8 साल की बच्ची ने ली दीक्षा, बनी हेमांगीरत्नश्रीजी महाराज, छोटी उम्र में कैसे जागी साध्वी बनने की भावना?
सूरत। वह सिर्फ 8 साल की है लेकिन अब से साध्वी जैसा जीवन जीएगी। लोग उसे हेमांगीरत्नश्रीजी महाराज के नाम से जानेंगे। प्रारंभिक शिक्षा के शुरुआती-समय में ही उसकी साध्वी बनने की भावना जागी, इसलिए उसने बेहद कम उम्र में ही ऐसी दीक्षा ले ली। यह बच्ची है - आंगी।

महज 8 साल की उम्र में साध्वी बनी आंगी
आंगी गुजरात के अहमदाबाद की रहने वाली है। कोरोना लॉकडाउन के समय उसके पालनहार उसे सूरत लेकर पहुंचे थे। जहां आंगी ने गच्छाधिपति विजय हेम प्रभुसूरीश्वरजी के यहां जैनधर्म की पुस्तकों का पाठ किया। हाल में पाल की गुरूराम पावनभूमि में आयोजित दीक्षा समारोह हुआ। जिसमें आंगी ने जैन-सन्यासिन जैसे कपड़े पहने। इसी के साथ घोषणा कर दी गई कि, आंगी अब हेमांगीरत्नश्रीजी महाराज हैं। वह समाज में ज्ञान-संचार करते नजर आएंगी।

'सांसारिक मोह-माया से मुक्ति मिलती है'
सूरत स्थित गच्छाधिपति आचार्य हेम प्रभुसूरीश्वरजी के चेलों ने कहा कि, गुरुजी के सानिध्य में दीक्षा लेने के बाद सांसारिक मोह-माया से मुक्ति मिल जाती है। फिर हम आजाद जिंदगी जीते हैं।"
वैसे ऐसा पहली बार नहीं है जबकि बाल्यावस्था में ही कोई सन्यासी-सन्यासिन जीवन जीना शुरू कर दे। भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा वृंदावन और देवी राधा की नगरी बरसाना में भी बहुत से बच्चे सन्यासियों जैसा जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
कुछ ही दिन पहले हिमाचल के रहने वाले 4 साल के अद्विक ने 1 मिनट में महामृत्युंजय मंत्र का 14 बार जाप कर रिकॉर्ड बना दिया था। उसी तरह केरल की बच्ची ने भी 1 मिनट में 13 बार महामृत्युंजय मंत्र जपा।

यहां रहती हैं सैकड़ों साध्वी
किसी हिंदू बच्ची के महज 8 साल की उम्र में जैन धर्म की दीक्षा लेने का यह संभवत: पहला मामला है। वर्ष 2011 में 2 युवा लड़कियां (ऊपर फोटो में) दिशा शैलेश शाह (23) और जयना शैलेश शाह (19) इस जैन साध्वी (जैन लेडी नन) बनी थीं। सूरत में सैकड़ों साध्वी निवास करती हैं।












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