घाटी में ठंड का कहर, टेंट में रात गुजारने को मजबूर
श्रीनगर। जम्मू कश्मीर में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। हाड़ कंपाने वाली सर्द हवाओं ने घर से निकलना मुश्किल कर दिया है। ऐसे में बेघर लोगों का बुरा हाल है। ठंड से उनकी मौत हो रही है। चार माह पहले आई भीषण बाढ़ में कई लोग हो गए थे बेघर मकान बनाने के लिए सरकार ने अभी तक नहीं दी कोई मदद, अभी भी आशियाने से दूर कई परिवार।

पूरे देश की तरह रियासत में भी सर्दी का कहर जारी है। धुंध और कोहरे ने आम जनजीवन पर गहरा असर डाला है। वहीं बेघर व भिखारी लोगों के लिए कड़ाके की सर्दी मुसीबातों का पहाड़ बनकर आई है। खून को जमा देने वाली सर्दी में बेघर लोग खुले आसमान के नीचे रात बीतने को मजबूर है। जबकि प्रशाशन की ओर से इन गरीब व भिखारियों के लिए रात बीतने के लिए कोई प्रबन्ध नहीं किये गये है।
हालांकि सुप्रीमकोर्ट के आदेष के मुताबिक बेघर गरीब लोगों के लिए सर्दी के दिनों में रात काटने के लिए रैना बसेरा बनाकर इंतजाम किया जाना है। लेकिन बेघर लोग कड़ाके की सर्दी में खुले आसमान के नीचे रात को ठिठुर रहे है। वहीं प्रशाशन की तरफ से इन गरीब लेागों के लिए किसी प्रकार कोई प्रबन्ध नहीं किया गया है। डोडा से आए एक व्यक्ति ने कहा कि बिमार बेटे के ईलाज के लिए जम्मू आया था। ठहरने के लिए कोई प्रबन्ध नहीं होने के कारण मजबूर होकर खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ रही है। जबकि प्रशाशन ने उन्हें किसी प्रकार की कोई मदद नहीं की गई है।
जम्मू के राजौरी जिले में चार माह पहले आई भीषण बाढ़ से कई लोग बेघर हो गए थे। इन लोगों को अपना सिर छुपाने के लिए उस समय टेंट व प्लास्टिक की शीट दी गई थी, जो इस कड़ाके की ठंड में बेअसर साबित हो रही है। अभी तक कोई सरकारी मदद न मिलने से पीड़ितों को टेंट में रहना मजबूरी बनी है। प्रभावितों ने प्रशासन ने जल्द मुआवजा जारी करने की गुहार लगाई है, ताकि वे अपने मकान बनाकर ठंड से बच सकें। पिछले चार माह से कालाकोट, राजौरी, सुंदरबनी, नौशहरा, कोटरंका, बुद्धल, मंजाकोट, दरहाल व थन्ना मंडी तहसील में कई परिवारों के मकान तेज बारिश व बाढ़ की चपेट में आने से पूरी तरह से टूट गए थे। कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे।
उस समय प्रशासन ने कुछ परिवारों को टेंट दिए और कुछ परिवारों को प्लास्टिक की शीट दी थी, जो इस ठंड में नाकारा साबित हो चुकी है। पीड़ितों ने प्रशासन से गुहार लगाई कि उन्हें मुआवजे की रकम जल्द दी जाए, ताकि वे फिर से अपने मकान बना सकें। कोहरे व कड़ाके की ठंड में बाढ़ व बारिश से प्रभावित हुए परिवारों को अब अपने मकानों की याद सता रही है। कई कच्चे मकान बारिश व भूस्खलन की भेंट चढ़कर गिर गए थे।
ऐसे में प्रभावित लोग टेंटों में रहने को मजबूर हैं। वहीं, राहत के नाम पर चंद लोगों को ही मुआवजे के तौर पर सरकारी मदद की गई है। अधिकतर लोग अभी भी मदद के इंतजार में हैं कि कब उन्हें मदद मिले और वे अपना घर बना सकें। सिंबलगाला में टेंटों में रह रहे प्रभावित परिवारों के सदस्य बताते है कि सर्दी में टेंट में रहना काफी मुश्किल हो चुका है। अब अगर बारिश हो जाती है तो बिना मकान के टेंट में रहना काफी मुश्किल हो जाएगा। सर्दी के दिनों में टेंटों में कट रही जिंदगी नारकीय बन चुकी है। सर्दी बिना मकानों के काफी परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि हम इस आस में हैं कि कब सरकारी मदद मिले और हम अपने मकान फिर से तैयार कर सकें।












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