IPL जीतने का 'धोनी फॉर्मूला' आया सामने, यूं ही नहीं कहे जाते हैं 'मास्टर कप्तान'

चेन्नई सुपर किंग्स ने एक बार फिर से आईपीएल की ट्रॉफी अपने नाम कर ली है। चेन्नई की इस जीत में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की भूमिका काफी अहम रही है। जिस तरह से धोनी ने विकेट के पीछ से रणनीति बनाई उसका हर कोई फैन हो गया।

mahendra singh dhoni

Dhoni Formula of IPL: कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के लिए नंबर कभी भी मायने नहीं रखते हैं, वह हमेशा ही नतीजों पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं और यही वजह है कि भारत के लिए उन्होंने सबसे अधिक आईसीसी ट्रॉफी जीती है। कुछ ऐसा ही वह आईपीएल में भी लगातार करते आ रहे हैं।

आईपीएल में धोनी के इस सीजन में आंकड़ों की बात करें तो इसे देखकर आप बेहद औसत कहेंगे, लेकिन इस औसत आंकड़े के बाद भी धोनी ने चेन्नई सुपर किंग्स को रिकॉर्ड 5वीं बार आईपीएल की ट्रॉफी जिता दी है।

आंकड़ों पर धोनी का नहीं भरोसा
आईपीएल के इस सीजन की बात करें तो महेंद्र सिंह धोनी ने कुल 16 मैचों में सिर्फ 104 रन बनाएं। हालांकि यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि धोनी ने अधिकतर 8वें नंबर पर बल्लेबाजी की। दिलचस्प बात यह है कि 16 पारियों में महज 104 रन बनाने के बाद भी धोनी का स्ट्राइक रेट 182.46 का रहा और उन्होंने इस दौरान 10 छक्के और 3 चौके लगाए।

विरोधी टीम से एक कदम आगे
बल्ले से धोनी जरूर अपनी क्षमता के अनुरूप खास नहीं कर पाए लेकिन बतौर विकेट कीपर कप्तान धोनी ने मैदान पर हमेशा हावी रहे। वह ना सिर्फ अपनी टीम के खिलाड़ियों का बेहतर इस्तेमाल कर रहे थे बल्कि विरोधी टीम की हर रणनीति को बेहतर तरह से समझते थे और उससे हमेशा खुद को एक कदम आगे रखते थे।

अपनी रणनीति पर भरोसा
गुजरात के खिलाफ फाइनल मुकाबले में जब शुभमन गिल और रिद्धिमान साहा आतिशी बल्लेबाजी कर रहे थे तो धोनी के चेहरे पर कोई शिकन नहीं देखने को नहीं मिल रही थी। वह अपने योजना पर अडिग रहे। कई खिलाड़ियों ने मिस फील्ड की, कैच छोड़े बावजूद इसके धोनी ने फील्डर्स की जगह को नहीं बदला। जिसकी वजह से इन खिलाड़ियों का हौसला बना रहा।

विकेट के पीछे जादूगर
पूरे आईपीएल में शुभमन गिल आतिशी फॉर्म में रहे और उन्होंने 17 मैचों में रिकॉर्ड 890 रन बनाए, इस दौरान 3 शतक और 4 अर्धशतक लगाए। फाइनल मुकाबले में जब गिल खतरनाक नजर आ रहे थे और उनके कैच छूट रहे थे तो जडेजा की गेंदपर धोनी ने बिजली से भी तेज स्टंपिंग करके ना सिर्फ गिल को पवेलियन भेजा बल्कि मैच में सीएसके की वापसी भी कराई।

टीम में नहीं किया कोई बदलाव
महेंद्र सिंह धोनी की एक बड़ी खासियत यह है कि वह अपनी टीम के प्लेइंग 11 में कोई खास बदलाव नहीं करते हैं। इस सीजन में धोनी ने पिछले 7 मुकाबलों में प्लेइंग 11 में कोई बदलाव नहीं किया। जिसकी वजह से टीम में खेल रहे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास हमेशा सातवें आसमान पर रहा।

धोनी ने जिस तरह से अपने खिलाड़ियों पर भरोसा जताया उसका रिजल्ट खिलाड़ियों के प्रदर्शन में भी देखने को मिला। फिर कोई भी मैदान है, कैसी भी पिच हो इन खिलाड़ियों ने अपनी टीम के लिए बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया और टीम को ट्रॉफी जिताने में अहम भूमिका निभाई।

पिछले 7 मैचों में चेन्नई की प्लेइंग 11

धोनी ने पिछले 7 मैचों में एक ही टीम रखी, इंपैक्ट खिलाड़ी को मिलाकर कुल 12 खिलाड़ियों को हर मैच में खेलने का मौका मिला। यही वजह है कि धोनी के इस भरोसे को कायम रखने में हर खिलाड़ी ने अहम भूमिका निभाई।

महेंद्र सिंह धोनी, रितुराज गायकवाड़, डिवॉन कोनवे, अजिंक्या रहाणे, मोईन अली, शिवम दुबे, रवींद्र जडेजा, महीश तीक्षणा, तुषार देशपांडे, मथीशा पथिराना, अंबाती रायडू, दीपक चाहर

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