IPL 2023: पंजाब किंग्स फिर लीग स्टेज से बाहर, लंबा हो गया 2014 से जारी इंतजार, इस बार क्या रहे कारण
पंजाब किंग्स की टीम आईपीएल 2014 के बाद से प्लेऑफ में जगह नहीं बना पा रही है। आइए देखते हैं इस सीजन में शिखर धवन की अगुवाई वाली टीम की क्या-क्या समस्याएं रही।

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2023) के एक और सीजन से पंजाब किंग्स (Punjab Kings) की टीम बाहर हो गई है। पंजाब किंग्स 2014 के बाद से प्लेऑफ में नहीं पहुंच पाई है और ये प्लेऑफ के लिए सबसे लंबे इंतजार का रिकॉर्ड भी है। पंजाब किंग्स की टीम ने इस सीजन में 14 मैच खेले जिसमें 6 जीत और आठ हार का सामना करना पड़ा। वह 12 ही अंक हासिल कर पाए।
दो बड़े बदलाव किए थे-
इस टीम ने इस बार अपना भाग्य बदलने के लिए दो बड़े बदलाव किए जिसमें आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी के तौर पर सैम करन को 18.5 करोड रुपए में खरीदा और शिखर धवन को अपने कप्तान के तौर पर नियुक्त किया। लेकिन दोनों ही पैंतरे काम नहीं कर पाए।
यह टीम इस बार बहुत खराब दिखाई नहीं दे रही थी और उनके पास अंतिम दो मैच जीतकर प्लेऑफ में जगह बनाने का बढ़िया मौका भी था लेकिन उन्होंने दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ हार कर वही पुरानी कहानी फिर से दोहरा दी।
क्या रही सबसे बड़ी समस्या-
पंजाब किंग्स की टीम की सबसे बड़ी समस्या उनकी बल्लेबाजी और गेंदबाजी का एक साथ ना चलना रहा। यह टीम जॉनी बेयरस्टो की कमी से लगातार जूझती रही जो अपनी लेग इंजरी के चलते आईपीएल में नहीं खेल सके। इस दौरान मैथ्यू शार्ट और भानुका राजपक्षे जैसे ओवरसीज खिलाड़ी बेयरस्टो को रिप्लेस करने में नाकामयाब रहे।
इसके अलावा कप्तान शिखर धवन और लियाम लिविंगस्टोन की चोट ने टीम की समस्या को और बढ़ाया। इससे टॉप ऑर्डर और ओपनिंग जोड़ी तितर-बितर होती गई। टीम के बैटिंग कोच वसीम जाफर ने खुद माना है कि इससे टीम का गेम प्लान खराब हुआ था। लिविंगस्टोन शुरुआती छह मैच नहीं खेल पाए थे।
बैटिंग लाइन का फिक्स ना होना-
शाहरुख खान कई सालों से एक फिनिशर के तौर पर पहचाने जा रहे हैं लेकिन उन्होंने आईपीएल में अब तक 33 पारियों में एक T20 50 भी नहीं लगाई है। टीम को उन पर विश्वास है लेकिन शाहरुख ने इस सीजन में खेले गए 14 मैचों में केवल एक बार ही एक पारी में 20 से ज्यादा बॉल खेली।
मैथ्यू शार्ट के फेल होने के बाद सिकंदर रजा को लिया गया लेकिन सिकंदर रजा और शाहरुख खान दोनों ही बल्लेबाजी करने के लिए तब आए जब बहुत ही कम गेंदे खेलने के लिए बचती थी और यह कोई बहुत समझदारी भरा फैसला नहीं था।
गेंदबाजी में बड़े नामों ने किया निराश-
गेंदबाजी में भी इस टीम को काफी निराशा का सामना करना पड़ा। अर्शदीप सिंह ने 17 विकेट लिए लेकिन उनका इकोनामी रेट 10 कर रहा। इसी इकोनामी रेट से सैम करन ने भी रन दिए और नाथन एलिस व कैगिसो रबाडा भी महंगे रहे। रबाडा ने केवल छह मैच खेले और उसमें भी 10 के इकोनामी रेट से ही गेंदबाजी की।
हालांकि स्पिनर हरप्रीत बरार और राहुल चाहर कुछ हद तक कसी हुई गेंदबाजी कर सके लेकिन इनको विकेट नहीं मिले।
मोहाली का बैटिंग विकेट-
पंजाब किंग्स की टीम का होम ग्राउंड मोहाली रहा लेकिन यहां पर जो बल्लेबाजी के अनुकूल परिस्थितियां देखी गई। उसने कमजोर हुई गेंदबाजी का काम और खराब किया।
पंजाब की टीम के पास इन जैसी परिस्थितियों में ऑस्ट्रेलिया में खेलने के आदी मैथ्यू शॉर्ट को खिलाया। लेकिन ये बैटर भी कुछ खास नहीं कर पाया था। मोहाली में टीम को बैटिंग में भी खामियाजा भुगतना पड़ा और बॉलिंग में भी।
पावर प्ले में सबसे ज्यादा विकेट गवाएं-
पंजाब किंग्स की टीम ने पावरप्ले के दौरान 28 विकेट गवाएं जो इस सीजन में किसी टीम द्वारा पावरप्ले में गवाएं गए सबसे ज्यादा विकेट है। पंजाब किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स अभी तक 28-28 विकेट गंवाकर टॉप पर बैठे हैं। अगर आपका टॉप ऑर्डर पावर प्ले में लगातार फेल होता रहेगा तो बाद में उसकी भरपाई नहीं हो सकती।
हमने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ ताजा मुकाबले में यह देखा है कि बाद में किसी भी हद तक भरपाई की कोशिशों के बावजूद गेंदबाजी की खामियों के चलते आप मैच हार भी सकते हैं।
दो पॉजिटिव भी रहे-
इन सब चीजों के बावजूद पंजाब किंग्स के पास प्रभ्सिमरन सिंह और जितेश शर्मा जैसे दो भारतीय युवा है। 22 साल के प्रभसिमरन ने 14 मैचों में 358 रन बनाए हैं जिसमें उनका स्ट्राइक रेट 150 रहा है। सिंह ने इस सीजन में एक शतक भी लगाया है। बस इनको कंसिस्टेंसी दिखानी होगी।
जितेश शर्मा ने निचले क्रम पर बहुत अच्छी बैटिंग की है जिन्होंने पांच नंबर 5 या उससे निचले क्रम पर आकर 14 मैचों में 156 के स्ट्राइक रेट से 309 रन बनाए हैं। ये दो खिलाड़ी आने वाले सीजनों में टीम के लिए काफी अहम भूमिका निभाने का वादा करके जा रहे हैं।












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