क्या जय शाह ने ले लिया तालिबान से पंगा? उठाया ऐसा साहसिक कदम जिसकी हो रही तारीफ
अफगानिस्तान में क्रिकेट को लेकर उतना माहौल नहीं है, तालिबान सरकार आने के बाद तो स्थिति और ज्यादा खराब हुई है । हालांकि अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड वहां स्टेडियम बनाने के लिए प्रयासरत है। अफगान टीम का होम ग्राउंड इस समय अबुधाबी को बनाया गया है।
इससे पहले भारत में भी अफगान बोर्ड अपना होम ग्राउंड रख चुका है। ग्रेटर नोएडा, देहरादून और लखनऊ में मुकाबले खेले जा चुके हैं। इन सबके बीच अफगानिस्तान की महिला क्रिकेट टीम को खेलने की अनुमति नहीं है। तालिबान के अनुसार महिलाएं क्रिकेट नहीं खेल सकती हैं।

आईसीसी हेड जय शाह ने इस मामले को लेकर अब बड़ा कदम उठाया है, यह सराहनीय फैसला कहा जा है। बीसीसीआई, इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया मिलकर काम करेंगे। तीनों बोर्ड महिलाओं को खेल में मदद करेंगे और एक टास्क फ़ोर्स बनाया गया है। इससे विस्थापित अफगान महिलाएं क्रिकेट खेल पाएंगी।
इसे पहल को आगे लेकर जाने के लिए आईसीसी एक फंड की स्थापना करेगा। अफगान महिलाओं को खेल के लिए जरूरी सहायता और रिसोर्स प्रदान करने के लिए फंड से पैसे खर्च होंगे। प्रतिभाशाली महिलाओं को उन्नत कोचिंग, विश्व स्तरीय सुविधाओं की पेशकश की जाएगी और उनकी पूरी क्षमता तक पहुंचने में मदद की जाएगी।
जय शाह ने कहा कि हम समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और प्रत्येक क्रिकेटर को उनकी परिस्थितियों की परवाह किए बिना चमकने का अवसर है, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा। हमें इस टास्क फोर्स और सपोर्ट फंड को लॉन्च करने पर गर्व है, जो एक व्यापक उच्च प्रदर्शन कार्यक्रम द्वारा पूरक है, विस्थापित अफगान महिला क्रिकेटर खेल में अपनी यात्रा जारी रख सकती हैं। यह पहल क्रिकेट के वैश्विक विकास और एकता, लचीलापन को प्रेरित करने की शक्ति के लिए हमारे दृढ़ समर्पण दर्शाती है।
गौरतलब है कि अफगानिस्तान की महिला टीम को आगे नहीं आने देने के कारण ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ने अफगान पुरुष टीमों के साथ द्विपक्षीय सीरीज से किनारा किया है, शेड्यूल होने के बाद सीरीज रद्द कर दी गई थी।












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