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WPL 2025 Auction: धारावी की झुग्गियों से निकल बनी करोड़पति, कौन है सिमरत शेख?

महिला प्रीमियर लीग (WPL) 2025 के लिए ऑक्शन शुरू हो चुका है। बेंगलुरू में WPL मिनी नीलामी में सभी 19 स्लॉट को भरने के लिए कुल 120 नामों की नीलामी होगी। इस बीच अनकैप्ड बल्लेबाज सिमरन शेख, जिनका बेस प्राइस 10 लाख रुपये है, को गुजरात जायंट्स ने 1.90 करोड़ रुपए में अपनी टीम में शामिल किया हैं।

सिमरन शेख की क्रिकेट में जबरदस्त वृद्धि महिला प्रीमियर लीग (WPL) में चर्चा का विषय बनी हुई है। क्रिकेट में उनकी बढ़ती लोकप्रियता में कोई बाधा नहीं आई है। दुनिया की सबसे बड़ी झुग्गियों में से एक धारावी से आने वाली सिमरन ने बचपन में पार्क में क्रिकेट खेलने के लिए लोगों की खूब डांट सुनी, लेकिन अब जब भी वह टेलीविजन स्क्रीन पर दिखाई देती हैं, तो वही लोग उनका उत्साहवर्धन करते हैं।

Simran Shaikh

22 वर्षीय खिलाड़ी ने 2023 के उद्घाटन संस्करण के दौरान यूपी वारियर्स के लिए अपना WPL डेब्यू भी किया। यूपी वारियर्स के लिए अपना WPL डेब्यू करने के बाद, उन्हें बाद में फ्रैंचाइज़ी द्वारा रिलीज़ कर दिया गया था। सिमरन शेख ने एलिमिनेटर में मुंबई इंडियंस महिलाओं से टूर्नामेंट-क्रैकिंग हार तक यूपी वारियर्स के लिए सभी नौ मैच खेले।

प्लेइंग इलेवन में बार-बार मौके मिलने के बावजूद, शेख अपनी स्थिति को सही साबित करने में विफल रहीं क्योंकि वह 5.80 की निराशाजनक बल्लेबाजी औसत से सात पारियों में सिर्फ 29 रन बना पाईं। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 48 गेंदों का सामना किया और इस प्रक्रिया में 60.41 की औसत से कम स्ट्राइक रेट बनाए रखा।

इस बार गुजरात जायंट्स फ्रैंचाइज़ी के लिए खेलने के लिए तैयार, यह देखना बाकी है कि सिमरन शेख डब्ल्यूपीएल 2025 सीज़न में कैसा प्रदर्शन करेंगी।

धारावी की झुग्गियों से निकल बनी करोड़पति
धारावी की गलियों से महिला आईपीएल में खेलने तक सिमरन शेख का सफर पूरे देश के लिए प्रेरणा है। सिमरन के पिता जाहिद अली ने उसके संघर्षों के बारे में ANI को बताया कि, 'जब बेटी छोटी थी, तो उसे क्रिकेट खेलने में दिलचस्पी थी। जब भी वह मैदान पर क्रिकेट खेलती थी, तो बहुत से लोग उसे डांटते थे और बहुत सी बातें कहते थे। लेकिन बेटी ने सभी को अनदेखा कर दिया। उसने क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित किया और आगे बढ़ती रही।'

किसी के लिए भी क्रिकेट को करियर के तौर पर अपनाना मुश्किल काम है। लेकिन सिमरन अब सबसे बड़ी महिला क्रिकेट लीग में से एक में खेल रही है। उसके पिता को शुरू में विश्वास नहीं था कि वह इस स्तर तक पहुंच पाएगी।

सिमरन के पिता ने कहा कि, 'हम गरीब लोग हैं और उस समय हम अपनी बेटी की मदद करने की स्थिति में नहीं थे। लेकिन भगवान की कृपा से वह आगे बढ़ पाई। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि आज हमें जो सम्मान मिल रहा है, वह हमारी बेटी के हुनर, मेहनत और भगवान की कृपा की वजह से है। बहुत से लोगों ने हमारा साथ दिया है।'

क्रिकेट खेलने के लिए पढ़ाई छोड़ दी
सिमरन की मां अख्तरी बानो को भी यकीन नहीं था कि उनकी बेटी इस स्तर पर खेल सकती है। उन्होंने कहा कि, 'हमें यकीन नहीं था कि वह आगे जाकर खेलेगी। मैं कोच के साथ-साथ भगवान का भी शुक्रिया अदा करती हूं, जिन्होंने मुश्किल समय में हमारी बेटी और हमारा साथ दिया।'

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सिमरन ने 10वीं क्लास के बाद पढ़ाई छोड़ दी और अपने पास मौजूद हर चीज से क्रिकेट को आगे बढ़ाया। अब उसने अपने माता-पिता को गौरवान्वित किया है और वह भारत की एक जानी-मानी क्रिकेट खिलाड़ी बन गई है।

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