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उमरान मलिक की 157 km/h की रफ्तार सिर-आंखों पर, लेकिन मत भूलिए कि वरुण आरोन के साथ क्या हुआ ?

नई दिल्ली, 03 जून। भारत के तेज गेंदबाज उमरान मलिक की हर तरफ तारीफ हो रही है। तारीफ की बात भी है। उन्होंने 157 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से गेंद फेंक कर एक नया मुकाम हासिल किया है। वे लगातार 150 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे ऊपर की रफ्तार छू रहे हैं। किसी भारतीय गेंदबाज के लिए यह असाधारण बात है। भारत के किसी गेंदबाज ने आज तक ऐसा नहीं किया है। उमरान भारत के नये तूफान हैं जो दुनिया भर के बल्लेबाजों में खौफ पैदा कर सकते हैं। लेकिन यहां ध्यान देने की बात है कि अगर किसी तेज गेंदबाज का बेहतर स्ट्रेस मैनैजमेंट नहीं हुआ तो उसकी स्पीड ही उसकी परेशानी का सबब बन जाती है।

IPL 2022 bowler Umran Malik and Varun Aaron throw the ball at a speed of more than 150 kmph

आइपीएल इतिहास की सबसे तेज गेंद (157.7 km/h) फेंकने का रिकॉर्ड आस्ट्रेलिया के शॉन टेट के नाम है। 2011 में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए उन्होंने दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ ये गेंद फेंकी थी। शॉन टेट की रफ्तार बहुत तेज थी लेकिन लाइन- लेंग्थ पर उनका नियंत्रण नहीं था। ज्यादा जोर लगा कर गेंद फेंकने की वजह से अक्सर वे चोटिल हो जाते थे। इसकी वजह से टेट आस्ट्रेलिया के लिए सिर्फ 3 टेस्ट, 35 वनडे और 21 टी-20 मैच ही खेल सके थे। इसलिए उमरान मलिक की बेहतर देखभाल जरूरी है। वे अभी भारतीय टीम से जुड़े ही हैं। कोई अंर्राष्ट्रीय मैच खेला भी नहीं है। फिर भी उनकी तारीफों के पुल बांधे जा रहे हैं। यह प्रवृति नुकसानदेह हो सकती है। उनके पांव जमीन पर ही रहने दीजिए। क्या भूल गये कि भारत के एक और 'तूफान' वरुन आरोन के साथ क्या हुआ था ?

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    Shaheen Afridi gives unusual reply on Umran Malik’s speed |वनइंडिया हिन्दी | #Cricket
    वरुण आरोन भी तूफान की तरह आये थे

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    2011 में विजय हजारे ट्राफी का फाइनल इंदौर में खेला गया था। झारखंड और गुजरात के बीच खिताबी मुकाबला था। झारखंड से खेल रहे थे वरुण आरोन ने इस मैच में 153 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से गेंद फेंक कर पूरे देश में तहलका मचा दिया था। किसी भारतीय गेंदबाज के लिए ये रफ्तार आश्चर्य से कम न थी। सब जगह उनकी स्पीड की चर्चा होने लगी। ये मार्च 2011 की बात है। भारतीय चयनकर्ता भी उनकी रफ्तार से प्रभावित हुए। सात महीने बाद ही उन्हें भारतीय टीम में चुन लिया गया। अक्टूबर 2011 में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ मुम्बई में अपना वनडे डेब्यू किया। अपने पहले वनडे मैच में वरुण आरोन ने 6.1 ओवर में 23 रन दे कर 3 विकेट लिये। पहले मैच में उन्होंने अपनी तेज गेंदबाजी की छाप छोड़ दी। एक महीने बाद उनका टेस्ट टीम में चयन हुआ। वरुण ने नवम्बर 2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ मुम्बई में टेस्ट डेब्यू किया। अपने पहले टेस्ट में भी उन्होंने ठीक-ठाक गेंदबाजी की। 28 ओवर में 108 रन दे कर 3 विकेट लिये। वरुण आरोन की रफ्तार इतनी तेज थी कि बल्लेबाज उनसे खौफ खाते थे। वन डे में उन्होंने पहले छह विकेट क्लीन बोल्ड कर हासिल किये थे। उनकी आग उगलती गेंदों को डिफेंस करना मुश्किल होता था। भारतीय टीम में एक खौफनाक तेज गेंदबाज के मिलने पर बहुत खुश हुई। लेकिन ये खुशी चार दिन की चांदनी साबित हुई। मांसपेशियों में खिंचाव के कारण वरुण की पीठ और पैरों में तकलीफ शुरू हो गयी।

    इंजूरी ने तबाह कर दिया करियर

    इंजूरी ने तबाह कर दिया करियर

    फिटनेस की समस्या के कारण वे टीम से अंदर बाहर होने लगे। सिर्फ पांच साल में ही उनके टेस्ट करियर का अंत हो गया। पांच साल में उन्होंने सिर्फ 9 टेस्ट खेले और 18 विकेट लिये। 2015 में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना अंतिम टेस्ट खेला था। उनका वनडे करियर भी सिर्फ चार साल चला। 2014 में उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ अंतिम बार भारत की जर्सी पहनी थी। 9 वनडे में 11 विकेट लिये थे। चोट की समस्या के कारण वरुण आरोन का चमकता करियर फीका पड़ने लगा। अब उनकी उम्र 32 साल है और वे आज भी क्रिकेट खेल रहे हैं। उनकी रफ्तार अभी भी 140 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक है लेकिन उनका रुतबा पहले की तरह नहीं रहा। 2022 की आइपीएल नीलामी में गुजरात टाइटंस ने उन्हें 50 लाख की बेस प्राइस पर खरीदा था। उन्होंने गुजरात के लिए केवल दो मैच ही खेले और दो विकेट लिये। यानी रफ्तार का बादशाह अब अपने अतीत की छाया मात्र रह गया है।

    वकार युनूस से उमरान की तुलना ठीक नहीं

    वकार युनूस से उमरान की तुलना ठीक नहीं

    वरुण आरोन के साथ जो हुआ वह उमरान मलिक के साथ न हो। उमरान मलिक की फिटनेस पर अभी से ध्यान देना जरूरी है। उमरान की तुलना वकार युनूस से की जा रही है। ये तुलना अतिशयोक्तिपूर्ण है जो उनके लिए ठीक नहीं है। वकार विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। वे रफ्तार, स्विंग और यॉर्कर के बादशाह थे। उनकी तरह बनना बहुत कठिन है। वकार की तुलना महान तेज गेंदबाज डेनिस लिली से होती थी। दोनों ने सिर्फ 38 टेस्ट मैचों में 200 विकेट लिये थे। आज तक कोई दूसरा तेज गेंदबाज इस रिकॉर्ड को नहीं तोड़ सका। कितने दिग्गज आये और गये लेकिन ये कारनाम नहीं कर सके। डेल स्टेन, मैलकम मार्शल, एलेन डोनाल्ड, रिचर्ड हैडली, इमरान खान, एंडी रॉबर्ट्स, माइकल होल्डिंग, ज्यॉफ थॉमसन से भी ज्यादा बेहतर गेंदबाज थे वकार युनूस। भारत के उभरते गेंदबाज की तुलना एक ऐसे आला दर्जे के गेंदबाज से क्यों की जा रही है ?

    उस तेजी का क्या फायदा जब रन लुटा दें ?

    उस तेजी का क्या फायदा जब रन लुटा दें ?

    उमरान ने आपीएल में बेहतरीन गेंदबाजी की जिसका उन्हें इनाम मिला। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए उनका भारतीय टीम में चयन हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उनकी परीक्षा अभी बाकी है। एक गेंदबाज सिर्फ रफ्तार से ही कामयाब नहीं हो सकता। उसकी गेंदबाजी में एकुरेसी और वैरियेशन भी चाहिए। आइपीएल में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ उमरान ने अपने आखिरी ओवर में रफ्तार का जलवा दिखाया था। उन्होंने छह गेंदों में 153, 145, 154, 157 और 156 km/h की रफ्तार निकाली थी। लेकिन इस रफ्तार का भला क्या फायदा ? आइपीएल इतिहास की तीसरी सबसे तेज गेंद (157 km/h ) पर दिल्ली के रॉमैन पावेल ने चौका मारा था। इतनी तेज गेंदें रहने के बावजूद इस ओवर में 19 रन बने थे। डेविड वार्नर ने उमरान के एक ओवर में 21 बनाये थे। दिल्ली के खिलाफ उनके चार ओवर में 52 रन बने थे। उमरान मलिक बेशक बहुत प्रतिभाशाली हैं लेकिन उन्हें अभी बहुत कुछ सीखना है। अभी तो उनकी शुरुआत ही होने वाली है। टीम इंडिया में बने रहने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।

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