IPL 2023: मुम्बई आईपीएल की बाजीगर, क्वालिफायर में हार कर भी जीत चुकी है ट्रॉफी
गुजरात के खिलाफ आरसीबी की हार के बाद मुंबई इंडियंस प्लेऑफ़ में पहुँच गई। इससे पहले मुंबई ने हैदराबाद को हराया था।

IPL 2023 में मुम्बई इंडियंस किस्मत के सहारे प्ले ऑफ में पहुंच गयी। अब उसका मुकाबला एलिमिनेटर में लखनऊ सुपर जाएंट्स के साथ होगा जो 24 मई को चेन्नई में खेला जाएगा। इस मैच में जो हारेगा वह प्रतियोगिता से बाहर हो जाएगा। मुम्बई को आइपीएल का बाजीगर कहा जाता है क्यों कि उसने प्ले ऑफ में हार के बाद भी खिताब जीतने का हैरतअंगेज कारनामा किया है। यह करिश्मा उसने 2013 में किया था। लेकिन 2023 में स्थिति अलग है। इस बार मुम्बई चौथे स्थान पर है। उसे पहले एलिमिनेटर का मैच जीतना होगा। फिर दूसरा क्वालिफायर मैच भी जीतना होगा। तब जा कर वह फाइनल में पहुंचेगी। अगर ट्रॉफी जीतनी है तो उसे फाइनल में सबसे बड़ा चमत्कार करना होगा। ये आसान नहीं है। मुम्बई को इसके लिए पत्थर पर दूब उगानी होगी। लेकिन क्रिकेट में कुछ भी असंभव नहीं।
मुम्बई IPL की बाजीगर
अंक तालिका में पहले दो स्थानों पर रहने वाली टीमों के बीच पहला क्वालिफायर खेला जाता है। जीतने वाली टीम फाइनल में जाती है और हारने वाली टीम को एक और मौका मिलता है। उसका मुकाबला एलिमिनेटर की विजेता टीम से होता है। 2013 में मुम्बई अंकतालिका में दूसरे स्थान पर था। पहले क्वालिफायर में वह चेन्नई से हार गया था। लेकिन फिर उसने एलिमिनेटर की विजेता राजस्थान रॉयल्स को हरा कर फाइनल में जगह बनायी। फाइनल में उसने जबर्दस्त वापसी की। मुम्बई ने उस चेन्न्ई को हरा दिया जिससे वह पहले क्वालिफायर में हार गया था। उस पर तुर्रा ये कि मुम्बई ने एक छोटे स्कोर की रक्षा कर अपना पहला आइपीएल खिताब जीता था। जब बीच प्रतियोगिता में पोंटिंग ने छोड़ दी कप्तानी 2013 का आइपीएल मुम्बई के लिए घटनाप्रधान रहा था। कई अप्रत्याशित बातें हुईं थीं। प्रतियोगिता जब शुरू हुई तब मुम्बई के कप्तान ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज रिकी पोंटिंग थे। मुम्बई ने 2013 की नीलामी में उन्हें खरीदा था। ऑस्ट्रेलिया को 2003 और 2007 का विश्वकप जिताने वाले रिकी पोंटिंग जब मुम्बई से जुड़े तो उसकी आशाएं आसमान पर पहुंच गयीं। लेकिन जल्द ही ये आशाएं चकनाचूर हो गयीं। उन्होंने सात मैचों तक कप्तानी की। लेकिन उनके बल्ले से रन नहीं निकले। दुनिया का धाकड़ बल्लेबाज अपनी नाकामी पर दबाव में आ गया। तब अपमानजनक परिस्थितियों से हताश हो कर पोंटिंग ने बीच प्रतियोगिता में कप्तानी छोड़ दी।
रोहित की कप्तानी में खेले सचिन
पोंटिंग और सचिन तेंदुलकर की सलाह पर टीम की कप्तानी रोहित शर्मा को सौंप दी गयी। रिकी पोंटिंग टीम में तो रहे लेकिन उनकी भूमिका खिलाड़ी से अधिक सलाहकार की हो गयी। रोहित के लिए कप्तानी आसान न थी। टीम में सचिन तेंदुलकर भी थे जिनको देख कर उन्होंने क्रिकेट खेलना सीखा था। सचिन ने 2012 में मुम्बई की कप्तानी छोड़ दी थी। अपने बचपन के हीरो का कप्तान बनना रोहित के लिए जितना एक सुखद अनुभव था उससे अधिक एक चुनौती थी। लेकिन रोहित ने शांतचित्त हो कर सभी जिम्मेदारियों को संभाला और टीम को जीत की राह पर ले गये।
रोहित ने ऐसे हराया था धोनी को
2013 का फाइनल एक लो स्कोरिंग मुकाबला था। कम स्कोर वाले मैच में उसी कप्तान को कामयाबी मिलती है जो दबाव सोखने की कला में माहिर होता है। वैसे तो महेन्द्र सिंह धोनी को कैप्टन कूल कहा जाता है लेकिन रोहित शर्मा ने इस मामले में उन्हें मात दे दी थी। मुम्बई ने पहले बैटिंग की लेकिन उसकी बल्लेबाजी लड़खड़ा गयी। फाइनल में सचिन और पोंटिंग नहीं खेले थे। पोलार्ड के 60 और अंबाती रायडू के 37 रनों की बदौलत मुम्बई केवल 148 रन ही बना सकी। रोहित शर्मा 2 रन ही बना सके। लेकिन उन्होंने अपनी भावनाओं पर काबू रखा। उस समय मुम्बई की बॉलिंग बहुत मजबूत थी। टीम में लसिथ मलिंगा मिचेल जॉनसन, हरभजन सिंह, प्रज्ञान ओझा जैसे विकेट टेकर गेंदबाज थे।
अचानक मिली कप्तानी, रोहित पहली परीक्षा में ही पास
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रोहित शर्मा ने 148 रनों के बचाव के लिए गेंदबाजी विकल्पों का अच्छा इस्तेमाल किया। मलिंगा और मिचेल जॉनसन ने शुरू में ही 2-2 विकेट लेकर चेन्नई का स्कोर 4 विकेट के नुकसान पर 35 रन कर दिया। माइकल हसी 1,मुरली विजय 18, सुरेश रैना 0 और बद्रीनाथ 0 के स्कोर पर पवेलियन लौट चुके थे। ऋषि धवन ने ड्योन ब्रावो को आउट कर चेन्न्ई का स्कोर 5 विकेट के नुकसान पर 36 रन कर दिया। सिर्फ धोनी ने एक छोर संभाले रखा । वे 63 रनों पर नाबाद रहे लेकिन उन्हें किसी और बल्लेबाज का साथ नहीं मिला। चेन्नई 20 ओवरों में सिर्फ 125 रन ही बना सकी। इस मैच में रोहित शर्मा ने ऑलराउंडर किरोन पोलार्ड से समेत कुल छह गेंदबाजों से बॉलिंग करायी थी। ऋषि धवन को एक ही ओवर दिया लेकिन उन्होंने ब्रावो को आउट कर मैच का रुख मोड़ दिया। मलिंगा और जॉनसन के अलावा हरभजन सिंह ने भी दो विकेट लिये। पोलार्ड से चार ओवर कराये जिसमें उन्होंने एक विकेट निकाला। प्रज्ञान ओझा ने 4 ओवरों में 28 रन दे कर एक विकेट लिया। 148 रन बनाने के बाद भी मुम्बई ने 23 रनों से यह फाइनल जीत लिया था।












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