IND vs SA: जानें क्यों मुश्किल है भारत का केपटाउन में जीतना, विराट सेना को डराते हैं यह आंकड़े

नई दिल्ली। भारत और साउथ अफ्रीका के बीच खेली जा रही 3 मैचों की टेस्ट सीरीज का आखिरी मैच केपटाउन के मैदान पर खेला जाना है, जहां पर विराट कोहली के नेतृत्व वाली भारतीय टीम पहली बार साउथ अफ्रीका की सरजमीं पर टेस्ट सीरीज जीतने के इरादे से उतरेगी। दोनों टीमें फिलहाल सीरीज में 1-1 की बराबरी पर हैं। आंकड़ो के लिहाज से देखें तो यह सीरीज अब तक काफी ऐतिहासिक रही है। जब भारतीय टीम सीरीज का पहला मैच खेलने के लिये उतरी थी तो उसने सेंचुरियन के मैदान पर कभी भी कोई टेस्ट मैच नहीं जीता था, इतना ही नहीं इस मैदान पर साउथ अफ्रीका को सिर्फ दो ही टीमों (इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया) ने हराया था, लेकिन भारतीय टीम ने इतिहास को पलटते हुए 113 रनों से जीत हासिल की और साउथ अफ्रीका को सेंचुरियन में हराने वाली पहली एशियाई और ओवरऑल तीसरी टीम बनी।
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सेंचुरियन के बाद जब टीम जोहान्सबर्ग पहुंची तो यहां पर आंकड़े भारत के पक्ष में नजर आ रहे थे, क्योंकि भारतीय टीम ने इस मैदान पर 5 मैच खेले थे और एक में भी उसे हार का सामना नहीं करना पड़ा था। इस सीरीज से पहले जोहान्सबर्ग में भारत के नाम 2 जीत और 3 ड्रॉ शामिल थे लेकिन साउथ अफ्रीका की टीम ने यहां भी इतिहास को बदला और भारत के खिलाफ पहली बार इस मैदान पर जीत हासिल करते हुए 7 विकेट से हरा दिया। ऐसे में जब भारतीय टीम मंगलवार को केपटाउन में उतरेगी तो सीरीज पर अपना नाम दर्ज करने के लिये एक बार फिर से इतिहास को बदलना होगा।
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केपटाउन में साउथ अफ्रीका का रहा है दबदबा
केपटाउन के मैदान की बात करें तो भारत ने 1993 में पहली बार न्यूलैंडस ग्राउंड पर डेब्यू किया था और तब से लेकर अब तक 5 बार यहां पर मैच खेल चुकी है, हालांकि उसे अब तक एक बार भी जीत हासिल करने का सौभाग्य नहीं मिला है। भारतीय टीम को केपटाउन में दो बार ड्रॉ का सामना करना पड़ा जबकि 3 बार शर्मनाक हार मिली है। भारत को 1997 में 282 रनों से हार मिली थी, जबकि 2007 में 5 विकेट से हार का सामना करना पड़ा था। वहीं पर 2018 दौरे पर सीरीज का पहला मैच यहां पर खेला गया था और भारतीय टीम 72 रन से जीत से दूर रह गई थी। भारत के लिये केपटाउन के मैदान पर उसके एक भी मैच में जीत हासिल न कर पाने के रिकॉर्ड से ज्यादा जो आंकड़ा परेशान करने वाला है, वो है साउथ अफ्रीकी टीम का टेस्ट क्रिकेट में इस मैदान पर दबदबा। साउथ अफ्रीका की टीम के लिये केपटाउन वो घरेलू मैदान है जिस पर उसे सबसे ज्यादा सफलता मिली है।

हार-जीत के अनुपात में साउथ अफ्रीका का दबदबा
1889 में पहली बार क्रिकेट में अपना डेब्यू करने के बाद से साउथ अफ्रीका की टीम ने सबसे ज्यादा केपटाउन के मैदान पर मैच खेले हैं, जिसके चलते उसका यहां पर सबसे ज्यादा जीत हासिल करने का रिकॉर्ड भी है। साउथ अफ्रीका के लिये केपटाउन के मैदान पर जीत-हार का अनुपात 1.238 है। साउथ अफ्रीका की टीम के लिये अपने घर पर खेले गये टेस्ट मैचों में सबसे ज्यादा हासिल किये जीत वाले मैदान की बात करें तो केपटाउन का नाम सबसे ऊपर आता है जिस पर इस टीम ने 58 मैच खेलें हैं और 26 मैचों में जीत हासिल की है।
इस दौरान साउथ अफ्रीका की टीम को 21 मैचों में हार और 11 मैचों में ड्रॉ का सामना करना पड़ा है। केपटाउन के बाद इस लिस्ट में सेंचुरियन का नाम आता है जहां पर साउथ अफ्रीकी टीम ने 27 मैच खेलकर 21 में जीत, 3 में हार और 3 मैच ड्रॉ खेले हैं। इस फेहरिस्त में जोहान्सबर्ग (43 मैच, 19 जीत, 13 हार और 11 ड्रॉ) तीसरे नंबर पर, डरबन (44 मैच, 14 जीत, 16 हार और 14 ड्रॉ) चौथे नंबर पर और पोर्ट एलिजाबेथ (31 मैच, 13 जीत, 13 हार और 5 ड्रॉ) पांचवे पायदान पर काबिज है।

साउथ अफ्रीका का गाबा है केपटाउन
साउथ अफ्रीका के लिये केपटाउन के मैदान का हाल 1991 के बाद बदला है जब उसने अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध के बाद वापसी की। 1991 में वापसी करने के बाद से साउथ अफ्रीका की टीम को 23 जीत और 6 हार का सामना करना पड़ा है, जिसकी वजह से उसकी जीत हार का अनुपात 4.6 हो जाता है जो कि दुनिया में चौथा बेस्ट अनुपात है, तो वहीं पर 1991 के बाद से दुनिया में किसी भी टीम की ओर से एक ही मैदान पर सबसे ज्यादा टेस्ट मैच जीतने के मामले में साउथ अफ्रीका की टीम ऑस्ट्रेलिया के लगभग बराबर है।
ऑस्ट्रेलिया की टीम इस लिस्ट में टॉप पर है तो साउथ अफ्रीका ने दूसरे पायदान पर कब्जा किया हुआ है। 1991 के बाद से किसी एक मैदान पर सबसे ज्यादा जीत हासिल करने वाले घरेलू मैदान की लिस्ट में ऑस्ट्रेलिया की टीम सबसे टॉप पर काबिज है जिसने ब्रिस्बेन गाबा के मैदान पर 31 मैच खेलकर 24 में जीत हासिल की है जबकि 6 मैचों में ड्रॉ का सामना किया है। इस दौरान उसे सिर्फ एक ही मैच में हार का सामना करना पड़ा है वो भी उसे भारत के हाथों मिली है।
इस फेहरिस्त में साउथ अफ्रीका की टीम दूसरे पायदान पर काबिज है जिसने केपटाउन के मैदान पर 34 मैच खेलकर 23 में जीत हासिल की है। हालांकि प्रोटीज टीम को 5 बार हार और 6 बार ड्रॉ का सामना भी करना पड़ा है लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि जिस तरह से गाबा ऑस्ट्रेलिया का अभेद किला माना जाता है केपटाउन भी साउथ अफ्रीका के लिये वैसा ही महत्व रखता है। इस लिस्ट में इंग्लैंड की टीम भी शामिल है जिसके लिये लॉर्डस का ऐतिहासिक मैदान 1991 के बाद से (54 मैच, 23 जीत, 15 हार और 16 ड्रॉ) सबसे ज्यादा जीत दिलाने वाला मैदान बना हुआ है।

64 सालों से लगातार दो मैच नहीं हारा है साउथ अफ्रीका
भारत और साउथ अफ्रीका के बीच खेला जाने वाला सीरीज का आखिरी मैच जनवरी 2020 के बाद से घरेलू टीम के लिये पहला टेस्ट मैच होगा। आखिरी बार जब साउथ अफ्रीका की टीम ने इस मैदान पर इंग्लैंड का सामना किया था तो उसे 189 रनों की हार का सामना करना पड़ा था जो कि मार्च 2014 के बाद इस मैदान पर मिली पहली हार थी। गौरतलब है कि साउथ अफ्रीका की टीम केपटाउन के मैदान पर आखिरी बार 1957-62 के बीच लगातार दो टेस्ट मैच हारा था, जिसके बाद कभी ऐसा नहीं हुआ कि उसे एक मैदान पर लगातार दो मैचों में हार का सामना करना पड़ा हो।
ऐसे में भारतीय टीम के लिये इस मैदान पर जीत हासिल करना आसान नहीं होगा, खासतौर से तब जब जोहान्सबर्ग की जीत के बाद साउथ अफ्रीका की टीम आत्म-विश्वास से भरी हुई केपटाउन पहुंचेगी। हालांकि पिछले कुछ सालों में कोहली की टीम को जब-जब भी बैकफुट पर धकेला गया है, उसने उतनी ही तेजी से वापसी की है, फिर चाहे पिछले साल का ऑस्ट्रेलिया दौरा रहा हो या फिर इंग्लैंड। विराट सेना किसी भी टीम को चौंकाने और इतिहास को बदलने का दम रखती है।












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