लिए काफी रिसर्च किया। कई जगहों से इसकी जानकारी जुटाई और फिर उदयपुर में पॉली हाउस बनाकर उसमें खेती शुरू कर दी।

पौधों की जड़ तक पाइप से पानी पहुंचाया
भूपेन्द्र जैन कहते हैं कि इस खेती में मिट्टी का कहीं भी उपयोग नहीं किया गया है। इसमें तापमान को स्थिर रखते हुए पौधों की जड़ तक पाइप से पानी पहुंचाया जाता है और उसी से पोषक सब्जियों की पैदावार होती है।

पांच सितारा होटलों में ज्यादा डिमांड
रौनक बताते हैं कि उदयपुर में हुई इस फार्मिंग की शुरूआत के नतीजे काफी सकारात्मक नजर आ रहे हैं। महज दो महीने में अब ऐसी फसल तैयार हो चुकी है, जिसे पांच सितारा होटलों में नाश्ते और फास्ट फूड में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। यह इसलिए भी गुणवत्ता पूर्ण हैं, क्योंकि इसमें कीटनाशकों का बिल्कुल भी इस्तमाल नहीं हुआ है।

स्थिति सामान्य होने के बाद शुरू हुई कमाई
विक्रम की मानें तो हमारा यह आइडिया भी पर्यटन व्यवसाय से जुड़ा है। कोविड-19 के कारण पर्यटकों की आवक बंद हो गई थी तो हम बेरोजगार हो गए थे। ऐसे में डर था कि यह नया काम भी पता नहीं सफल होगा या नहीं। लेकिन कोरोना महामारी के दौर में स्थिति धीरे धीरे सामान्य हो रही है और हमारा बिना जमीन वाली खेती में कमाई भी।












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