Pele Passes Away: पेले की असीम लोकप्रियता से राष्ट्रपति भी डरते थे

फुटबॉल वर्ल्ड के दिग्गज रहे पेले का गुरुवार को निधन हो गया था। लम्बे समय से बीमार चल रहे पेले की खबर सुनकर हर कोई दुखी था। वह महानतम खिलाड़ी माने जाते थे।

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Pele Passed Away: दुनिया के महानतम फुटबॉलर पेले अब इस दुनिया में नहीं हैं। ऐसा बहुत कम हुआ जब किसी व्यक्ति की लोकप्रियता से किसी देश को पहचान मिली हो। 'ब्लैक पर्ल’ पेले की वजह से दुनिया के नक्शे पर ब्राजील एक चमकता हुआ देश बना। ब्राजील के मशहूर फुटबॉलर नेमार की श्रद्धांजलि काबिलेगौर है। “पेले से पहले 10 नम्बर की जर्सी केवल एक नम्बर थी। मैंने ये मुहावरा पहले कभी पढ़ा था। लेकिन यह खूबसूरत वाक्य अधूरा है। मैं इसमें जोड़ना चाहूंगा, पेले से पहले फुटबॉल केवल एक खेल था, लेकिन उन्होंने इसे कला का दूसरा रूप बना दिया।” नेमार ने सच ही कहा है। पेले ने 10 नम्बर की जर्सी पहनी तो वह महानता का प्रतीक बन गयी। इसके बाद 10 नम्बर की जर्सी टीम के सबसे सफल खिलाड़ी को ही पहनने का सौभाग्य मिला। अर्जेंटीना के माराडोना और फ्रांस के जिनेदिन जिदान इसी नम्बर की जर्सी पहनते थे। मौजूदा समय में ब्राजील के नेमार, अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी, फ्रांस के किलियन एमबाप्पे और मोरक्को के असरफ हकीमी 10 नम्बर की जर्सी पहनकर ही खेलते हैं। यहां तक कि क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर भी 10 नम्बर की जर्सी ही पहनते थे।

10 का दम

नेमार के कहने का मतलब है पेले ने इस खेल को जादू की तरह बना दिया था। वे फुटबॉल के जादूगर थे जिनका खेल देख कर दर्शक वशीभूत हो जाते थे। 1958 में वे पहली बार विश्वकप खेलने उतरे थे। इसी समय मीडिया ने उन्हें 'द किंग’ की उपाधि दे दी थी। 1970 में तीसरी बार ब्राजील के वर्ल्ड चैम्पियन बनने के बाद पेले को फुटबॉल का भगवान माना जाने लगा। उनकी प्रसिद्धि ब्राजील से निकल कर पूरी दुनिया में फैल गयी। वे दक्षिण अमेरिका महादेश के अलावा उत्तर अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, एशिया के मध्यपूर्व और दक्षिणपूर्व के देशों में जा कर खेले। उन्हें देखने के लिए लोग ऐसे उमड़ते जैसे किसी भगवान के दर्शन के लिए होड़ लगी हो। उस समय पेले के बॉल 'कैरी’ करने की विशिष्ट क्षमता फुटबॉल की दुनिया में आठवां आश्चर्य थी। उनकी इस क्षमता ने फुटबॉल को विश्व में लोकप्रियता दिलायी। कहा जाता है कि 1970 के दशक में पेले वजह से ही अमेरिका में फुटबॉल मशहूर हुआ। पेले के कलात्मक खेल ने दुनिया के तमाम देशों में फुटबॉल को लेकर जुनून पैदा कर दिया।

ब्राजील के शासक भी डरते थे पेले की लोकप्रियता से

फुटबॉल की अपार लोकप्रियता ने पेले को जीवन के दूसरे क्षेत्रों में भी एक महान हस्ती बना दिया। निजी जीवन में शादियों को लेकर उनके कई विवाद रहे फिर भी उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आयी। वे ब्राजील के तत्कालीन राष्ट्रपति से भी अधिक लोकप्रिय थे। काले लोग उन्हें अपना मसीहा मानते थे। इसकी वजह से अफ्रीका के कई तानाशाह भी पेले की लोकप्रियता से डरते थे। 1970 में ब्राजील में सैनिक तानाशाही थी। जल, थल और वायु सेना के अध्यक्ष मिल कर शासन चलाते थे। ब्राजील में राजनीतिक उथल-पुथल का दौर था। लेकिन पेले की लोकप्रियता इस राजनीतिक अराजकता से बिल्कुल अछूती थी। इसी दौर में पेले ने जेल में बंद राजनीतिक कैदियों को रिहा करने के लिए घोषणा पत्र जारी कर दिया। इससे ब्राजील के सैन्य तानाशाहों में खलबली मच गयी। उन्हें शक था कि पेले ब्राजील के वामपंथियों की मदद कर रहे हैं। इसकी खुफिया जांच करायी गयी। लेकिन कुछ भी साबित नहीं हुआ।

पेले के जीवन में नाइजीरिया की घटना

अफ्रीकी देश नाइजीरिया में भी फुटबॉल को लोकप्रिय करने का श्रेय पेल को है। शीतल पेय बनाने वाली कंपनी पेप्सी ने नाइजीरिया में फुटबॉल को बढ़वा देने के लिए फुटबॉल मैचों को आयोजन किया था। इन मैचों का आयोजन 1976 में हुआ था। इसके लिए पेले को खास तौर पर बुलाया गया था। इन मैचों से पहले नाइजीरिया में सैनिक क्रांति के जरिये तख्तापलट की कोशिश की गयी थी। इससे सैन्य शासक हर मशहूर शख्सियत से डरते थे। पेले मानवाधिकार रक्षा के लिए बढ़-चढ़ कर बात करते थे। पेले नाइजीरिया के शहर लागोस के एक होटल में रुक थे। संयोग से टेनिस के महान खिलाड़ी आर्थर एश भी वहां एक प्रतियोगिता में खेलने के लिए आये हुए थे। पेले और आर्थर एश एक ही होटल में रुके थे। आर्थर एश अफ्रीकी अमेरिकन टेनिस खिलाड़ी थे। वे पहले काले खिलाड़ी थे जो टेनिस में नम्बर एक के पायदान पर पहुंचे थे। नाइजीरिया की पुलिस ने इस होटल पर अचानक छापा मार दिया।

पायलट का भेष धारण कर नाइजीरिया से निकले थे पेले

पेले और उनके दल को किसी तरह ब्राजील के राजदूत के निवास पर लाया गया। वे तत्काल नाइजीरिया छोड़ नहीं सकते थे। कुछ दिनों के बाद जब हवाई सेवा बहाल हुई तो पेले पायलट का भेष धारण कर नाइजीरिया से बाहर हुए। पेले नेशनल हीरो थे। खेलने के दौरान भी और रिटायर होने के बाद भी।1995 में ब्राजील के तत्कालीन राष्ट्रपति फर्नांडो कार्डोसो ने पेले को खेल मंत्री बनाया था। जब पेले खेल मंत्री बने तब उन्होंने फुटबॉल क्लबों में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़ दी। लेकिन राजनीति उन्हें रास नहीं आयी और 1998 में उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

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    यूक्रेन पर रूस के आक्रमण का विरोध किया था

    पेले ऐसे महान खिलाड़ी थे जो मानवाधिकारकी रक्षा के लिए हमेशा आवाज बुलंद करते रहे। जून 2022 में उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर यूक्रेन हमले खिलाफ ब्लादिमीर पुतिन के नाम के खुला खत लिखा था। उन्होंने यूक्रेन पर रूस के आक्रमण को बुरा और अन्यायपूर्ण बताया था और पुतिन से हमला रोकने की अपील की थी। पेले ने गरीबों और काले समुदाय को आवाज दी। हालांकि उनका नाम विवादों से भी जुड़ा रहा लेकिन उनका आकर्षण कभी कम नहीं हुआ। फुटबॉल ने उन्हें महानता के शिखर पहुंचा दिया था। उन्होंने फुटबॉल को खूबसूरत और ब्राजील को एक चर्चित देश बनाया था।

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