Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Dharambir: कौन हैं पेरिस पैरालंपिक में गोल्ड जीतने वाले धर्मबीर, एक हादसे ने बदल दिया पूरा जीवन

पेरिस पैरालंपिक में भारतीय एथलीट पदक जीतने के नए रिकॉर्ड बनाते हुए शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। इन उल्लेखनीय एथलीटों में धरमबीर भी शामिल हैं, जिन्होंने क्लब थ्रो इवेंट में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। चार फाउल के साथ एक कठिन शुरुआत के बावजूद, धरमबीर ने अपने पांचवें प्रयास में 34.92 मीटर की थ्रो के साथ F51 कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता।

पैरालंपिक में गोल्ड जीतने वाले धरमबीर कौन है?
हरियाणा के सोनीपत के 35 वर्षीय धरमबीर की कहानी प्रेरणादायक है। एक दुखद दुर्घटना के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। धर्मबीर का जीवन भी कभी सामान्य लोगों की तरह ही था, लेकिन एक हादसे ने सबकुछ बदल दिया। ये घटना तब घटी जब धर्मबीर अपने गांव में नहर में गोता लगाने पहुंचे, और वह नहर की गहराई का सही अनुमान नहीं लगा पाए और पानी के अंदर पड़े पत्थर पर जाकर टकरा गए। इस दुर्घटना के कारण उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लग गई, जिससे वह चलने में असमर्थ हो गए।

dharambir

एक हादसे ने कर दिया चलने में असमर्थ
इस हादसे ने धर्मबीर के शरीर को हमेशा के लिए चलने में असमर्थ बना दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दुर्घटना के दो साल बाद 2014 में धर्मबीर को पैरा-स्पोर्ट्स की जानकारी मिली। कोच और पैरा-एथलीट अमित कुमार सरोहा के मार्गदर्शन में उन्होंने क्लब थ्रो की ट्रेनिंग शुरू की। इस खेल में कंधों और हाथों का इस्तेमाल करते हुए लकड़ी के क्लब को जितना हो सके उतना दूर फेंकना होता है, यह हैमर थ्रो की तरह ही है।

धरमबीर ने मेहनत के दम पर किया कमाल
धरमबीर की लगन ने जल्द ही रंग दिखाया। उन्होंने प्रशिक्षण शुरू करने के सिर्फ़ दो साल बाद ही 2016 में रियो पैरालिंपिक के लिए क्वालिफाई कर लिया। यह पैरा-स्पोर्ट्स में उनके सफल करियर की शुरुआत थी। तब से, उन्होंने लगातार भारत के लिए पदक जीते हैं, जिसमें 2022 एशियाई खेलों में रजत पदक भी शामिल है।

क्लब थ्रो में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय पैरा-एथलीट
पेरिस पैरालिंपिक 2024 में, धरमबीर ने अपने पांचवें प्रयास में 34.92 मीटर क्लब थ्रो करके एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। ​​इससे वह क्लब थ्रो में पैरालिंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पैरा-एथलीट बन गए। प्रतिकूल परिस्थितियों से जीत तक का उनका सफर वाकई प्रेरणादायक है।

ये भी पढ़ें- Paris Paralympics 2024, Medals Tally: भारतीय एथलीटों ने रच दिया इतिहास, अब तक जीते रिकॉर्ड 24 मेडल

धरमबीर की सफलता की कहानी उनके दृढ़ संकल्प और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। अपार चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, उन्होंने उद्देश्य को अपनी नजरों से हटने नहीं दिया। उनकी उपलब्धियों ने न केवल उनके परिवार को गौरव दिलाया है, बल्कि देश भर में अनगिनत लोगों को भी प्रेरित किया है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+